दिल्ली में तीन या चार जुलाई को मॉनसून दे सकता दस्तक
सुरेश
- 30 Jun 2026, 11:30 PM
- Updated: 11:30 PM
नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में मंगलवार को भी भीषण गर्मी का प्रकोप जारी रहा। हालांकि वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि उत्तर भारत में अनुकूल परिस्थितियां बनने के कारण, दिल्ली में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के तीन या चार जुलाई के आसपास दस्तक दे सकता है।
निजी मौसम पूर्वानुमान सेवा 'स्काईमेट वेदर' के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने कहा कि मौसमी मॉनसून-पूर्व कम दबाव क्षेत्र इस समय पंजाब से लेकर उत्तरी बंगाल की खाड़ी तक बना हुआ है, जबकि मॉनसून उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ज्यादातर इलाकों, लद्दाख और मध्य प्रदेश के कुछ और हिस्सों में पहले ही पहुंच चुका है।
उन्होंने कहा कि बंगाल की खाड़ी के उत्तरी हिस्से में चक्रवाती हवाओं का घेरा बना हुआ है। इसके असर से कम दबाव का क्षेत्र बनने और पश्चिम की ओर बढ़ने की उम्मीद है, जिससे अगले कुछ दिनों में बिहार से लेकर उत्तरी पंजाब तक गंगा के मैदानी इलाकों में बड़े पैमाने पर बारिश हो सकती है।
पलावत ने कहा कि दो या तीन जुलाई तक पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तरी राजस्थान में बारिश संबंधी गतिविधियां तेज़ होने की उम्मीद है, और मॉनसून के तीन या चार जुलाई के आसपास दिल्ली और आसपास के इलाकों में पहुंचने की संभावना है।
उन्होंने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, ''मौसमी कम दबाव की पट्टी पंजाब से लेकर उत्तरी बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है। मॉनसून उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के ज़्यादातर हिस्सों और मध्य प्रदेश के कुछ और हिस्सों में पहले ही पहुंच चुका है।''
पलावत ने मॉनसून के दस्तक देने में देरी की वजह बताते हुए कहा कि बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी वाली पूर्वी हवाएं, जो मॉनसून की लगातार बारिश के लिए ज़रूरी हैं, अब तक दिल्ली नहीं पहुंची हैं।
उन्होंने कहा, ''मानसून आमतौर पर मौसमी ट्रफ (हवा के कम दबाव का क्षेत्र) के साथ आगे बढ़ता है, जो अभी पंजाब से बंगाल की खाड़ी तक लगभग 1,500 किलोमीटर की दूरी में फैला हुआ है। उम्मीद है कि बंगाल की खाड़ी से आने वाली पूर्वी हवाएं, 'ट्रफ' के साथ तीन या चार जुलाई के आसपास दिल्ली पहुंचेंगी। तब तक, शहर में छिटपुट बारिश ही होने की संभावना है। एक बार जब ये पूर्वी हवाएं चलने लगेंगी और ट्रफ की स्थिति और अनुकूल हो जाएगी, तो मानसून की गतिविधि में काफी तेजी आएगी।''
यह कम दबाव की पट्टी दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रीढ़ की तरह काम करती है। यह कम वायुमंडलीय दबाव वाला एक लंबा क्षेत्र है जो अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी वाली हवाओं को भारतीय मुख्य भूमि के अंदर तक खींचता है, जिससे बड़े पैमाने पर बारिश होने की संभावना बनती है।
राष्ट्रीय राजधानी मॉनसून के आने का बेसब्री से इंतजार कर रही है, लेकिन अब भी यह दिल्ली भीषण गर्मी की चपेट में है। मंगलवार शाम 5:30 बजे लोगों को 53.5 डिग्री सेल्सियस के बराबर तपन महसूस हुई। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा कि शहर में लू की स्थिति नहीं बनी।
दिल्ली की आधार वेधशाला सफदरजंग में अधिकतम तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3.1 डिग्री अधिक है। पालम में अधिकतम तापमान 41.0 डिग्री सेल्सियस (सामान्य से 3.2 डिग्री ज़्यादा) और लोधी रोड पर 40.1 डिग्री सेल्सियस (सामान्य से 3.1 डिग्री ज़्यादा) दर्ज किया गया।
राष्ट्रीय राजधानी के रिज वेधशाला में सबसे अधिक तापमान दर्ज किया गया। यहां पर पारा 41.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सामान्य से 4.8 डिग्री ज़्यादा था जबकि आयानगर में सामान्य से दो डिग्री अधिक 40.1 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।
मौसम विभाग ने बताया कि सफदरजंग, पालम, लोधी रोड और आयानगर में सुबह 8:30 बजे तक हल्की बारिश दर्ज की गई, जबकि रिज में बारिश नहीं हुई। सुबह 8:30 बजे से शाम 5:30 बजे के बीच पालम और आयानगर में हल्की बारिश दर्ज की गई, जबकि सफदरजंग, लोधी रोड और रिज शुष्क रहा।
सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 30.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.3 डिग्री अधिक है। पालम में भी न्यूनतम तापमान 30.2 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2.4 डिग्री अधि है। लोधी रोड और अयानगर में तापमान क्रमशः 31.2 डिग्री सेल्सियस (सामान्य से 4.2 डिग्री ज़्यादा) और 4.4 डिग्री ज़्यादा दर्ज किया गया, जबकि रिज में न्यूनतम तापमान 29.3 डिग्री सेल्सियस (सामान्य से 3.8 डिग्री ज़्यादा) रहा।
आईएमडी ने कहा, ''अब तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली उपमंडल में केवल एक वेधशाला ही लू की स्थिति तय करती है। आज दिल्ली में लू नहीं चली, क्योंकि इसकी शर्तों को पूरा करने के लिए हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली उपमंडल में कम से कम दो वेधशालाओं पर ऐसी स्थिति होनी चाहिए।''
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक पाकिस्तान से आने वाली शुष्क पश्चिमी हवाओं के कारण उच्च तापमान बना हुआ है, जबकि अरब सागर से आने वाली दक्षिण-पश्चिमी हवाएं भी दिल्ली पहुंच रही हैं और नमी बढ़ा रही हैं।
निजी मौसम विज्ञान सेवा 'स्काईमेट' के महेश पलावत ने बताया, ''जब ये शुष्क और नमी वाली हवाएं आपस में मिलती हैं, तो बादल तो बनते हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर बारिश के लिए जरूरी नमी नहीं होती। जब तक बादल बनते हैं -आमतौर पर शाम चार या पांच बजे के आसपास- तब तक दिन का अधिकतम तापमान दर्ज हो चुका होता है। यही वजह है कि अधिकतम तापमान और तपन, दोनों ही असामान्य रूप से ज्यादा रहे हैं।''
भाषा धीरज सुरेश
सुरेश
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