प्याज 25 रुपये किलोग्राम की दर से खरीदे सरकार, किसानों को दे मुआवजा : रोहित पवार
दिलीप
- 18 May 2026, 09:30 PM
- Updated: 09:30 PM
नासिक, 18 मई (भाषा) महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने सोमवार को मांग की कि सरकार प्याज की खरीद 25 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से करे तथा बेहद कम दाम पर फसल बेचने वाले किसानों को मुआवजा दे।
प्याज की गिरती कीमतों के मद्देनजर पवार ने पार्टी सांसद निलेश लंके और भास्कर भगारे के साथ नासिक स्थित लासलगांव कृषि उपज बाजार समिति (एपीएमसी) में किसानों के ट्रैक्टर मार्च और धरना-प्रदर्शन में हिस्सा लिया। लासलगांव देश के सबसे बड़े प्याज व्यापार केंद्रों में से एक है।
प्रदर्शनकारियों ने किसानों की दुर्दशा की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रतीकात्मक रूप से प्याज और भाकरी (मोटे अनाज की रोटी) खाई।
पश्चिम एशिया संकट के कारण निर्यात प्रभावित होने से प्याज की कीमतों में गिरावट आई है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को घोषणा की थी कि केंद्र सरकार किसानों से 12.35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से प्याज खरीदेगी।
सोमवार को यहां प्रदर्शन के दौरान पवार ने दावा किया कि महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक अपनी उत्पादन लागत तक नहीं निकाल पा रहे हैं और कई किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
विपक्षी राकांपा (शप) के विधायक रोहित पवार ने कहा कि कई किसानों को बेहद कम दाम पर प्याज बेचने के बाद परिवहन खर्च भी अपनी जेब से उठाना पड़ा।
उन्होंने कहा कि प्याज उत्पादन की लागत 17 से 20 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच आती है, जबकि किसानों को वर्तमान में लगभग 12.50 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से भाव मिल रहा है, जो ''गंभीर अन्याय'' है।
पवार ने कहा कि सरकार को राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ लिमिटेड (नैफेड) के जरिए खरीद करने के बजाय बाजार समितियों में किसानों से सीधे 25 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से प्याज खरीदना चाहिए।
उन्होंने यह भी मांग की कि जिन किसानों ने पहले बहुत कम दाम पर प्याज बेचा है, उन्हें 15 से 20 रुपये प्रति किलोग्राम की सब्सिडी दी जाए।
पवार ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने प्याज उत्पादकों की मांगें नहीं मानीं, तो आने वाले दिनों में आंदोलन तेज किया जाएगा।
सांसद निलेश लंके ने सरकार की आलोचना करते हुए उसे 'किसान विरोधी' करार दिया।
लंके ने कहा, ''किसानों को प्याज के लिए 3,000 रुपये का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मिलना चाहिए। इस फसल के लिए स्पष्ट नीतियां होनी चाहिए। हम पहले ही बांग्लादेश का बाजार खो चुके हैं, जिसका फायदा पाकिस्तान और चीन को मिला है। सरकार को इस उपज के लिए नए बाजार खोजने के प्रयास करने चाहिए।''
इसी बीच, आंदोलन के कारण प्याज की नीलामी कुछ समय के लिए रोक दी गई। बाद में, जब नीलामी दोबारा शुरू हुई, तो कीमतें न्यूनतम 500 रुपये प्रति क्विंटल, अधिकतम 1,612 रुपये प्रति क्विंटल और औसत 1,070 रुपये प्रति क्विंटल रहीं।
भाषा रविकांत दिलीप
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