केंद्र सरकार ने दिल्ली जिमखाना क्लब को पांच जून तक परिसर सौंपने का निर्देश दिया
संतोष
- 23 May 2026, 04:55 PM
- Updated: 04:55 PM
नयी दिल्ली, 23 मई (भाषा) केंद्र सरकार ने लुटियंस दिल्ली स्थित दिल्ली जिमखाना क्लब को पांच जून तक परिसर सौंपने को कहा है।
सरकार ने कहा है कि 27.3 एकड़ का यह भूखंड ''रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत और सुरक्षित'' करने के लिए आवश्यक है।
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के तहत भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि दिल्ली के अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्थित यह परिसर रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत और सुरक्षित करने तथा सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े अन्य अहम उद्देश्यों के लिए बेहद जरूरी है।
लुटियंस दिल्ली के मध्य में स्थित विशाल दिल्ली जिमखाना क्लब लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री आवास के पास है।
एलएंडडीओ ने 22 मई यानी शुक्रवार को क्लब के सचिव को लिखे पत्र में कहा कि इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड (जिसे अब दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड के नाम से जाना जाता है) को 2, सफदरजंग रोड स्थित यह परिसर सामाजिक और खेल क्लब संचालित करने के विशिष्ट उद्देश्य से पट्टे पर दिया गया था।
एलएंडडीओ ने कहा कि आसपास की सरकारी जमीनों को वापस लेने की व्यापक प्रक्रिया के तहत यह भूमि तात्कालिक संस्थागत जरूरतों, शासन-प्रशासन संबंधी बुनियादी ढांचे और जनहित की परियोजनाओं के लिए आवश्यक है।
आदेश में कहा गया, ''भारत की राष्ट्रपति, पट्टा विलेख के खंड चार के तहत प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए भूमि एवं विकास कार्यालय के माध्यम से उक्त परिसर का पट्टा तत्काल प्रभाव से समाप्त करती हैं और उस पर पुन: कब्जा लेने का आदेश देती हैं।''
इसमें कहा गया, ''इस प्रकार पुनः कब्जा लेने पर 27.3 एकड़ भूमि का संपूर्ण भूखंड, जिसमें उस पर स्थित सभी भवन, स्थायी संरचनाएं, ढांचे, लॉन और साजो-सामान शामिल हैं, भूमि एवं विकास कार्यालय के माध्यम से पट्टादाता अर्थात् राष्ट्रपति के पास चला जाएगा।''
आदेश के अनुसार, भूमि एवं विकास कार्यालय परिसर को पांच जून को अपने कब्जे में लेगा।
इसमें कहा गया, ''आपको निर्देश दिया जाता है कि आप निर्धारित तिथि को परिसर का शांतिपूर्ण कब्जा इस कार्यालय के प्रतिनिधियों को सौंप दें। अनुपालन न करने की स्थिति में कानून के अनुसार कब्जा ले लिया जाएगा।''
दिल्ली जिमखाना क्लब के एक सदस्य सिद्धार्थ ने कहा कि क्लब इस आदेश को अपील के जरिए चुनौती देगा। उन्होंने कहा कि परिसर से संबंधित सुरक्षा को लेकर या कोई अन्य खतरा नहीं है।
उन्होंने कहा, ''अगला कदम इस आदेश के खिलाफ अपील दायर करना होगा। क्लब बहुत पुराना है और इसके सदस्यों की संख्या काफी अधिक है। सुरक्षा का कोई खतरा या ऐसी कोई चिंता नहीं है।''
उन्होंने कहा, ''एक सदस्य के रूप में मुझे लगता है कि आदेश में की गई टिप्पणियों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए और ऐसी स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए थी।''
सिद्धार्थ ने परिसर खाली करने के लिए दी गई समयसीमा के बारे में पूछे जाने पर कहा कि यदि अदालत का यह निर्देश होगा तो क्लब उसका पालन करेगा।
उन्होंने कहा, ''अगर यह अदालत का आदेश होगा, तो उसका निश्चित रूप से पालन किया जाएगा। इसमें कोई संदेह नहीं है।"
दिल्ली जिमखाना क्लब शहर की सबसे मूल्यवान और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जमीनों में से एक पर स्थित है। यह उच्च सुरक्षा वाले प्रशासनिक क्षेत्र में है, जहां केंद्र सरकार और रक्षा से जुड़े कई प्रमुख प्रतिष्ठान हैं।
ब्रिटिश काल में स्थापित इस क्लब ने 1913 में इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब के नाम से इस स्थल से संचालन शुरू किया था। भारत की आजादी के बाद इसका नाम बदलकर दिल्ली जिमखाना क्लब कर दिया गया और मौजूदा संरचनाओं का निर्माण 1930 के दशक में किया गया था।
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सिम्मी संतोष
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