बंगाल सरकार ने बाड़बंदी के लिए बीएसएफ को जमीन सौंपी; शुभेंदु का घुसपैठियों पर कड़ी कार्रवाई का वादा
रंजन
- 20 May 2026, 09:36 PM
- Updated: 09:36 PM
कोलकाता, 20 मई (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को सीमा सुरक्षा के लिए दोहरी रणनीति का अनावरण किया, जिसमें काफी समय से लंबित बाड़ लगाने की परियोजना के लिए बीएसएफ को 27 किलोमीटर भूमि का हस्तांतरण और घुसपैठियों को लक्षित करने वाले ''पता लगाओ, हटाओ और निर्वासित करो'' तंत्र का कार्यान्वयन शामिल है।
सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के अधिकारियों के साथ नबान्न में आयोजित प्रेसवार्ता में शुभेंदु ने कहा कि शुरुआती 27 किलोमीटर के क्षेत्र को कवर करने वाली भूमि दो सप्ताह के भीतर बल को हस्तांतरित कर दी जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह एक व्यापक सीमा सुरक्षा संरचना और सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए आवश्यक भूमि के हस्तांतरण की मात्र शुरुआत है।
इसी कार्यक्रम में उन्होंने राज्य पुलिस द्वारा 'घुसपैठियों' को सीधे बीएसएफ को सौंपे जाने के लिए एक तंत्र लागू करने की भी घोषणा की, तथा जोर देकर कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के अंतर्गत नहीं आने वाले समुदायों को तत्काल प्रभाव से लागू होने वाली प्रक्रिया के तहत हिरासत में लिया जाएगा और निर्वासित किया जाएगा।
शुभेंदु ने इस ढांचे को घुसपैठियों का ''पता लगाने, हटाने और निर्वासित करने'' के रूप में वर्णित किया, साथ ही साथ इस कार्यप्रणाली की व्याख्या भी की।
इन दो घोषणाओं ने भाजपा सरकार के शुरुआती उच्च-प्रभावशाली नीतिगत हस्तक्षेपों में से एक को चिह्नित किया, जिसमें दो ऐसे मुद्दों को एक साथ लाया गया जो लंबे समय से बंगाल में पार्टी के राजनीतिक संदेश के केंद्र में रहे हैं - सीमा सुरक्षा और घुसपैठ।
उन्होंने कहा, ''शुरुआत के तौर पर, 27 किलोमीटर के क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए आवश्यक भूमि बीएसएफ को उपलब्ध कराई जा रही है। हमारे देशभक्त नागरिक और कुशल अधिकारी आने वाले दिनों में इस प्रक्रिया को पूरा करेंगे और पूर्ण सहयोग देंगे।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके मंत्रिमंडल ने भूमि हस्तांतरण प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और मुख्य सचिव तथा भूमि एवं भूमि सुधार सचिव को 45 दिन के भीतर प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।
इस फैसले को एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में पेश करते हुए, शुभेंदु ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने ''तुष्टीकरण की राजनीति'' और वोट बैंक की गणना के कारण बीएसएफ द्वारा मांगी गई जमीन को रोक रखा था।
शुभेंदु ने कहा, ''भारत बांग्लादेश के साथ 4,000 किलोमीटर की सीमा साझा करता है, जिसमें से लगभग 2,200 किलोमीटर हिस्सा पश्चिम बंगाल में पड़ता है। लगभग 1,600 किलोमीटर पर बाड़ लगाई जा चुकी है, जबकि लगभग 600 किलोमीटर अब भी बिना बाड़ के है।''
उन्होंने आरोप लगाया कि बिना बाड़ वाले हिस्से में से लगभग 555 किलोमीटर भूमि पहले ही सौंपी जा सकती थी, लेकिन पिछली सरकार ने राजनीतिक कारणों और तुष्टीकरण की राजनीति के कारण ऐसा नहीं किया।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''जहां भी बाड़ लगाने और सीमा सुरक्षा के लिए जमीन की जरूरत होगी, हम उसे बीएसएफ को सौंप देंगे।''
उन्होंने कहा, ''पिछले कई वर्षों से सीमावर्ती क्षेत्रों में बीएसएफ, राज्य पुलिस और प्रशासन के बीच समन्वय बैठकें नहीं हुईं।''
उन्होंने कहा कि जिला स्तरीय समन्वय तंत्र को अब पुन: सक्रिय कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''जिला समन्वय बैठकें शुरू हो चुकी हैं और ये अब नियमित रूप से होंगी।''
अवैध प्रवासन पर सख्त नीति की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने पुलिस द्वारा पकड़े गए घुसपैठियों को बीएसएफ को सौंपने का प्रावधान लागू किया है।
उन्होंने कहा, ''पिछले साल केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को घुसपैठियों को सीधे बीएसएफ को सौंपने के संबंध में एक पत्र भेजा था, लेकिन पिछली सरकार इस महत्वपूर्ण प्रावधान को लागू करने में विफल रही। हमने अब इसे लागू कर दिया है।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के दायरे में न आने वालों को घुसपैठिया माना जाएगा और उनके खिलाफ तदनुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा, ''सीएए के दायरे में न आने वाले लोगों को घुसपैठिया माना जाएगा। राज्य पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर बीएसएफ के हवाले कर देगी।''
शुभेंदु ने कहा कि ऐसे व्यक्तियों को बाद में देश से निर्वासित कर दिया जाएगा।
भाषा नेत्रपाल रंजन
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