तृणमूल के अधिकांश विधायक ममता बनर्जी के साथ ही रहेंगे: शोभनदेब
अमित
- 02 Jun 2026, 01:41 PM
- Updated: 01:41 PM
कोलकाता, दो जून (भाषा) दलबदल की अटकलों के बीच तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने मंगलवार को इस बात पर बल दिया कि पार्टी के अधिकांश विधायक पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ रहेंगे और यह भी कहा कि पार्टी नेतृत्व संगठन पर अपनी पकड़ बनाए रखेगा।
तृणमूल के वरिष्ठ नेता चट्टोपाध्याय ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल की ओर से दलबदल कराने और विपक्षी पार्टी को अस्थिर करने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन तृणमूल अब भी एकजुट है।
बालीगंज से विधायक चट्टोपाध्याय की इन अटकलों के बीच आई है, जिनमें कहा जा रहा है कि निष्कासित विधायक रीताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल विधायकों का एक समूह अलग हो सकता है। बागी विधायकों की कोलकाता के एक होटल और विधायक हॉस्टल में बैठक करने की खबरों से पिछले कुछ दिनों से राज्य के राजनीतिक हलकों में हलचल मची हुई है।
हालांकि इन खबरों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अटकलें हैं कि बागी खेमे के संपर्क में रहने वाले विधायकों की संख्या 20 से 50 के बीच हो सकती है। हाल में हुए विधानसभा चुनाव में तृणमूल ने 294 में से 80 सीट जीती थीं। हालांकि, पार्टी ने सोमवार को ''पार्टी विरोधी गतिविधियों'' के आरोप में दो विधायकों को निष्कासित कर दिया।
तृणमूल कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष के तौर पर नामित किए गए चट्टोपाध्याय ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''सरकार के भारी दबाव के चलते कुछ लोग जाली हस्ताक्षरों के बारे में बयान देने के लिए मजबूर हो रहे हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सत्तापक्ष द्वारा धनबल के इस्तेमाल के कारण तृणमूल के खिलाफ जाने की कोशिश कर रहे हैं। हम लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।''
हालांकि, तृणमूल विधायकों के एक वर्ग के कथित जाली हस्ताक्षरों को लेकर वह नामांकन अभी भी सीआईडी की जांच के दायरे में है।
उन्होंने कहा, ''संभव है कि कुछ लोग दबाव में आ जाएं, लेकिन बड़े पैमाने पर बगावत होने की कोई आशंका नहीं है। अधिकांश विधायक ममता बनर्जी के साथ बने रहेंगे और तृणमूल कांग्रेस पर नेतृत्व की पकड़ मजबूत बनी रहेगी...।''
चट्टोपाध्याय की यह टिप्पणी ममता बनर्जी के उस वीडियो संदेश के एक दिन बाद आई है जिसमें उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर प्रलोभन और दबाव की राजनीति के जरिए तृणमूल को तोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया था।
उधर, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के दिन में बाद में संभावित तौर पर नयी दिल्ली जाने की खबरों ने भी तृणमूल में संभावित बगावत की चर्चाओं को और हवा दे दी।
राज्य में तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रमों की तुलना महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम से की जा रही है, जहां क्षेत्रीय दलों में बगावत के कारण सरकार में बदलाव हुआ था और पार्टी संगठन एवं चुनाव चिह्न को लेकर लंबी राजनीतिक एवं कानूनी लड़ाई छिड़ गई थी।
भाषा खारी अमित
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