दिल्ली-एनसीआर में ट्रांसपोर्टर हड़ताल को ठंडी प्रतिक्रिया, एआईएमटीसी का भारी समर्थन का दावा
अजय
- 21 May 2026, 06:12 PM
- Updated: 06:12 PM
नयी दिल्ली, 21 मई (भाषा) पर्यावरण उपकर के विरोध में दिल्ली-एनसीआर में ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) की तीन दिवसीय हड़ताल को बृहस्पतिवार को पहले दिन कमजोर समर्थन मिला। केवल कुछ ट्रक चालक सड़क से नदारद रहे हालांकि, एआईएमटीसी ने हड़ताल को ''भारी समर्थन'' मिलने का दावा किया है।
एआईएमटीसी ने पर्यावरण मुआवजा उपकर में बढ़ोतरी को वापस लेने और बीएस-4 या उससे पुराने उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों पर प्रतिबंध हटाने की मांग की है।
बयान में कहा गया कि सामान्य परिस्थितियों में प्रतिदिन लगभग 70,000 ट्रक विभिन्न प्रवेश मार्गों से दिल्ली में प्रवेश करते हैं। हालांकि, हड़ताल अवधि के दौरान आज केवल लगभग 100–200 ट्रक ही दिल्ली में प्रवेश कर पाए, जिनमें अधिकतर वे थे जो हड़ताल शुरू होने से पहले ही अपने गंतव्य की ओर निकल चुके थे।
संस्था ने कहा कि यह हड़ताल में व्यापक भागीदारी और परिवहन क्षेत्र में नीतियों के खिलाफ मजबूत असंतोष को दर्शाता है।
एआईएमटीसी करीब 95 लाख ट्रक चालक और 26 लाख निजी बस, टैक्सी व मैक्सी-कैब संचालकों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करता है। साथ ही 3,500 से अधिक तालुका, जिला और राज्य स्तर के परिवहन संघों और संगठनों से जुड़ा है।
उसने कहा कि सरकार को स्थिति की गंभीरता को समझते हुए परिवहन क्षेत्र की चिंताओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए और व्यावहारिक समाधान के लिए बातचीत शुरू करनी चाहिए।
वहीं भारतीय परिवहन अनुसंधान और प्रशिक्षण फाउंडेशन (आईएफटीआरटी) के वरिष्ठ सदस्य एवं समन्वयक एस. पी. सिंह ने एआईएमटीसी के दावों को खारिज करते हुए कहा कि हड़ताल विफल रही।
उन्होंने कहा कि 20-21 मई की मध्यरात्रि से लेकर बृहस्पतिवार सुबह सात बजे तक फल-सब्जियां और अन्य सामान लेकर करीब 5,000 डीजल ट्रक दिल्ली के 13 प्रमुख प्रवेश मार्गों से शहर में पहुंचे।
सिंह ने कहा कि पिछले दो दिन में 11,000 से अधिक डीजल ट्रक पर्यावरण उपकर (ईसीसी) का भुगतान कर अतिरिक्त माल लेकर आए ताकि दिल्ली की मंडियों में चार से पांच दिन का भंडार रखा जा सके और एआईएमटीसी की ''हड़ताल'' की धमकी का असर न पड़े।
दिल्ली सरकार ने पिछले महीने वाणिज्यिक वाहनों पर पर्यावरण उपकर में 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की थी और इसे हर साल पांच प्रतिशत बढ़ाने का निर्णय लिया था। 19 अप्रैल से लागू व्यवस्था के तहत हल्के वाणिज्यिक वाहनों और एक्सल ट्रक पर शुल्क 1,400 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये कर दिया गया है जबकि भारी वाहनों के लिए शुल्क 2,600 रुपये से बढ़ाकर 4,000 रुपये कर दिया गया है।
एआईएमटीसी का कहना है कि इन कदमों से परिवहन क्षेत्र और चालकों की आजीविका पर गंभीर सामाजिक-आर्थिक प्रभाव पड़ा है।
भाषा निहारिका अजय
अजय
2105 1812 दिल्ली