उच्चतम न्यायालय ने मादक पदार्थ मामले के आरोपी को जमानत देने से इनकार किया
मनीषा
- 02 Jun 2026, 03:23 PM
- Updated: 03:23 PM
नयी दिल्ली, दो जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मादक पदार्थों के जुड़े एक मामले के आरोपी को जमानत देने से इनकार करते हुए मंगलवार को कहा कि इन पदार्थों के कारोबार से जुड़े लोगों से अत्यंत सख्ती से निपटना होगा क्योंकि वे पीढ़ी-दर-पीढ़ी देश के युवाओं का जीवन बर्बाद कर रहे हैं।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति शील नागू और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (एनडीपीएस अधिनियम) के प्रावधानों के तहत दर्ज एक मामले में जून 2022 में गिरफ्तार किए गए आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।
न्यायमूर्ति नाथ ने याचिका खारिज करते हुए कहा, ''मादक पदार्थों के कारोबार से जुड़े लोगों से अत्यंत सख्ती से निपटना होगा। वे पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस देश के युवाओं का जीवन बर्बाद कर रहे हैं।''
आरोपी ने इस साल फरवरी में मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।
उच्च न्यायालय ने आरोपी को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि यह उसकी लगातार छठी जमानत याचिका है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 11 जून, 2022 को याचिकाकर्ता और दो अन्य लोग एक बैग लेकर खड़े थे और पुलिस को देखकर उन्होंने मौके से भागने की कोशिश की।
आरोप है कि बैग से करीब 10.15 ग्राम वजन की 21 'एमडीएमए' (मेथिलीन डाइऑक्सीमेथामफेटामीन) गोलियां बरामद की गईं।
अभियोजन पक्ष ने कहा कि मौके से फरार हुए तीसरे आरोपी को भी याचिकाकर्ता और एक अन्य आरोपी के कबूलनामे के आधार पर गिरफ्तार कर लिया गया।
उच्च न्यायालय के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी थी कि 11 जून, 2022 को उसके पास से कथित रूप से बरामद मादक पदार्थ को चेन्नई की विशेष अदालत के समक्ष पांच जुलाई, 2022 को पेश किया गया और तब तक पुलिस ने मामले की सुनवाई कर रही संबंधित अदालत की मंजूरी के बिना उसे अपनी हिरासत में रखा।
उसके वकील ने दलील दी थी कि उच्च न्यायालय ने नवंबर 2024 में अधीनस्थ अदालत को छह महीने के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया था लेकिन सुनवाई अभी पूरी नहीं हुई है और सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
राज्य की ओर से पेश वकील ने उच्च न्यायालय के समक्ष दलील दी थी कि मामले में तीन आरोपी शामिल हैं और याचिकाकर्ता से कथित रूप से बरामद 10.15 ग्राम 'एमडीएमए' गोलियां वाणिज्यिक मात्रा के दायरे में आती हैं।
उच्च न्यायालय ने जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
भाषा
सिम्मी मनीषा
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