आयकर विभाग ने सपा नेता आजम खान के जौहर ट्रस्ट का कर छूट वाला दर्जा रद्द किया
पारुल
- 25 Jun 2026, 11:45 PM
- Updated: 11:45 PM
(नीलाभ श्रीवास्तव)
लखनऊ/नयी दिल्ली, 25 जून (भाषा) आयकर विभाग ने जेल में बंद समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान के 'मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट' को कर छूट का लाभ देने के लिए लगभग दो दशक पहले दिया गया धर्मार्थ संस्था का दर्जा वापस ले लिया है। विभाग का आरोप है कि ट्रस्ट की गतिविधियां किसी धर्मार्थ संस्था के तय मानकों और उद्देश्यों के अनुरूप नहीं हैं।
लखनऊ मुख्यालय वाले 'मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट' के प्रमुख न्यासी आजम खान हैं। इसके अन्य न्यासियों में खान के परिवार के कुछ सदस्य और सहयोगी भी शामिल हैं। यह ट्रस्ट उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय और एक पब्लिक स्कूल संचालित करता है।
इस ट्रस्ट को सबसे पहले सितंबर 2005 में कर छूट का लाभ देने के लिए एक धर्मार्थ संस्था का दर्जा दिया गया था। तब इसका प्राथमिक उद्देश्य मुख्य रूप से समाज के वंचित और पिछड़े वर्गों में शिक्षा को बढ़ावा देना बताया गया था।
लखनऊ में आयकर विभाग ने 23 जून को ट्रस्ट का पंजीकरण रद्द करने का 140 पन्ने का आदेश जारी किया।
ट्रस्ट को 23 जून के इस अंतिम आदेश से पहले 17 जून को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसके बाद प्रधान आयकर आयुक्त (केंद्रीय) के कार्यालय ने यह अंतिम आदेश पारित किया।
आदेश में कहा गया है, "ट्रस्ट की ओर से की जा रही कई गैर-उपयुक्त गतिविधियां ट्रस्ट के मुख्य उद्देश्यों के खिलाफ हैं... इससे ट्रस्ट की विश्वसनीयता और उसे प्राप्त कर-मुक्त दर्जे की वैधता प्रभावित होती है।"
आदेश के मुताबिक, आरोप हैं कि ट्रस्ट के परिसरों का इस्तेमाल (सपा की) राजनीतिक गतिविधियों के लिए किया गया, जौहर विश्वविद्यालय की कुछ इमारतों का निर्माण सरकारी धन से कराया गया, ट्रस्ट में फर्जी न्यासी शामिल थे और ट्रस्ट की रकम से एक मस्जिद का निर्माण किया गया।
आदेश में कहा गया है, "आयकर अधिनियम की धारा 12ए, 12एए और 12एबी के तहत इस ट्रस्ट को प्रदान किया गया पंजीकरण आकलन वर्ष 2020-21, 2021-22, 2022-23 और 2023-24 से संबंधित पूर्ववर्ती वर्षों के लिए तथा इसके बाद के सभी वर्षों के लिए आयकर अधिनियम की धारा 12एबी(4) के प्रावधानों के अनुसार रद्द किया जाता है।"
ट्रस्ट की मुश्किलें सितंबर 2023 में शुरू हुईं, जब आयकर विभाग की लखनऊ जांच शाखा ने ट्रस्ट के साथ-साथ आजम खान और अन्य संबंधित लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की।
आदेश के अनुसार, यह स्पष्ट है कि करदाता (ट्रस्ट) की गतिविधियां "गैर-उपयुक्त" पाई गईं और उसे उन घोषित उद्देश्यों, लक्ष्यों तथा शर्तों के अनुरूप संचालित नहीं किया जा रहा था, जिनके आधार पर आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 12ए, 12एए और 12एबी के तहत उसे पंजीकरण प्रदान किया गया था।
ये धाराएं (12ए, 12एए और 12एबी) धर्मार्थ ट्रस्ट, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) तथा धार्मिक और शैक्षणिक संस्थानों को दी जाने वाली आयकर छूट से संबंधित हैं।
आदेश में कहा गया है कि पंजीकरण रद्द किए जाने के परिणामस्वरूप अब ट्रस्ट को आयकर अधिनियम के तहत "एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स" के रूप में माना जाएगा और उस पर अधिनियम के सभी संबंधित प्रावधान लागू होंगे।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अब ट्रस्ट की आय पर सामान्य कर दरों के अनुसार कर लगाया जाएगा और उसे पहले की तरह कर-छूट का लाभ नहीं मिलेगा।
उन्होंने कहा कि अब आयकर विभाग अंतिम कर निर्धारण के आधार पर ट्रस्ट पर बड़ी कर देनदारी, ब्याज और जुर्माना लगा सकता है।
भाषा
सुमित पारुल
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