पर्यावरण मंत्री ने निकोबार परियोजना के संबंध में जयराम रमेश के आरोपों को खारिज किया
माधव
- 01 Jun 2026, 09:53 PM
- Updated: 09:53 PM
नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश के इन आरोपों को खारिज कर दिया है कि ग्रेट निकोबार द्वीप (जीएनआई) परियोजना को दी गई पर्यावरणीय मंजूरी ''अपर्याप्त'' आधारभूत पर्यावरण अध्ययन और त्वरित मूल्यांकन पर आधारित थी।
कांग्रेस नेता को संबोधित पत्र में, यादव ने कहा कि रमेश द्वारा उठाए गए मुद्दों के वैधानिक मूल्यांकन और उसके बाद न्यायिक रूप से अनिवार्य समीक्षा प्रक्रिया के दौरान पहले ही जांच की जा चुकी है।
यह पत्र 27 मई को लिखा गया था।
मंत्री ने कहा, ''परियोजना का मूल्यांकन विस्तृत पर्यावरण अध्ययन, तटरेखा मूल्यांकन, समुद्री जांच और प्रतिष्ठित संस्थान द्वारा किए गए सर्वेक्षण के माध्यम से किया गया था।''
करीब 166 वर्ग किलोमीटर में फैले, जीएनआई परियोजना में एक ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, एक एकीकृत टाउनशिप, एक नागरिक और सैन्य हवाई अड्डा और 450-एमवीए गैस और सौर ऊर्जा-आधारित संयंत्र का निर्माण शामिल है। इसके निर्माण के लिए 130.75 वर्ग किमी वन भूमि के उपयोग में परिवर्तन की आवश्यकता होगी।
यादव को 10 मई को लिखे अपने पत्र में, रमेश ने आरोप लगाया था कि परियोजना के अध्ययन के लिए आधारभूत डेटा संग्रह कम से कम तीन महीनों में डेटा एकत्र करने के बजाय ''कुछ दिनों और हफ्तों'' में किया गया।
अपने जवाब में, मंत्री ने कहा कि ये अध्ययन भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई), भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (बीएसआई), सलीम अली सेंटर फॉर ऑर्निथोलॉजी एंड नेचुरल हिस्ट्री (एसएसीओएन), और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा किये गए थे।
मंत्री के अनुसार, इन सभी संस्थानों के पास अंडमान निकोबार द्वीप समूह में व्यापक ऐतिहासिक डेटासेट और दशकों का पारिस्थितिक अनुसंधान अनुभव है।
यादव ने कहा, ''हालांकि, परियोजना के लिए प्राथमिक क्षेत्र डेटा एक ही मौसम के दौरान एकत्र किया गया था, विश्लेषण ने इन संस्थानों के साथ उपलब्ध दीर्घकालिक ऐतिहासिक डेटासेट के साथ ताजा एकत्रित डेटा को एकीकृत किया, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि पर्यावरण मूल्यांकन और पर्यावरण प्रबंधन योजना (ईएमपी) वैज्ञानिक रूप से मजबूत, व्यापक और स्थान-विशिष्ट पारिस्थितिकी समझ पर आधारित थी।''
रमेश ने अपने पत्र में यह भी आरोप लगाया था कि गैलाथिया खाड़ी की तटरेखा का एक बड़ा हिस्सा - ग्रेट निकोबार का दक्षिणी सिरा, जहां ट्रांसशिपमेंट पोर्ट बनाया जाना है - नष्ट हो रहा है।
परिणामस्वरूप, कांग्रेस नेता के अनुसार, द्वीप तटीय विनियमन क्षेत्र (आईसीआरजेड) अधिसूचना, 2019 के तहत परियोजना के लिए विस्तृत अध्ययन के साथ एक व्यापक पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन की आवश्यकता थी।
यादव ने इस दावे का जवाब देते हुए कहा कि ''गैलाथिया खाड़ी का पूर्वी किनारा, जहां प्रस्तावित बंदरगाह स्थित है, मुख्य रूप से स्थिर है।''
केंद्रीय मंत्री ने तर्क दिया, इसीलिए ''व्यापक रूप से तीन मौसम के दौरान अध्ययन करने'' की आवश्यकता नहीं थी।
कांग्रेस नेता के प्रश्न का उत्तर देते हुए मंत्री ने कहा कि रिपोर्ट में सामरिक, रक्षा और राष्ट्रीय महत्व की जानकारी है।
यादव के अनुसार, इसलिए कुछ विवरण को सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 की धारा 8(1)(ए) के अनुसार गोपनीय माना जाता है, जो देश की संप्रभुता, सुरक्षा, रणनीतिक या वैज्ञानिक हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकने वाली जानकारी को सार्वजनिक करने से छूट देता है।
भाषा सुभाष माधव
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