नीट परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर बेंगलुरु में युवा कांग्रेस का प्रदर्शन
नेत्रपाल
- 21 May 2026, 06:50 PM
- Updated: 06:50 PM
(तस्वीरों के साथ)
बेंगलुरु, 21 मई (भाषा) राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) में कथित अनियमितताओं को लेकर युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को यहां प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार से इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की।
फ्रीडम पार्क में हुए प्रदर्शन में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव एवं प्रदेश प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला के अलावा कई मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया।
प्रदर्शन के दौरान कर्नाटक के उच्च शिक्षा मंत्री एमसी सुधाकर ने घोषणा की कि राज्य सरकार इंजीनियरिंग और अन्य पाठ्यक्रमों के लिए सीट आवंटन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी तथा इस प्रक्रिया को नीट से अलग रखा जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान सिद्धरमैया, सुरजेवाला और अन्य नेता एक टी-शर्ट लिए हुए थे, जिस पर ''प्रधानमंत्री झुक गए हैं'' लिखा था। वहीं, कुछ नेता अपने हाथों में ''आई एम कॉकरोच'' (मैं कॉकरोच हूं) लिखी टी-शर्ट पकड़े नज़र आए।
प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष मंजूनाथ गौड़ा के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने प्रश्नपत्र लीक मामले में जवाबदेही तय करने की मांग संबंधी तख्तियां ले रखी थीं और वे केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे।
सभा को संबोधित करते हुए सिद्धरमैया ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार और जिन राज्यों में इस पार्टी की सरकारें हैं, वे ''देश चलाना तो दूर'', परीक्षाओं को भी ठीक से आयोजित कराने में असमर्थ हैं।
उन्होंने दावा किया, ''यह बार-बार साबित हो चुका है कि वोट पाने के लिए नफरत फैलाने के अलावा उनके पास किसी और चीज़ में विशेषज्ञता नहीं है।''
कर्नाटक में बी एस येदियुरप्पा और बसवराज बोम्मई के नेतृत्व वाली पिछली भाजपा सरकारों के दौरान पेपर लीक की घटनाओं को याद करते हुए सिद्धरमैया ने कहा कि पुलिस उपनिरीक्षक और इंजीनियर भर्ती परीक्षाओं सहित कई भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएं और भ्रष्टाचार सामने आया था।
उन्होंने कहा, ''राज्य के इतिहास में पहली बार कोई अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) रैंक का पुलिस अधिकारी जेल गया था।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीट के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं 2016, 2021, 2024 और अब फिर से 2026 में हुई हैं।
उन्होंने कहा, ''साल 2004 से 2014 के बीच मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर मेडिकल दाखिले 'ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट' (एआईपीएमटी) के जरिए होते थे। तब एक बार भी पेपर लीक नहीं हुआ।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2016 में नीट लागू होने से पहले हर राज्य अपनी खुद की संयुक्त प्रवेश परीक्षा (सीईटी) परीक्षा आयोजित करता था।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''कर्नाटक ने सबसे बेहतरीन सीईटी में से एक का आयोजन किया और मेडिकल पाठ्यक्रमों के लिए छात्रों का निष्पक्ष चयन किया।''
उन्होंने दावा किया कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में होने के बावजूद मोदी सरकार ने नीट को जबरन लागू कर देश के संघीय ढांचे को ''नष्ट'' कर दिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए उन्होंने उन छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की भी मांग की, जिन्होंने पेपर लीक विवाद के बाद कथित तौर पर आत्महत्या कर ली।
उन्होंने कहा, ''छात्रों को आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले पेपर लीक के ज़िम्मेदार लोगों के साथ हत्यारों जैसा व्यवहार किया जाना चाहिए और उन्हें उसी के अनुसार सजा मिलनी चाहिए।''
इस बीच, प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सुरजेवाला ने भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने देश में कई परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं आयोजित कराने में यह सरकार पूरी तरह विफल रही है और इसने देश की शिक्षा व्यवस्था को ''ध्वस्त'' कर दिया है।
सुरजेवाला ने आरोप लगाया, ''पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार ने भारत की शिक्षा व्यवस्था को शिक्षा माफिया और प्रश्नपत्र लीक माफिया के हाथों में सौंप दिया है।''
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में नीट समेत कई भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता से समझौता किया गया है।
कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया, ''अगर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में चोर ही नीट प्रणाली को नियंत्रित करेंगे, तो हमारे युवाओं के भविष्य की रक्षा कौन करेगा?''
प्रदर्शनकारियों ने लोक भवन की ओर मार्च किया, लेकिन पुलिस ने अवरोधक लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
चिकित्सा पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए तीन मई को आयोजित नीट (यूजी) 2026 परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बीच, दो दिन बाद ही रद्द कर दिया गया था।
केंद्र सरकार ने इस मामले में कथित अनियमितताओं की व्यापक जांच का जिम्मा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपा है।
भाषा सुमित नेत्रपाल
नेत्रपाल
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