सतर्कता विभाग ने हरिद्वार नगर निगम भूमि घोटाले के आरोपियों के घरों में चलाया तलाशी अभियान
राजकुमार
- 26 Jun 2026, 09:48 PM
- Updated: 09:48 PM
देहरादून/हरिद्वार, 26 जून (भाषा) हरिद्वार नगर निगम में करोड़ों रुपए के कथित भूमि घोटाले में आरोपी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के बाद उत्तराखंड के सतर्कता विभाग की टीम ने शुक्रवार को एक साथ उनके घरों एवं अन्य परिसरों की तलाशी ली । अधिकारियों ने यह जानकारी दी ।
आधिकारियों ने यहां बताया कि सक्षम न्यायालय के तलाशी वारंट को तामील करते हुए भूमि घोटाले की जांच में दोषी पाये जाने वाले 10 आरोपियों के घरों से घोटाले से संबंधित पत्रावलियों एवं अन्य दस्तावेज कब्जे में लेने यह कार्रवाई की गयी ।
अधिकारियों के मुताबिक आईएएस अधिकारी तत्कालीन हरिद्वार नगर आयुक्त वरूण चौधरी, तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त रविन्द्र कुमार दयाल, तत्कालीन कर अधीक्षक लक्ष्मीकान्त भट्ट, तत्कालीन सहायक अभियन्ता एवं प्रभारी अधिशासी अभियन्ता आनन्द सिंह मिश्रवाण, तत्कालीन सम्पत्ति लिपिक वेदपाल तथा तत्कालीन मानचित्रकार दिनेश काण्डपाल के आवासों की तलाशी ली गयी।
उन्होंने बताया कि इसके अलावा, भूमि विक्रेता एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों, सुमन देवी, जितेन्द्र कुमार, अभिषेक यादव तथा सुजीत कुमार के आवास पर भी तलाशी ली गयी ।
सतर्कता विभाग की आठ टीम ने सुबह से ही लखनउ, दिल्ली, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग,ऋषिकेश और देहरादून में आरोपियों के आवासों तथा अन्य परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया ।
जानकारी के अनुसार, तलाशी अभियान में अधिकारियों और कर्मचारियों के पास से महत्वपूर्ण दस्तावेज कब्जे में लिए गए हैं और आने वाले समय में इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर मामले में अग्रिम कार्यवाही की जाएगी ।
आरोप है कि हरिद्वार नगर निगम द्वारा सराय गांव में कूड़े के ढेर के पास स्थित 2.30 हेक्टेअर अनुपयुक्त और सस्ती कृषि जमीन का भू उपयोग परिवर्तित कर उसे बाजार भाव से साढ़े तीन गुने से अधिक मंहगे दामों पर 54 करोड़ रुपये में खरीदा गया ।
प्रारंभिक जांच में पाया गया कि इस भूमि की न तो वास्तविक आवश्यकता थी और न ही पारदर्शी बोली प्रक्रिया अपनाई गई। इसके अलावा, भूमि खरीद में शासन के स्पष्ट नियमों को दरकिनार कर संदेहास्पद तरीके से सौदा किया गया ।
पिछले साल मामले के सामने आने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर दो आईएएस अधिकारियों—चौधरी तथा हरिद्वार के तत्कालीन जिलाधिकारी कमेंद्र सिंह और एक पीसीएस अधिकारी—हरिद्वार के तत्कालीन उपजिलाधिकारी समेत 10 अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया था तथा मामले की जांच सतर्कता विभाग को सौंपी गयी थी ।
जांच रिपोर्ट के आधार पर पिछले सप्ताह 19 जून को मुख्यमंत्री ने प्रकरण में संलिप्त पाए गए 10 अधिकारियों, कर्मचारियों तथा अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने को मंजूरी दी थी ।
इसके अलावा, मामले में कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए राज्य सरकार ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को चौधरी को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किए जाने तथा कमेंद्र सिंह पर दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) की संस्तुति भेजी है । एक अन्य आरोपी अजयवीर सिंह के विरुद्ध परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने तथा उनकी तीन वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश भी दिए गए ।
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