कई मोर्चों पर प्रभावी ढंग से संचालित होने वाली सेना बनाना लक्ष्य है : जनरल धीरज सेठ
सुरेश
- 02 Jul 2026, 12:32 AM
- Updated: 12:32 AM
नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने बुधवार को कहा कि भारतीय सेना जंग के लिए हमेशा तैयार और युद्ध का व्यापक अनुभव रखने वाला बल है तथा इसका लक्ष्य एक ऐसी प्रौद्योगिकी युक्त और भविष्य के लिए तैयार सेना बनाना है, जो कई मोर्चों पर प्रभावी ढंग से संचालित हो सके।
उन्होंने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए 'विजय' शब्द का इस्तेमाल किया।
'विजय' शब्द को अंग्रेजी में लिखे जाने पर इसमें शामिल अक्षरों का अभिप्राय यहां 'वी' से 'विजिलेंस (सतर्कता), आई से इनोवेशन (नवाचार), 'जे' से 'ज्वाइंटनेस' (एकीकृत), 'ए' से 'आत्मनिर्भरता' और 'वाई' से 'योद्धा प्रथम' है।
जनरल सेठ ने कहा कि इसके प्रत्येक अक्षर में ''मेरी प्राथमिकताएं'' झलकती हैं।
जनरल सेठ एक बेहतरीन सैन्य अधिकारी हैं, जिनके नाम पश्चिमी सीमा पर सेना की दो अभियानगत कमान संभालने का विशेष रिकॉर्ड है। उन्होंने मंगलवार को सेना प्रमुख का पदभार संभाला। उन्होंने जनरल उपेंद्र द्विवेदी की जगह ली, जो 30 जून को सेवानिवृत्त हो गए।
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), खड़कवासला के पूर्व छात्र जनरल सेठ को दिसंबर 1986 में बख्तरबंद कोर में कमीशन प्रदान किया गया था।
बुधवार को साउथ ब्लॉक के परिसर में सलामी गारद का निरीक्षण करने के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए जनरल सेठ ने कहा, ''मैं कर्तव्य, सम्मान और 'राष्ट्र सर्वोपरि' के आदर्शों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता के साथ यह जिम्मेदारी (थलसेना प्रमुख का पद) स्वीकार करता हूं।''
इकतीसवें थलसेना प्रमुख का पद संभालने से पहले वह थलसेना के उपप्रमुख के रूप में कार्यरत थे।
जनरल सेठ ऐसे समय में थलसेना प्रमुख का पद संभाल रहे हैं, जब वैश्विक भू-रणनीतिक परिदृश्य लगातार बदल रहा है और प्रौद्योगिकी में प्रगति तथा आधुनिक युद्ध की निरंतर बदलती प्रकृति के कारण सुरक्षा संबंधी चुनौतियां और अधिक गंभीर होती जा रही हैं।
उन्होंने कहा, ''बदलते सुरक्षा परिवेश से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें नए जोश और दृढ़ संकल्प के साथ सेना के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होगा।''
उन्होंने कहा, ''हमारा लक्ष्य प्रौद्योगिकी-सक्षम, भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार, हर दृष्टि से सशक्त तथा विभिन्न क्षेत्रों में अभियान चलाने में सक्षम सेना का निर्माण करना है।''
इस दृष्टिकोण के अनुरूप जनरल सेठ ने कहा कि उन्होंने कुछ 'ध्यान देने वाले क्षेत्र' निर्धारित किए हैं, जो 'परिवर्तन के दशक' (2023-2032) की अवधारणा से प्रेरित हैं। यह भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और पुनर्गठन का वह रोडमैप है जिसकी परिकल्पना रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की थी।
उन्होंने अपने संबोधन में अपने पूर्ववर्ती जनरल उपेंद्र द्विवेदी तथा भारतीय सेना के अन्य पूर्व प्रमुखों के प्रति भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनकी दूरदृष्टि और नेतृत्व ने भारतीय सेना को एक मजबूत, अजेय और विश्वसनीय सैन्य बल के रूप में स्थापित किया है।
भाषा अमित सुरेश
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