देर रात किसी पुरुष से महिला का फोन पर बात करना उसके चरित्र पर सवाल उठाने का आधार नहीं: अदालत
नरेश
- 25 Jun 2026, 06:36 PM
- Updated: 06:36 PM
नयी दिल्ली, 25 जून (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने कहा है कि महज इसलिए कि कोई महिला देर रात फोन पर किसी पुरुष से बात करती है, उसके चरित्र पर सवाल उठाने का कारण नहीं हो सकता।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शुनाली गुप्ता ने एक व्यक्ति की अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। व्यक्ति ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें घरेलू हिंसा के एक लंबित मामले में उसकी पत्नी और एक अन्य व्यक्ति के 'कॉल डिटेल रिकॉर्ड' (सीडीआर) को सुरक्षित रखने की उसकी मांग को खारिज कर दिया गया था।
अदालत ने 2 जून के एक आदेश में कहा, ''मेरी राय में, ...किसी व्यक्ति से बात करने मात्र से ही महिला के चरित्र पर सवाल नहीं उठाया जा सकता, जब तक कि यह आरोप न लगाया गया हो कि महिला का उस व्यक्ति के साथ कोई गैर-कानूनी या व्यभिचारपूर्ण संबंध है।''
अपील करने वाले पति ने दलील दी थी कि रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना जरूरी है क्योंकि शिकायतकर्ता (उसकी पत्नी) कथित तौर पर देर रात कुछ लोगों के साथ नियमित रूप से फोन पर बात करती थी।'' व्यक्ति ने दलील दी कि अगर सीडीआर को सुरक्षित नहीं रखा गया तो समय बीतने के साथ सेवा प्रदाता द्वारा रिकॉर्ड मिटाये जा सकते हैं।
निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए, सत्र अदालत ने कहा कि हालांकि निजता का अधिकार पूरी तरह से असीमित नहीं है और उचित मामलों में निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार के लिए इसे सीमित किया जा सकता है, लेकिन किसी दूसरे व्यक्ति के कॉल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की मांग के पीछे ठोस और वाजिब कारण होने चाहिए।
न्यायाधीश ने कहा, ''भारतीय समाज अब ऐसा पिछड़ा समाज नहीं रहा है जहां किसी महिला का पुरुष से बात करना गलत माना जाता हो।''
अदालत ने उल्लेख किया कि न तो निचली अदालत में दी गई अर्जी और न ही अपील में रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की जरूरत का कोई ठोस कारण बताया गया।
अदालत ने कहा, ''महिलाएं हर क्षेत्र में, जैसे कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों आदि में काम करती हैं और उनके पुरुष सहकर्मी भी होते हैं। सिर्फ इसलिए कि कोई महिला रात में फोन पर बात करती हुई पाई गई है... यह उसके मोबाइल नंबर का सीडीआर सुरक्षित रखने की मांग का आधार नहीं बन सकता।''
यह मानते हुए कि निजता में किसी भी तरह के दखल का उचित कारण होना चाहिए, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा कि निचली अदालत ने याचिका को सही ही खारिज किया था, और उन्होंने अपील को खारिज कर दिया।
भाषा सुभाष नरेश
नरेश
2506 1836 दिल्ली