राज्यों के बीच जल बंटवारा विवादों का एकमात्र समाधान नदियों को आपस में जोड़ना है : राधाकृष्णन
दिलीप
- 27 Jun 2026, 09:29 PM
- Updated: 09:29 PM
बेंगलुरु, 27 जून (भाषा) उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शनिवार को कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच जल बंटवारे को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवादों का एकमात्र स्थायी समाधान नदियों को आपस में जोड़ना बताया।
उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों राज्यों में किसानों के हितों को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए।
बेंगलुरु शहर के संस्थापक नादप्रभु केम्पेगौड़ा की 517वीं जयंती के मौके पर यहां ज्ञानज्योति ऑडिटोरियम में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि केंद्र सरकार ने नदियों को आपस में जोड़ने पर बातचीत शुरू कर दी है। उन्होंने भरोसा जताया कि देश भर के किसानों के बीच पानी का समान बंटवारा सुनिश्चित करने के लिए इस पहल को चरणों में लागू किया जाएगा।
तमिलनाडु से ताल्लुक रखने वाले राधाकृष्णन ने कहा, ''दोनों राज्यों के किसानों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए। यही इस समस्या का असली समाधान है।''
उन्होंने कहा कि राजनीतिक बयानबाजी से दशकों पुराने कावेरी विवाद का समाधान नहीं होगा।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि इसका एकमात्र स्थायी समाधान देश भर की नदियों को आपस में जोड़ना है, ताकि अतिरिक्त पानी को सभी राज्यों के बीच साझा किया जा सके।
भाजपा की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष के तौर पर अपने कार्यकाल को याद करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि उन्होंने राज्यव्यापी यात्रा के दौरान गंगा और कावेरी को आपस में जोड़ने की वकालत की थी।
उन्होंने कहा, ''किसान हमेशा किसान ही होता है। चाहे वह कन्नड़, तमिल, तेलुगु या मराठी बोले, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। वे हम सभी के लिए अन्नदाता हैं।''
इस मौके पर, उपराष्ट्रपति ने नादप्रभु केम्पेगौड़ा को एक दूरदर्शी व्यक्ति बताया, जिनके विचारों ने उनके समय के लगभग पांच सदियों बाद भी आधुनिक बेंगलुरु को आकार देना जारी रखा।
उन्होंने कहा कि केम्पेगौड़ा की मां ने उन्हें ''झीलें बनाने और पेड़ लगाने'' के सिद्धांत के लिए प्रेरित किया, जो बेंगलुरु के सतत शहरी मॉडल की नींव बना। साथ ही, झीलों, जलाशयों और हरे-भरे इलाकों का मिला-जुला नेटवर्क केम्पेगौड़ा की असाधारण दूरदर्शिता को दिखाता है, जो पर्यावरण संरक्षण के वैश्विक प्राथमिकता बनने से बहुत पहले ही सामने आ गई थी।
भाषा शफीक दिलीप
दिलीप
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