नर्सिंग घोटाले के खिलाफ कांग्रेस सदस्यों ने मप्र विधानसभा से किया बहिर्गमन
सुभाष देवेंद्र
- 02 Jul 2024, 11:11 PM
- Updated: 11:11 PM
भोपाल, दो जुलाई (भाषा) मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य में नर्सिंग कॉलेज स्थापित करने की अनुमति देने में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछली भाजपा सरकार में चिकित्सा शिक्षा मंत्री रहे विश्वास सारंग पर मंगलवार को निशाना साधा और उनके इस्तीफे की मांग की।
कांग्रेस सदस्यों ने विधानसभा से बहिर्गमन करने से पहले ‘‘नर्सिंग घोटाले’’ की जांच के लिए सदन की एक संयुक्त समिति गठित करने की भी मांग की।
वहीं, सारंग ने आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और अनियमितताओं के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया जो मार्च 2020 तक 15 महीने तक सत्ता में थी।
उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने सदन में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए यह मुद्दा उठाया।
कटारे, जयवर्धन सिंह और विपक्ष के नेता उमंग सिंघार सहित अन्य ने आरोप लगाया कि चिकित्सा शिक्षा मंत्री के रूप में सारंग के कार्यकाल के दौरान कई सारी अनियमितताएं हुईं और नर्सिंग कॉलेजों को मंजूरी देने में नियमों का उल्लंघन किया गया।
जयवर्धन ने आरोप लगाया कि सारंग के कहने पर कई कॉलेजों को मंजूरी दी गई, जबकि वे पात्र नहीं थे।
उन्होंने कहा कि अनियमितता सामने आने के बाद इस तरह के एक कॉलेज का मालिक जेल में था।
कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि इस तरह के घोटालों में ऊपर से लेकर नीचे तक के अधिकारियों और कर्मचारियों सहित पूरा तंत्र शामिल होता है, लेकिन जिम्मेदार सिर्फ जन प्रतिनिधियों को ठहराया जाता है।
शेखावत भाजपा के पूर्व नेता हैं।
पूर्व मंत्री (दिवंगत) लक्ष्मीकांत शर्मा का उदाहरण देते हुए शेखावत ने कहा कि व्यापमं परीक्षा घोटाले में शर्मा के अलावा किसी भी बड़े अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई थी।
कांग्रेस सदस्यों ने नर्सिंग घोटाले के लिए पूर्व मंत्री और ऐसे कुछ अन्य लोगों को भी जिम्मेदार ठहराया जो सदन के सदस्य नहीं रहे हैं।
विपक्षी सदस्यों के साथ तीखी नोकझोंक के बीच विधायी कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कड़ी आपत्ति जताई और उनकी टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटवा दिया।
आरोपों का बिंदुवार जवाब देते हुए, खेल और युवा कल्याण मंत्री सारंग ने कहा कि घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने कई कॉलेजों को ‘‘अनुपयुक्त’’ करार दिया है, और इन 60 संस्थानों में से 39 कांग्रेस शासन के दौरान स्थापित किए गए थे।
स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि सरकार प्रशिक्षित नर्सों और चिकित्सकों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जिला स्तर पर नए मेडिकल कॉलेज खोलकर और नए नर्सिंग कॉलेजों को मंजूरी देकर स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि कथित घोटाले से जुड़ा एक मामला उच्च न्यायालय में है और सरकार अदालत के निर्देशों का पालन करेगी।
नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि घोटाले की जांच के लिए विधानसभा की एक समिति गठित की जाए, लेकिन सरकार ने मांग नहीं मानी।
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायक अध्यक्ष के आसन के करीब आ गए और बहिर्गमन करने से पहले नारेबाजी की।
हंगामे के बीच, सूचीबद्ध कामकाज निपटाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन की कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी।
पिछले साल अप्रैल में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद सीबीआई ने कथित नर्सिंग घोटाले की जांच शुरू की थी। हाल में सीबीआई के दो अधिकारियों को कथित तौर पर नर्सिंग कॉलेजों को क्लीन चिट देने के लिए रिश्वत लेते पाया गया था।
केंद्रीय एजेंसी ने घोटाले से जुड़े मामलों में कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया है।
भाषा सुभाष