आदिवासी अपराधी नहीं, बल्कि भारत के गौरव हैं: वनवासी कल्याण आश्रम के प्रमुख
संतोष
- 21 May 2026, 09:56 PM
- Updated: 09:56 PM
(आदित्य देव)
नयी दिल्ली, 21 मई (भाषा) अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने बृहस्पतिवार को देश में आदिवासियों के बारे में 'विकृत' औपनिवेशिक धारणाओं को सुधारने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि वे भारत के गौरव और इसकी संस्कृति के रक्षक हैं, न कि अपराधी। उन्होंने कहा कि ब्रिटिशों शासकों ने उनके अपराधी होने की छवि पेश की थी।
सिंह ने 'पीटीआई-वीडियो' के साथ साक्षात्कार में कहा कि वनवासी कल्याण आश्रम से संबद्ध जनजाति सुरक्षा मंच, आदिवासी प्रतीक बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर भारत के 'वनवासी' समुदाय के बारे में दुनिया को एक सकारात्मक संदेश देने के लिए रविवार को यहां आदिवासियों का एक विशाल सांस्कृतिक सम्मेलन आयोजित कर रहा है।
उन्होंने कहा, ''अब तक आदिवासी समुदायों के बारे में जो कुछ भी लिखा और पढ़ाया गया है, उसका अधिकांश भाग ब्रिटिश विद्वानों और औपनिवेशिक विचारकों द्वारा लिखा गया है। उन्होंने आदिवासी समाज को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं किया। उन्होंने आदिवासियों को अपराधी या पिछड़े लोग के रूप में पेश किया। लेकिन आदिवासी समाज का सच्चा इतिहास इससे बहुत अलग है। आदिवासी समुदायों ने इस देश और इसकी संस्कृति में बहुत बड़ा योगदान दिया है।''
सिंह ने कहा, ''रामायण काल हो, महाभारत काल हो, मुगल युग हो या ब्रिटिश शासन—आदिवासी समुदायों ने अपनी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कभी अधीनता स्वीकार नहीं की। यही आदिवासी समाज का आत्मसम्मान है।''
उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदायों की संस्कृति, परंपराएं, जीवनशैली और लोक कलाएं देश के लिए गर्व का विषय हैं, इसलिए, वनवासी कल्याण आश्रम यह संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाना चाहता है कि आदिवासी समाज राष्ट्र का गौरव और इसकी संस्कृति का रक्षक है।
सिंह ने कहा, "आदिवासी समाज के बारे में कई गलत धारणाएं हैं। कुछ लोग भारत की संस्कृति को आदिवासी समुदायों से अलग मानते हैं, लेकिन वास्तविकता में, आदिवासी समाज हमेशा से भारतीय सभ्यता और सनातन संस्कृति का वाहक और संरक्षक रहा है। हम यह संदेश देना चाहते हैं कि आदिवासी समाज इस राष्ट्र की रक्षा करता है।''
उन्होंने कहा कि आजकल लोग अक्सर इस बात पर बहस करते हैं कि क्या आदिवासी समुदाय सनातन हिंदू समाज का हिस्सा हैं या नहीं।
उन्होंने कहा, ''हमारा मानना है कि आदिवासी समुदाय मुख्यधारा का हिस्सा हैं। लेकिन मुख्यधारा क्या है? क्या यह केवल गगनचुंबी इमारतें, विलासितापूर्ण कारें और भौतिक समृद्धि है? नहीं। सच्ची मुख्यधारा संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करते हुए आगे बढ़ना है। आदिवासी समाज उस मुख्यधारा का प्रतिनिधित्व करता है।"
भाषा राजकुमार संतोष
संतोष
2105 2156 दिल्ली