अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो की भारत यात्रा तनावपूर्ण संबंध सुधारने, क्वाड सहयोग पर केंद्रित रहेगी
नेत्रपाल
- 23 May 2026, 12:00 AM
- Updated: 12:00 AM
नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो शनिवार को चार दिवसीय यात्रा पर भारत आएंगे। विदेश मंत्री बनने के बाद रुबियो की यह पहली भारत यात्रा है।
इस दौरे का उद्देश्य पिछले साल के मध्य से तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों को सुधारना है।
अमेरिका के शीर्ष राजनयिक की विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ विस्तृत वार्ता होने वाली है। वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ भी बैठक करेंगे। इसके अलावा वह नयी दिल्ली में 'क्वाड' देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे।
अमेरिकी विदेश मंत्री शनिवार सुबह सात बजे कोलकाता पहुंचेंगे। वहां एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद वह दोपहर के समय प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करने के लिए नयी दिल्ली रवाना होंगे।
रविवार को उनका जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करने का कार्यक्रम है और वह अमेरिकी दूतावास द्वारा आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में भी शामिल होंगे।
रुबियो सोमवार को आगरा और जयपुर की यात्रा करेंगे तथा फिर मंगलवार सुबह क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए दिल्ली लौटेंगे।
भारत यात्रा को लेकर रुबियो ने शुक्रवार को कहा, ''भारत के साथ बहुत से मुद्दों पर काम करना है। वे हमारे एक महत्वपूर्ण सहयोगी और साझेदार हैं। हम उनके साथ कई अच्छे कार्य करते हैं, इसलिए यह यात्रा बेहद महत्वपूर्ण है।''
अधिकारियों के अनुसार, जयशंकर और रुबियो के बीच होने वाली बातचीत में ऊर्जा, व्यापार, निवेश, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी तथा लोगों के बीच आपसी संपर्क को मजबूत करने के उपाय आदि प्रमुख मुद्दे होंगे।
दोनों पक्षों के पश्चिम एशिया संकट और उसके आर्थिक प्रभावों, विशेष रूप से ऊर्जा आपूर्ति पर भी विचार-विमर्श करने की उम्मीद है।
अमेरिकी विदेश मंत्री की भारत यात्रा, विदेश सचिव विक्रम मिसरी के वाशिंगटन डीसी के तीन दिवसीय दौरे के लगभग पांच सप्ताह बाद हो रही है।
दोनों देशों के संबंधों में उस समय तनाव देखने को मिला था जब अमेरिका ने भारत पर शुल्क लगाए और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल मई में भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव को कम करने में अपनी भूमिका को लेकर विवादित दावे किए थे।
इसके बाद, अगले कुछ महीनों में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कई बार सार्वजनिक रूप से दावा किया कि उन्होंने दोनों पड़ोसी देशों के बीच सैन्य संघर्ष को सुलझाया और लाखों लोगों की जान बचाई, क्योंकि स्थिति पूर्ण युद्ध की ओर बढ़ रही थी।
भारत दृढ़ता से कहता रहा है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत के परिणाम के आधार पर संघर्ष समाप्त हुआ था और इसमें अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी।
अमेरिका की नयी आव्रजन नीति और एच1 बी वीजा शुल्क बढ़ाने के फैसले से भी दोनों देशों के संबंधों में खटास पैदा हुई।
हालांकि, पिछले कुछ महीनों में दोनों पक्षों ने संबंधों को सुधारने के प्रयास किए हैं। दोनों देशों ने जल्द ही पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने का संकल्प लिया है।
प्रधानमंत्री मोदी के साथ ट्रंप ने 14 अप्रैल को लगभग 40 मिनट तक फोन पर बातचीत की। इस बातचीत के बाद मोदी ने कहा कि उन्होंने और ट्रंप ने द्विपक्षीय संबंधों में हुई "महत्वपूर्ण प्रगति" की समीक्षा की और दोनों पक्ष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
भाषा नेत्रपाल
नेत्रपाल
2305 0000 दिल्ली