राहुल गांधी ने गुजरात में विभिन्न त्रासदियों के पीड़ितों के परिजनों से मुलाकात की
शफीक दिलीप
- 06 Jul 2024, 07:29 PM
- Updated: 07:29 PM
अहमदाबाद, छह जुलाई (भाषा) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुजरात में हाल के वर्षों में हुई विभिन्न त्रासदियों में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों से शनिवार को मुलाकात की और उनकी शिकायतों को संसद में उठाने का वादा किया।
राजकोट में टीआरपी गेम जोन अग्निकांड, वडोदरा में नाव पलटने की घटना, 2022 में मोरबी पुल ढहने की घटना और 2016 के ऊना दलित पिटाई मामले के पीड़ितों के परिजनों ने यहां गुजरात कांग्रेस मुख्यालय में लोकसभा में विपक्ष के नेता से मुलाकात की।
कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी ने कहा, ‘‘राहुल गांधी ने पीड़ितों के परिवार के सदस्यों से बातचीत की, उनके मुद्दों को समझा और वादा किया कि वह उन्हें संसद में उठाएंगे, ताकि न्याय मिले।’’
मोरबी पुल हादसे में अपनी दस वर्षीय बेटी को खोने वाले नरेंद्र परमार ने कहा कि गुजरात की भाजपा शासित ‘‘भ्रष्ट व्यवस्था’’ से उनका भरोसा उठ गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने गांधी से कहा कि सभी मुख्य आरोपी जमानत पर हैं और अदालती कार्यवाही बहुत धीमी गति से चल रही है। हम इस भ्रष्ट व्यवस्था से अपना भरोसा खो चुके हैं। यहां तक कि कंपनी के एमडी भी जमानत पर हैं।’’
परमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘गांधी ने हमसे वादा किया है कि वह हमारी बात को संसद में उठाएंगे, ताकि हमें जल्द से जल्द न्याय मिले।’’
तीस अक्टूबर, 2022 को मोरबी शहर में मच्छू नदी पर बने ब्रिटिश काल के झूला पुल के ढह जाने से 135 लोगों की मौत हो गई। इस पुल का रखरखाव ओरेवा ग्रुप करता था।
वडोदरा में नाव पलटने की घटना में अपने नौ वर्षीय बेटे को खोने वाली संध्या निजामा ने आरोप लगाया कि न्याय नहीं हुआ क्योंकि पुलिस ने कई दोषियों को छोड़ दिया।
संध्या ने कहा, ‘‘पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार कई प्रमुख लोग अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं। हमारे बच्चों को इस यात्रा पर ले जाने वाले स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। अधिकारी भी अदालत को गुमराह कर रहे हैं। गांधी ने वादा किया है कि वे हमारे मुद्दे को लोकसभा में उठाएंगे।’’
अठारह जनवरी को वडोदरा शहर के हरनी इलाके में मोटनाथ झील में एक नाव पलटने से 12 स्कूली छात्रों और दो शिक्षकों की मौत हो गई थी।
राजकोट गेम जोन में लगी आग में अपनी छोटी बहन आशा कथड़ को खोने वाली संतोषबेन कथड़ ने दावा किया कि उन्हें राज्य सरकार द्वारा की जा रही जांच पर भरोसा नहीं है।
कथड़ ने कहा, ‘‘हमने राहुल गांधी को उस आंदोलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है जिसे हम शुरू करने की योजना बना रहे हैं, क्योंकि हमें जांच पर भरोसा नहीं है। गांधी ने मुझसे कहा कि जब तक हमें न्याय नहीं मिल जाता, वे हमारा साथ देंगे। उन्होंने संसद में इस मुद्दे को उठाने का भी वादा किया है।’’
पच्चीस मई को राजकोट शहर में गेम जोन में लगी भीषण आग में चार बच्चों सहित 27 लोगों की मौत हो गई थी।
जुलाई 2016 में ऊना शहर के पास एक गांव में गौरक्षकों द्वारा पीटे गए चार दलितों में से एक वशराम सरवैया ने शिकायत की कि सरकार तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल द्वारा किए गए वादों को पूरा करने में विफल रही।
सरवैया ने कहा, ‘‘पटेल ने हमें योग्यता के अनुसार नौकरी देने का वादा किया था। उन्होंने सुनवाई के लिए त्वरित अदालत गठित करने का भी वादा किया था। लेकिन कोई वादा पूरा नहीं किया गया। सभी 40 आरोपी जमानत पर बाहर हैं।’’
भाषा शफीक