इमरान खान की पार्टी ने उनकी तुरंत रिहाई की मांग की
संतोष मनीषा
- 15 Mar 2024, 05:06 PM
- Updated: 05:06 PM
इस्लामाबाद, 15 मार्च (भाषा) पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने अपने अध्यक्ष एवं पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को कई ‘मनगढ़ंत’ मामलों में लगातार हिरासत में रखे जाने की आलोचना करते हुए उनकी तुरंत रिहाई की मांग की है।
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी की कोर कमेटी ने बृहस्पतिवार को अपनी बैठक में विभिन्न मुद्दों, खासकर इसके संस्थापक अध्यक्ष के खिलाफ मामलों में अपील में देरी, उनकी पत्नी बुशरा बीबी की सुरक्षा और पंजाब के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में मतों की दोबारा गिनती कराने पर चर्चा की।
एक बयान के अनुसार, पीटीआई की कानूनी टीम ने 71 वर्षीय खान के मामलों के संबंध में कोर कमेटी को स्थिति से अवगत कराया।
पार्टी ने क्रिकेटर से नेता बने पार्टी अध्यक्ष को कई मामलों में जेल में डाले जाने की कड़ी निंदा की।
पार्टी नेताओं ने स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा खान के प्रति ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ की भावना से व्यवहार करने की है और तोशाखाना और ‘सिफर’ (गोपनीय राजनयिक दस्तावेज) मामले जैसे ‘‘मनगढ़ंत’’ मामलों में त्वरित सुनवाई से यह पूरी तरह साबित हो चुका है जहां उन्हें जल्दबाजी में सजा सुनाई गई थी।
पिछले महीने तोशाखाना भ्रष्टाचार मामले में एक जवाबदेही अदालत द्वारा दंपति को 14 साल जेल की सजा सुनाए जाने के बाद 49 वर्षीय बुशरा बीबी को खान के बानी गाला निवास में कैद किया गया है।
खान रावलपिंडी की उच्च सुरक्षा वाली अडियाला जेल में बंद हैं। खान और उनकी पत्नी को तोशाखाना के महंगे उपहार और इद्दत मामले में दोषी ठहराते हुए कई साल की सजा सुनाई गई है।
इद्दत मामले में उनकी शादी को गैर-इस्लामिक घोषित किया गया था। पीटीआई की केंद्रीय समिति (कोर कमेटी) ने अदालती फैसलों के खिलाफ अपील में देरी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली रणनीति पर नाराजगी व्यक्त की।
कमेटी के सदस्यों ने मांग की कि इमरान खान के खिलाफ सभी मामले संविधान और कानून के मुताबिक चलने चाहिए और इन सभी मामलों को तुरंत खत्म कर पीटीआई के संस्थापक अध्यक्ष की रिहाई के आदेश जारी किए जाने चाहिए।
कोर कमेटी ने अपनी मांग दोहराई कि सभी निर्वाचन क्षेत्रों का, वास्तविक फॉर्म-45 के आलोक में ऑडिट किया जाना चाहिए और पीटीआई की ‘चुराई गई’ सभी सीट संविधान और कानून के तहत पार्टी को वापस कर दी जानी चाहिए।
वाशिंगटन में देश के राजदूत द्वारा इस्लामाबाद में सरकार को भेजे गए एक गोपनीय राजनयिक दस्तावेज की सामग्री को प्रकाशित करने के मामले (सिफर मामला) में पूर्व प्रधानमंत्री और पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरेशी को जनवरी में 10-10 साल की सजा सुनाई गई थी।
इमरान खान पर आरोप है कि उन्होंने 27 मार्च, 2022 को अमेरिका का नाम लेते हुए एक कथित गोपनीय राजनयिक दस्तावेज लहराया था और दावा किया था कि यह उनकी सरकार को गिराने की एक ‘अंतरराष्ट्रीय साजिश’ का प्रमाण है।
भाषा संतोष