भाजपा ने केरल के लिए 13 सूत्रीय एजेंडा तैयार किया, ओबीसी और अल्पसंख्यकों से जुड़ाव पर ध्यान केंद्रित
नेत्रपाल
- 17 May 2026, 06:49 PM
- Updated: 06:49 PM
(टी जी बीजू)
तिरुवनंतपुरम, 17 मई (भाषा) हालिया केरल विधानसभा चुनाव में तीन सीटों पर जीत से उत्साहित भाजपा ने 13 सूत्रीय राजनीतिक एजेंडा तैयार किया है, जिसके बारे में उसका कहना है कि यह आगामी लोकसभा चुनाव से पहले राज्य में उसकी रणनीति को आकार देगा।
पार्टी ने इस एजेंडे में हिंदू पिछड़े समुदायों के बीच समर्थन को मजबूत करने, साथ ही अल्पसंख्यक समूहों तक पार्टी की पहुंच को भी नए सिरे से मजबूत करने पर स्पष्ट रूप से ध्यान केंद्रित किया है।
पार्टी के एक सूत्र ने बताया कि यह एजेंडा शनिवार को प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर की अध्यक्षता में आयोजित भाजपा प्रदेश कोर कमेटी की बैठक में अपनाए गए एक राजनीतिक प्रस्ताव का हिस्सा है।
सूत्रों के अनुसार, विधानसभा चुनाव से पहले अल्पसंख्यक समुदायों, विशेष रूप से ईसाइयों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने के पहले के प्रयासों के बावजूद, पार्टी के दस्तावेज में उनके प्रति नयी संपर्क पहलों की स्पष्ट रूपरेखा नहीं दी गई है।
हालांकि, सूत्र ने बताया कि विभिन्न कारणों से वे प्रयास जारी नहीं रह सके।
अल्पसंख्यक समुदाय तक पहुंच के संबंध में, सूत्र ने बताया कि पार्टी ने ईसाई समुदाय के साथ अपना जुड़ाव कम नहीं किया है, और उसके सदस्य कई जिलों में संगठनात्मक पदों पर बने हुए हैं। हालांकि, कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के साथ कई बिशप के बढ़ते राजनीतिक झुकाव के बीच, चर्च नेतृत्व के साथ संस्थागत संबंध बनाने के प्रयासों से पार्टी पीछे हट गई है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह अनौपचारिक बदलाव केंद्र सरकार द्वारा विवादास्पद विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) संशोधन विधेयक, 2026 को संसद में पेश करने के कदम के कैथोलिक चर्च के कड़े विरोध के बाद हुआ। यह एक ऐसा घटनाक्रम रहा, जिसके कारण केरल विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान भाजपा को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा।
वहीं दूसरी ओर, भाजपा का एजेंडा हिंदू पिछड़े समुदायों पर विशेष जोर देता है, खासकर ओबीसी आरक्षण पर अपने रुख के माध्यम से, जिसमें कहा गया है कि इसे धार्मिक आरक्षण की आड़ में लागू नहीं किया जाना चाहिए।
ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा प्रमुख सामाजिक समूहों तक अपनी पहुंच मजबूत करने का प्रयास कर रही है। इसमें संख्यात्मक रूप से महत्वपूर्ण एझवा समुदाय भी शामिल है, जो राज्य के दो प्रमुख वामपंथी दलों - मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) को महत्वपूर्ण समर्थन देता रहा है।
आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा ने कहा कि ''ओबीसी आरक्षण की आड़ में धार्मिक आरक्षण को पूरी तरह से समाप्त कर देना चाहिए'' और आरक्षण नीतियां ओबीसी, एससी/एसटी और ईडब्ल्यूएस श्रेणियों तक ही सीमित होनी चाहिए।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि किसी भी समूह को 'तुष्टीकरण' के माध्यम से तरजीही व्यवहार नहीं मिलना चाहिए और सभी मलयालियों के लिए समान अवसरों की आवश्यकता है।
चंद्रशेखर ने कहा, ''भाजपा पिछड़े वर्ग के आरक्षण को धर्म आधारित आरक्षण में नहीं बदलने देगी।''
पार्टी का आरोप है कि अल्पसंख्यक समुदाय के एक वर्ग को ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण मिलता है और उसका तर्क है कि इसे समाप्त किया जाना चाहिए।
इस प्रस्ताव में शबरिमला मुद्दे को उठाकर एवं मंदिर की संपत्तियों एवं परिसंपत्तियों के ऑडिट की मांग करके पार्टी के मूल हिंदुत्ववादी रुख को और मजबूत किया गया है, जो इसकी सामाजिक पहुंच रणनीति के साथ-साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक लामबंदी पर इसके निरंतर जोर को रेखांकित करता है।
भाषा शफीक नेत्रपाल
नेत्रपाल
1705 1849 तिरुवनंतपुरम