राहुल गांधी के खेद जताने के बाद मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने मानहानि प्रकरण निरस्त किया
जोहेब
- 25 Jun 2026, 10:16 PM
- Updated: 10:16 PM
जबलपुर, 25 जून (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे से जुड़े मानहानि के एक मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से खेद व्यक्त व्यक्त किए जाने के अगले दिन बृहस्पतिवार को प्रकरण निरस्त कर दिया।
मामले में गांधी ने बुधवार को अदालत में लिखित में खेद प्रकट किया था, जिसके बाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने उनके आवेदन पर बृहस्पतिवार को सुनवाई निर्धारित की थी।
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के बेटे कार्तिकेय सिंह ने गांधी के लिखित खेदनामे को स्वीकार करते हुए प्रकरण को समाप्त करने के लिए सहमति व्यक्त की।
न्यायमूर्ति अग्रवाल की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद सांसद-विधायक अदालत में जारी मानहानि मामले को निरस्त करने के आदेश जारी किए।
गांधी की ओर से खेद प्रकट करते हुए किए गए आवेदन में कहा गया है कि तथाकथित पनामा पेपर्स मामले में उन्होंने गलती से शिकायतकर्ता का नाम ले लिया था, जिसके लिए उन्होंने अगले दिन सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त किया था।
गांधी ने अपने आवेदन में कहा कि उनका इरादा पनामा पेपर्स मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र के नाम का जिक्र करना था।
याचिका पर बृहस्पतिवार को हुई सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने भोपाल सांसद-विधायक अदालत में लंबित मानहानि के प्रकरण को समाप्त करने पर सहमति व्यक्त की, जिसके बाद एकलपीठ ने याचिका निरस्त कर दी। शिकायतकर्ता की तरफ से अधिवक्ता संकल्प कोचर ने पैरवी की।
कार्तिकेय ने भोपाल की सांसद-विधायक अदालत में गांधी के खिलाफ मानहानि का परिवाद दायर किया था, जिसमें कहा गया था कि वर्ष 2018 में झाबुआ की एक चुनावी सभा में राहुल गांधी ने कथित तौर पर पनामा पेपर्स लीक प्रकरण का उल्लेख करते हुए उनका नाम लिया था और इससे उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची।
अदालत ने प्रकरण की सुनवाई करते हुए गांधी को व्यक्तिगत उपस्थिति के लिए समन जारी किए थे।
कांग्रेस नेता ने मानहानि के प्रकरण तथा न्यायालय की ओर से जारी समन के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया।
अदालत ने सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को अधीनस्थ अदालत के समक्ष रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश जारी किए थे।
याचिका पर गत मंगलवार और बुधवार को भी सुनवाई हुई थी और इस दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से अधीनस्थ न्यायालय का रिकॉर्ड उच्च न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। इसके बाद बुधवार को गांधी की ओर से मामले में खेद जताते हुए आवेदन किया गया था।
भाषा सं ब्रजेन्द्र जोहेब
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