मुख्यमंत्री की पत्नी को मैसूर में "अवैध" तरीके से वैकल्पिक भूमि आवंटित की गई : भाजपा
नोमान प्रशांत
- 02 Jul 2024, 06:45 PM
- Updated: 06:45 PM
बेंगलुरु, दो जुलाई (भाषा) कर्नाटक में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को आरोप लगाया कि मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) ने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की पत्नी पार्वती को उनके स्वामित्व वाली करीब चार एकड़ जमीन के 'अधिग्रहण' के बदले पॉश इलाके में 'अवैध रूप से' वैकल्पिक जमीन आवंटित की है।
मुख्यमंत्री ने आरोप को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पत्नी पिछली भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई "50:50 अनुपात" योजना के तहत वैकल्पिक भूमि की हकदार थीं, क्योंकि एमयूडीए ने उनकी भूमि का अधिग्रहण किए बिना ही उस पर प्लॉट काट दिए थे।
इस योजना के तहत अगर किसी शख्स की एक एकड़ अविकसित भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा तो उसे इसके बदले एक चौथाई एकड़ विकसित भूमि मिलेगी।
मैसूर के रहने वाले सिद्धरमैया ने यह भी दावा किया कि उनकी पत्नी को वैकल्पिक भूमि पिछली भाजपा सरकार के दौरान दी गई थी, न कि उनके मुख्यमंत्री रहने के दौरान।
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में पूछा कि सिद्धरमैया "भूमि के अवैध हस्तांतरण" को कैसे उचित ठहराएंगे।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब मामला प्रकाश में आया तो संबंधित अधिकारियों को निलंबित करने के बजाय उनका तबादला कर दिया गया।
अशोक ने कहा कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को इस मामले की जांच करनी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने " घोटाले को छुपाने के लिए" दो आईएएस अधिकारियों को इसकी जांच का जिम्मा सौंपा। भाजपा नेता ने पूछा, "50:50 अनुपात के तहत भूमि आवंटन की अनुमति किसने दी? पॉश इलाकों में भूमि आवंटन की सिफारिश किसने की? कैबिनेट की मंजूरी के बिना पॉश इलाके में भूमि के आदान-प्रदान की अनुमति किसने दी?"
सिद्धरमैया ने कहा कि उनके साले मल्लिकार्जुन ने 1996 में तीन एकड़ और 36 गुंटा जमीन खरीदी थी और यह अपनी बहन को उपहार में दे दी थी। उनकी बहन सिद्धरमैया की पत्नी हैं। एक एकड़ 40 गुंटा का होता है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने ही ‘50:50 अनुपात’ योजना शुरू की थी।
मुख्यमंत्री ने बताया, "एमयूडीए ने तीन एकड़ और 36 गुंटा जमीन का अधिग्रहण नहीं किया, बल्कि प्लॉट बनाए और उन्हें बेच दिया। ऐसा नहीं है कि मेरी पत्नी की संपत्ति का अधिग्रहण किया गया, बल्कि प्लॉट बनाए गए और उन्हें बेच दिया गया। मुझे नहीं पता कि एमयूडीए ने यह जानबूझकर किया या अनजाने में।"
उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी की जमीन पर प्लॉट बनाकर एमयूडीए द्वारा बेच दिए जाने के बाद, उन्हें उनकी संपत्ति से वंचित कर दिया गया।
सिद्धरमैया ने कहा, “ क्या हमें अपनी भूमिक खो देनी चाहिए? क्या एमयूडीए को हमें कानूनी तौर पर हमारी जमीन नहीं देनी चाहिए? जब हमने एमयूडीए से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि वे हमें 50:50 के अनुपात में जमीन देंगे। हम इस पर सहमत हो गए। फिर एमयूडीए ने हमें अलग-अलग जगहों पर समान माप वाली जगहें दीं। इसमें क्या गलत है?”
इस बीच, एक स्थानीय दैनिक ने एमयूडीए द्वारा वैकल्पिक भूखंडों के आवंटन से संबंध में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर घोटाले को लेकर एक खबर छापी जिसके बाद कर्नाटक सरकार ने शहरी प्राधिकरण आयुक्त वेंकटचलपति आर. के नेतृत्व में एक जांच समिति गठित की।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि समिति को 15 दिन में अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है।
भाषा
नोमान