मप्र : सतना में करंट की चपेट में आने से बाघ की मौत
सं, दिमो रवि कांत
- 04 Jul 2026, 11:34 PM
- Updated: 11:34 PM
सतना, चार जुलाई (भाषा) मध्यप्रदेश के सतना जिले के मझगवां क्षेत्र में जंगली सूअरों के शिकार के लिए कथित तौर पर बिछाए गए करंट वाले तार की चपेट में आने से एक बाघ की मौत हो गई। इसके बाद सबूत मिटाने के उद्देश्य से वन विभाग की सुरक्षा समिति के एक कर्मचारी समेत कुछ लोगों ने बाघ के शव को जंगल में दफना दिया। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी ने बताया कि यह घटना मई में हुई थी। इस मामले में अब तक पांच से सात लोगों की पहचान की गई है, जिनमें से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
सतना के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) मयंक चांदीवाल ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, "चार-पांच दिन पहले सूचना मिली थी कि एक बाघ का शिकार किया गया है और उसके शव को दफना दिया गया है। सूचना की पुष्टि के लिए मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया गया।"
उन्होंने बताया कि संदिग्ध स्थान का पता चलने के बाद श्वान दस्ते और वन विभाग की टीम ने वहां तलाश अभियान चलाया, लेकिन शुरुआती प्रयास में सफलता नहीं मिली।
चांदीवाल ने कहा, "बाद में एक मुखबिर ने वन विभाग की सुरक्षा समिति के एक कर्मचारी सहित कुछ लोगों के नाम बताए। पूछताछ के दौरान कर्मचारी ने वह स्थान बताया, जहां बाघ के शव को दफनाया गया था।"
उन्होंने बताया कि पूछताछ में यह भी सामने आया कि जंगली सूअरों का शिकार करने के लिए करंट वाला तार लगाया गया था, जिसकी चपेट में आने से बाघ की मौत हो गई। इसके बाद कार्रवाई के डर से आरोपियों ने घटनास्थल के पास ही बाघ के शव को दफना दिया।
डीएफओ ने बताया कि शव दफनाए जाने का स्थान दो जुलाई को चिन्हित किया गया। अत्यधिक सड़ चुके शव से नमूने लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं।
उन्होंने कहा कि मामले में पांच से सात लोगों की पहचान की गई है और दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
इस बीच, वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने सरभंगा वन क्षेत्र में बाघ की मौत और शव को दफनाए जाने की घटना की निंदा की।
उन्होंने आरोप लगाया, "मध्यप्रदेश में यह बाघ की 40वीं मौत है। खुफिया तंत्र की कमजोरी और जवाबदेही के अभाव के कारण वन्यजीव शिकार के मामलों में दोषसिद्धि की दर कम है, जिससे पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।"
भाषा
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