दिल्ली के प्रदूषण के लिए पंजाब में पराली जलाने को जिम्मेदार ठहराने वाला कोई वैज्ञानिक अध्ययन नहीं: एनजीटी सदस्य
नोमान प्रशांत
- 02 Jul 2024, 08:11 PM
- Updated: 08:11 PM
नयी दिल्ली, दो जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के सदस्य न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने कहा है कि इस दावे को पुष्ट करने के लिए कोई वैज्ञानिक अध्ययन नहीं किया गया है कि पंजाब में पराली जलाना दिल्ली के वायु प्रदूषण में योगदान देता है और पराली जलाने पर राज्य के किसानों पर जुर्माना लगाने और उन्हें जेल भेजने को अनुचित और "घोर अन्याय" बताया।
एनजीटी के वर्तमान न्यायिक सदस्य का यह बयान इसलिए भी अहम है, क्योंकि ज्यादातर न्यायिक कार्यवाहियों और सार्वजनिक विमर्श में पड़ोसी राज्यों, खासकर पंजाब में धान की फसल के अवशेषों को जलाए जाने को दिल्ली में वायु प्रदूषण की बदतर स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है।
न्यायमूर्ति अग्रवाल ने कहा कि दिल्ली में वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाना सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, "केवल किसानों पर (पराली जलाने के लिए) मुकदमा चलाना, जुर्माना लगाना और जेल भेजना घोर अन्याय होगा।"
न्यायमूर्ति अग्रवाल एक जुलाई को राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 'पर्यावरण अनुकूल धान की खेती पर सम्मेलन' और 'सेवियर ऑफ नेचुरल रिसोर्सेज एंड एनवायरनमेंट अवार्ड’ के कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम जल, वायु और पृथ्वी अनुकूल धान की खेती को "सम्मानित और सुविधाजनक बनाने" के लिए आयोजित किया गया था।
एनजीटी के सदस्य के रूप में अपने अनुभव साझा करते हुए न्यायमूर्ति अग्रवाल ने कहा कि पराली जलाना अक्सर दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण का मुख्य कारण माना जाता है।
उन्होंने कहा कि पंजाब दिल्ली का पड़ोसी भी नहीं है और इसकी सीमाएं हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से लगती हैं। उन्होंने कहा इसके अलावा, पंजाब की तथाकथित प्रदूषित हवा को राष्ट्रीय राजधानी तक पहुंचाने के लिए हवा की एक खास गति और एक खास दिशा की जरूरत होती है।
न्यायमूर्ति अग्रवाल ने कहा, "हर बात के लिए किसान भाइयों को जिम्मेदार ठहराना मुझे समझ नहीं आता है।"
उन्होंने पूछा, "क्या ऐसा आरोप लगाने से पहले कोई वैज्ञानिक अध्ययन किया गया था?"
उन्होंने कहा कि दिल्ली के वायु प्रदूषण का वास्तविक कारण कुछ और है और इसके लिए किसानों पर मुकदमा चलाना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा, "इस तरह के आरोप के पीछे कुछ राजनीतिक कारण हो सकते हैं... मुझे नहीं पता।"
उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि पंजाब से आने वाली प्रदूषित हवा न तो हरियाणा की हवा को प्रदूषित करती है और न ही गाजियाबाद तक पहुंचती है।
भाषा नोमान