प्लेग से हंटावायरस तक : समुद्र में संक्रमणों ने कैसे अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली को आकार दिया
वैभव
- 18 May 2026, 12:54 PM
- Updated: 12:54 PM
(कैटरीन एल. वालेस, इलिनोइस विश्वविद्यालय, शिकागो)
शिकागो, 18 मई (द कन्वरसेशन) दुनिया के दूरदराज हिस्सों का भ्रमण करने के लिए क्रूज चलते-फिरते आरामदायक होटल की तरह माने जाते हैं। लेकिन एक महामारी विज्ञानी (एपिडेमियोलॉजिस्ट) के तौर पर मैं जानता हूं कि संक्रमण फैलाने वाले रोगाणुओं के लिए ये सबसे अनुकूल जगह भी हैं, जहां हजारों अजनबी लोग कई दिनों या हफ्तों तक बंद जगहों में साथ रहते हैं, एक ही भोजन कक्ष साझा करते हैं, लिफ्ट के बटन व रेलिंग जैसी बार-बार इस्तेमाल होने वाली सतहों को छूते हैं और एक बंद परिसर में मौजूद हवा में सांस लेते हैं।
जहाज जिस-जिस बंदरगाह पर रुकता है और यात्री कुछ समय के लिए वहां घूमने उतरते हैं, वहां रोगाणुओं को जहाज पर चढ़ने का मौका मिल जाता है। एक बार संक्रमण जहाज पर पहुंच जाए, तो उसे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलने के लिए बेहद अनुकूल माहौल मिल जाता है।
अप्रैल 2026 में नीदरलैंड के ध्वज वाले जहाज 'एमवी होंडियस' पर 'एंडीज' हंटावायरस का प्रकोप सामने आने से यह पुरानी धारणा फिर सच साबित हुई। इस जहाज पर 23 देशों के 147 यात्री और चालक दल के सदस्य सवार थे।
'एंडीज' संक्रमण, हंटावायरस के स्वरूपों में से एक है। यह एकमात्र ऐसा हंटावायरस है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह व्यक्ति से व्यक्ति में फैल सकता है, हालांकि इसकी संक्रमण क्षमता बहुत अधिक नहीं है। यह कोविड-19 या खसरे जितना संक्रामक नहीं है।
होंडियस जहाज पर 14 मई तक संक्रमण के कुल 11 मामले सामने आ चुके थे, जिनमें तीन लोगों की मौत हो गई।
समुद्र में संक्रमण फैलना जन स्वास्थ्य की सबसे पुरानी चुनौतियों में से एक रहा है। मध्यकालीन 'प्लेग' से लेकर आधुनिक दौर तक, इसने बार-बार दुनिया की रोग नियंत्रण क्षमता की परीक्षा ली है। यही नहीं, इसने आज मौजूद अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य व्यवस्था को आकार देने में भी अहम भूमिका निभाई है।
हालांकि यह आपस में जुड़ी जनस्वास्थ्य व्यवस्था दुनियाभर के देशों के सहयोग पर निर्भर करती है।
बंदरगाहों में क्वारंटीन (पृथकवास) से वैश्विक रोग नियंत्रण तक
अंग्रेजी भाषा में "क्वारंटीन" शब्द का पहला उल्लेख 1663 में 'ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी' में दर्ज हुआ। इसका अर्थ है कि 40 दिन की वह अवधि, जिसमें संक्रामक बीमारी फैलाने की आशंका वाले लोगों को समाज से अलग रखा जाता है।
हालांकि पहला आधिकारिक 'क्वारंटीन' इससे भी पहले, 1377 में प्रभावी हुआ था। उस समय रागुसा गणराज्य (अब क्रोएशिया का डुब्रोवनिक) ने प्लेग प्रभावित बंदरगाहों से आने वाले जहाजों को तट से दूर 30 दिन तक रोकने का आदेश दिया था, ताकि कोई भी व्यक्ति जहाज से उतर न सके।
करीब 25 साल बाद इस अवधि को बढ़ाकर 40 दिन कर दिया गया। यहीं से "क्वारंटीन" शब्द प्रचलन में आया। वेनिस ने 1423 में प्लेग से निपटने के लिए दुनिया का पहला स्थायी 'क्वारंटीन' द्वीप 'लाज्जारेट्टो वेक्चियो' स्थापित किया।
मध्यकाल में यह व्यवस्था इसलिए कारगर रही, क्योंकि अधिकांश बंदरगाह किसी एक सत्ता के नियंत्रण में होते थे। जहाज रुकते थे क्योंकि वे राज्यों के अधिकार को मान्यता देते थे।
यह व्यवस्था बेहद कठोर और कई बार अमानवीय भी थी।
मध्यकालीन जहाज सामान्य तैरते बीमारखाने माने जाते थे। उनमें हालात बेहद खराब होते थे — पानी सड़ चुका होता था, रोटियों में कीड़े पड़ जाते थे और यात्री तंग व बदबूदार कमरों में ठसाठस भरे रहते थे। बिस्तरों में जूं रेंगती रहती थी और जहाज के निचले हिस्से से दुर्गंध आती रहती थी। कई लोग जहाज पर ही मर जाते थे।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत
जैसे-जैसे समुद्री व्यापार और यात्रा वैश्विक होती गई, वैसे-वैसे यह स्पष्ट हो गया कि कोई एक बंदरगाह या सरकार अकेले संक्रमण से नहीं निपट सकती। दूसरी ओर, टीकों, एंटीबायोटिक और स्वच्छता में प्रगति के बाद कई देशों ने कभी रोग नियंत्रण की मुख्य व्यवस्था रही समुद्री पृथकवास व्यवस्थाओं को कमजोर कर दिया।
इससे पृथकवास व्यवस्था को स्थानीय बंदरगाह नियंत्रण से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय समन्वय ढांचे में बदलना पड़ा।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की 1948 में स्थापना हुई और 1969 में अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम बनाए गए, ताकि सीमाओं के पार फैलने वाली बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सके।
देशों ने आपसी सूचना साझा करने, संक्रमण की जानकारी देने और बंदरगाहों तथा सीमाओं पर समन्वित कार्रवाई करने पर सहमति जताई।
अब जिम्मेदारी किसी एक बंदरगाह अधिकारी पर नहीं रही, बल्कि पूरी दुनिया को जोड़ने वाली व्यवस्था तैयार की गई।
फिर भी, इस ढांचे के भीतर क्रूज संक्रमण फैलने के लिहाज से बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
इसका सबसे चर्चित उदाहरण 2020 में 'डायमंड प्रिंसेस' क्रूज जहाज पर फैला कोविड-19 संक्रमण था।
जापान के योकोहामा तट पर खड़े इस जहाज पर 3,700 यात्री सवार थे। संक्रमण फैलने के बाद जापानी प्रशासन, ब्रिटिश क्रूज कंपनी और कई विदेशी सरकारों के बीच जिम्मेदारियों और नियंत्रण उपायों को लेकर हफ्तों तक भ्रम की स्थिति बनी रही।
बाद के कुछ अध्ययनों में यह भी कहा गया कि हो सकता है कि जहाज पर लागू पृथकवास व्यवस्था ने संक्रमण को और बढ़ा दिया। उस समय अधिकांश लोगों ने इसे महामारी के शुरुआती अराजक दौर की समस्या माना।
लेकिन होंडियस जहाज पर फैला संक्रमण संकेत देता है कि समस्या कहीं अधिक गहरी है।
जहाज के साथ रोगाणु भी करते हैं सीमाएं पार
क्रूज में भीड़भाड़, अंतरराष्ट्रीय आवाजाही और खंडित कानूनी जिम्मेदारियां ऐसी स्थिति पैदा करती हैं, जो आधुनिक रोग नियंत्रण व्यवस्था के लिए आज भी चुनौती बनी हुई हैं। ये हालात ऐसे समय में हैं जब अंतरराष्ट्रीय जन स्वास्थ्य ढांचे को बने दशकों बीत चुके हैं।
क्रूज उद्योग के विस्तार के साथ अब यात्राएं अंटार्कटिका, अमेजन और अलास्का जैसे दूरस्थ तथा महामारी विज्ञान की दृष्टि से दुर्गम इलाकों तक पहुंच चुकी हैं।
इसके साथ संक्रमण का जोखिम भी बढ़ा है। इन यात्राओं में बड़ी संख्या में यात्री ऐसे वन्यजीवों, रोगाणुओं और पारिस्थितिक तंत्रों के संपर्क में आते हैं, जिनसे उनका पहले कभी सामना नहीं हुआ। इसके बाद वे हफ्तों तक एक साथ जहाज में बंद रहते हैं।
इसी बीच, जनवरी 2026 में अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन से अलग होने का फैसला किया। डब्ल्यूएचओ संक्रामक बीमारी के एक देश से दूसरे देश में पहुंचने की स्थिति में वैश्विक समन्वय की व्यवस्था संभालता है।
व्यवस्था में उभरती दरार
होंडियस जहाज पर फैले संक्रमण के दौरान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था ने फिर भी काम किया।
डब्ल्यूएचओ ने जोखिम आकलन और दिशा-निर्देश जारी किए। यूरोपीय रोग निवारण एवं नियंत्रण केंद्र ने यूरोप में समन्वय संभाला। वहीं अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने बाद में चिकित्सकों के लिए स्वास्थ्य चेतावनी जारी की।
फर्क सिर्फ इतना था कि अमेरिका अब वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का केंद्रीय भागीदार नहीं रहा, बल्कि उसकी भूमिका दूर रहकर काम करने वाली हो गई।
यह कहना मुश्किल है कि अगला बड़ा संक्रमण किसी क्रूज जहाज से फैलेगा या नहीं, और अगर फैलेगा भी तो वह एंडीज हंटावायरस से अधिक तेजी से फैलने वाला रोगाणु होगा या नहीं।
लेकिन स्रोत चाहे जो भी हो, किसी भी संक्रमण से निपटने के लिए बड़ी सरकारों के बीच सहयोग, तेजी से सूचना साझा करना और समन्वित व्यवस्था बेहद जरूरी होती है।
जब अमेरिका जैसा वैश्विक रूप से जुड़ा देश इन व्यवस्थाओं से पीछे हटता है, तो अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपात स्थितियों का प्रबंधन धीमा, बिखरा हुआ और अस्थायी बातचीत पर अधिक निर्भर हो जाता है। अंततः इससे दुनिया कम सुरक्षित हो सकती है।
द कन्वरसेशन खारी वैभव
वैभव
1805 1254 शिकागो