जयशंकर ने रूबियो के समक्ष वीजा संबंधी चिंताएं उठाईं, कहा-वैध आवागमन पर असर नहीं पड़ना चाहिए
सुरेश
- 24 May 2026, 07:22 PM
- Updated: 07:22 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 24 मई (भाषा) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ट्रंप प्रशासन की ओर से वीजा और आव्रजन नीतियों में किए गए बदलावों को लेकर रविवार को अपने अमेरिकी समकक्ष मार्को रूबियो को भारत की चिंताओं से अवगत कराया और कहा कि इस नीतिगत बदलाव से वैध आवागमन पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
रूबियो ने माना कि अमेरिका द्वारा आव्रजन प्रणाली में सुधार करने के प्रयासों के दौरान संक्रमण काल में कुछ 'अड़चनें' और 'टकराव के बिंदु' आ सकते हैं, लेकिन अंततः एक 'कुशल' ढांचा सभी हितधारकों के लिए मददगार होगा।
रूबियो के भारत आगमन से पहले, अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा ने एक निर्देश जारी किया था, जिसमें ग्रीन कार्ड या स्थायी निवास के इच्छुक विदेशियों को आवेदन करने के लिए अपने मूल देशों में वापस जाने की आवश्यकता बताई गई थी।
एजेंसी ने बाद में अपने रुख में नरमी बरती, लेकिन कुल मिलाकर इस कदम से भारतीय पेशेवरों के एक बड़े वर्ग पर असर पड़ने की संभावना है।
जयशंकर ने रूबियो के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में ये टिप्पणियां कीं। दोनों नेताओं ने व्यापक वार्ता की, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया गया। पिछले एक साल में व्यापार और शुल्क (टैरिफ) पर वाशिंगटन की नीतियों के कारण द्विपक्षीय संबंध तनाव के दौर से गुजर रहे हैं।
विदेश मंत्री ने कहा, ''भारत-अमेरिका संबंधों का मूल आधार दोनों देशों के लोगों के बीच संबंध है। मैंने विदेश मंत्री रूबियो को वीजा जारी करने के संबंध में वैध यात्रियों के सामने पेश आने वाली चुनौतियों से अवगत कराया।''
उन्होंने कहा, ''हालांकि, हम अवैध और अनियमित आवागमन से निपटने के लिए सहयोग कर रहे हैं, लेकिन हमारी अपेक्षा है कि इसके परिणामस्वरूप वैध आवागमन पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। आखिरकार, यह हमारे व्यापार, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान सहयोग के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।''
एच1बी वीजा पर अमेरिकी नीति ने बड़ी संख्या में भारतीयों को प्रभावित किया है। ग्रीन कार्ड पर नयी अमेरिकी नीति ने कुछ चिंताएं पैदा कर दी हैं, क्योंकि इसके तहत आवेदकों के लिए लौटकर अपने गृह देश से आवेदन करना आवश्यक है।
अमेरिका में भारतीयों के साथ कथित नस्ली भेदभाव के मामलों के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए रूबियो इन आरोपों को खारिज करते दिखे।
उन्होंने कहा, ''मैं इन टिप्पणियों को गंभीरता से लूंगा। मुझे यकीन है कि ऑनलाइन और अन्य जगहों पर ऐसे लोग हैं, जिन्होंने टिप्पणियां की हैं, क्योंकि दुनिया के हर देश में मूर्ख लोग होते हैं।''
रूबियो ने कहा, ''मुझे यकीन है कि यहां भी मूर्ख लोग हैं, अमेरिका में भी मूर्ख लोग हैं, जो हर समय बेवकूफी भरी टिप्पणियां करते रहते हैं।''
उन्होंने कहा, ''हमारा देश उन लोगों से समृद्ध हुआ है, जो दुनिया के अन्य हिस्सों से हमारे देश में आए, अमेरिकी बने, हमारी जीवनशैली में ढल गए और उन्होंने बहुत योगदान दिया।''
ग्रीन कार्ड के मानदंडों में बदलाव के बारे में पूछे गए सवाल पर रूबियो ने कहा कि यह मौजूदा व्यवस्था में सुधार के समग्र दृष्टिकोण का हिस्सा है।
उन्होंने कहा, ''अमेरिका में प्रवासन का संकट रहा है। यह भारत की वजह से नहीं है, बल्कि व्यापक रूप से देखा जाए तो पिछले कुछ वर्षों में दो करोड़ से अधिक लोग अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश कर चुके हैं और हमें इस चुनौती का सामना करना पड़ा है।''
रूबियो ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में सुधार की वर्तमान प्रक्रिया भारत को लक्षित करने के लिए नहीं है।
उन्होंने कहा, ''जब भी आप कोई सुधार करते हैं, जब भी आप लोगों को प्रवेश देने की प्रणाली में कोई बदलाव करते हैं, तो एक संक्रमणकालीन दौर आता है, जिसमें कुछ मतभेद और कठिनाइयां उत्पन्न होती हैं।''
रूबियो ने कहा, ''यह प्रणाली भारत को लक्षित करके नहीं बनाई गई है, यह एक ऐसी प्रणाली है, जिसे वैश्विक स्तर पर लागू किया जा रहा है। लेकिन हम संक्रमणकालीन दौर से गुजर रहे हैं, और किसी भी संक्रमणकालीन दौर की तरह, इस रास्ते में भी कुछ बाधाएं तो आएंगी ही।"
वहीं, जयशंकर ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि जहां अमेरिका अपनी विदेश नीति को 'अमेरिका प्रथम' के रूप में स्पष्ट रूप से पेश करता है, वहीं भारत का दृष्टिकोण 'भारत प्रथम' है।
उन्होंने कहा, ''इसलिए हम दोनों स्पष्ट रूप से अपने-अपने राष्ट्रीय हितों से प्रेरित हैं।''
रूबियो की भारत यात्रा विदेश मंत्री विक्रम मिसरी की वाशिंगटन डीसी की तीन-दिवसीय यात्रा के पांच हफ्ते से अधिक समय बाद हो रही है, जिसका उद्देश्य अनिश्चितता और तनाव के दौर के बाद संबंधों को स्थिर करना था।
वाशिंगटन की ओर से भारत पर दंडात्मक शुल्क लगाने और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पिछले साल मई में भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्षों को कम करने में अपनी भूमिका के बारे में विवादास्पद बयान देने के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में भारी गिरावट आई थी।
हालांकि, नयी दिल्ली ने कहा था कि संघर्ष का अंत भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता का परिणाम था और इसमें अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी।
वाशिंगटन की नयी आव्रजन नीति और एच1बी वीजा शुल्क में वृद्धि के निर्णय ने भी भारत-अमेरिका संबंधों में गिरावट में योगदान दिया। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में दोनों पक्षों ने संबंधों को सुधारने के प्रयास किए हैं।
भाषा संतोष सुरेश
सुरेश
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