बीरभूम के खेतों में मिले मतदाता पहचान पत्र, तृणमूल के कार्यालय से आधार कार्ड बरामद
नरेश
- 17 May 2026, 06:30 PM
- Updated: 06:30 PM
कोलकाता, 17 मई (भाषा) पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में एक खेत से रविवार को बड़ी संख्या में मतदाता फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी) मिले, जबकि बिधाननगर स्थित तृणमूल कांग्रेस के कार्यालय से सौ से अधिक आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए।
इन दोनों घटनाओं को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया और पुलिस ने पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।
पहली घटना बीरभूम के नानूर प्रखंड के किरनाहर इलाके में सामने आई, जहां रविवार सुबह स्थानीय लोगों ने देखा कि एक खेत में बड़ी संख्या में मतदाता पहचान पत्र पड़े हैं। यह खेत एक पूर्व बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) के आवास के बगल में स्थित है, जिससे इलाके में कयास लगने लगे और हंगामा शुरू हो गया।
सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।
स्थानीय सूत्रों ने बताया कि पूर्व बीएलओ हिरण्यप्रभा मिते माजी पूर्वी बर्धमान जिले के केतुग्राम प्रखंड में कार्यरत थी और पुलिस ने इस मामले में उससे पूछताछ की है। उन्होंने बताया कि माजी ने 2012 से 2025 तक बीएलओ के रूप में काम किया था और बाद में प्रशासनिक नियमों के अनुसार उन्हें पद से हटा दिया गया था।
माजी ने दावा किया कि अपने कार्यकाल के दौरान, वह नए मतदाता पहचान पत्र वितरित करते समय पुराने मतदाता पहचान पत्र को एकत्र करती थीं, लेकिन उन्हें प्रखंड कार्यालय में जमा नहीं कराया। इसके बजाय, उन्होंने उन्हें अपने पास ही रखा।
सूत्रों के मुताबिक, माजी ने लोगों से कहा, ''मेरे घर में मरम्मत का काम चल रहा था, और मैंने कागजात घर के पीछे एक बोरी में रखे थे। हो सकता है किसी ने उन्हें खुले में फेंक दिया हो।''
एक अलग घटना में, बिधाननगर के वार्ड नंबर 36 में बसंती देवी कॉलोनी में, पुलिस ने रविवार सुबह एक स्थानीय तृणमूल कांग्रेस पार्टी कार्यालय से सौ से अधिक आधार कार्ड, पैन कार्ड और भूमि से संबंधित दस्तावेज बरामद किए।
इस बरामदगी से राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने आरोप लगाया कि कार्यालय का इस्तेमाल लंबे समय से अवैध गतिविधियों के लिए किया जा रहा था और निवासियों के पहचान दस्तावेजों को वहां संदिग्ध उद्देश्यों के लिए रखा गया था।
स्थानीय भाजपा नेताओं ने दावा किया कि उन्हें लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि निवासियों के आधार कार्ड कार्यालय में रखे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि विधानसभा चुनाव परिणामों की घोषणा के दिन, चार मई के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने परिसर को बंद कर दिया था और दोबारा खोले जाने के बाद ही दस्तावेजों का पता चला।
कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि इलाके में कई लोगों को पहले मतदान करने से रोका गया और उनके पहचान पत्र पार्टी कार्यालय में रख लिए गए।
बिधाननगर दक्षिण पुलिस थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और जांच के लिए दस्तावेजों को जब्त कर लिया।
तृणमूल कांग्रेस के नेताओं से इस संबंध में अबतक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
भाषा धीरज नरेश
नरेश
1705 1830 कोलकाता