दिल्ली के उपराज्यपाल ने अस्पताल ब्लॉक के काम की लागत बढ़ने पर सीवीसी जांच के आदेश दिए
आशीष देवेंद्र
- 02 Jul 2024, 10:44 PM
- Updated: 10:44 PM
नयी दिल्ली, दो जुलाई (भाषा) दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने लोकनायक अस्पताल के नए ब्लॉक के निर्माण में लागत में 670 करोड़ रुपये की भारी वृद्धि के संबंध में केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) से जांच के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। उपराज्यपाल कार्यालय के अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सिर्फ जांच का आदेश देने के लिए उपराज्यपाल की आलोचना की।
अधिकारियों ने बताया कि सक्सेना ने 670 करोड़ रुपये लागत बढ़ने के संबंध में प्रक्रियागत उल्लंघनों की जांच के लिए एक समिति भी गठित की है। समिति दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी और दिल्ली सरकार के विभिन्न अस्पतालों में जारी ऐसी सभी परियोजनाओं की भी जांच करेगी।
उपराज्यपाल के निर्देश के बारे में पूछे जाने पर भारद्वाज ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘उपराज्यपाल का काम दिन-रात जांच के आदेश देना है। उन्होंने दिल्ली के लिए और क्या काम किया है? सतर्कता विभाग उनके अधीन है। वह ऐसा इसलिए करते हैं ताकि मीडिया सवाल पूछे।’’
दिल्ली सरकार के सूत्रों ने हालांकि जांच का स्वागत करते हुए कहा है कि यदि कोई अवैध गतिविधि पाई गई तो कड़ी सजा दी जाएगी।
उपराज्यपाल ने एक आधिकारिक नोट में कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा संचालित लोकनायक अस्पताल में अतिरिक्त ब्लॉक के निर्माण के लिए 465 करोड़ रुपये की निविदा बढ़कर 1,135 करोड़ रुपये हो गई है, जिससे दिल्ली सरकार पर लगभग 670 करोड़ रुपये की अनधिकृत देनदारी का बोझ पड़ गया है।
अधिकारियों ने बताया कि उपराज्यपाल ने सतर्कता निदेशालय से कहा है कि वह सीवीसी से इस मामले में विस्तृत तकनीकी जांच करने के लिए मुख्य तकनीकी परीक्षकों की एक विशेष टीम गठित करने का अनुरोध करे।
उपराज्यपाल ने आधिकारिक नोट में कहा, ‘‘यह औचित्य से परे है कि विभाग के इंजीनियरों के स्तर पर ही इतनी बड़ी लागत बढ़ा दी गई, जबकि इसे वित्त विभाग और कैबिनेट के पास जाना चाहिए था।’’ लोकनायक अस्पताल में नए ब्लॉक का काम चार नवंबर, 2020 को शुरू होना था और 30 महीने के भीतर पूरा होना था।
अधिकारियों ने कहा, ‘‘हालांकि, साढ़े तीन साल बाद भी कार्य की वर्तमान प्रगति केवल 64 प्रतिशत है, जबकि लागत 243 प्रतिशत बढ़ गई है।’’
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने इस परियोजना का काम लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को सौंपा था।
उपराज्यपाल ने मामले की विस्तृत जांच के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी बी के प्रसाद की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति गठित करने का भी निर्देश दिया।
दिल्ली सरकार के सूत्रों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों पर जिम्मेदारी डालने की कोशिश करते हुए कहा कि वे सीधे उपराज्यपाल के नियंत्रण में आते हैं। उन्होंने कहा कि सतर्कता विभाग सीधे उपराज्यपाल के अधीन है और उनके विभाग को अधिक सक्रिय होना चाहिए था।
भाषा आशीष