एचएचआरसी ने हरियाणा के कारागारों में अप्राकृतिक मौतों, आत्महत्याओं और हिंसा पर लिया स्वत: संज्ञान
धीरज
- 15 May 2026, 04:36 PM
- Updated: 04:36 PM
चंडीगढ़, 15 मई (भाषा) हरियाणा राज्य मानवाधिकार आयोग (एचएचआरसी) ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की 'प्रिसन स्टैटिस्टिक्स इंडिया-2024' रिपोर्ट में राज्य के कारागारों में आत्महत्या, अप्राकृतिक मौत, हिंसा, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़ते मामले और क्षमता से अधिक कैदियों को रखने संबंधी जानकारी पर स्वत: संज्ञान लिया है।
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा, न्यायिक सदस्य कुलदीप जैन और सदस्य दीप भाटिया की पीठ ने 13 मई को पारित एक विस्तृत आदेश में राज्य के अधिकारियों से स्पष्टीकरण और रिपोर्ट तलब की। आयोग ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को गरिमा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और मानसिक देखभाल की दी गई गारंटी से कैदियों को केवल इसलिए वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि वे सलाखों के पीछे हैं।
आयोग ने एनसीआरबी की रिपोर्ट के हवाले से प्रकाशित एक खबर पर संज्ञान लिया जिसके मुताबिक हरियाणा में 2024 के दौरान 15 कैदियों ने आत्महत्या की।
खबर के मुताबिक हरियाणा एकमात्र ऐसा राज्य था जहां जेल परिसर के भीतर आग्नेयास्त्रों से जुड़ी हिंसक झड़पें हुईं।
इसके अलावा कारागारों में मानसिक तनाव, अवसाद, नशा छोड़ने से उत्पन्न समस्याएं, हिंसा, क्षमता से अधिक कैदी और पर्याप्त परामर्श सुविधाओं की कमी को लेकर भी गंभीर चिंताएं जताई गईं।
अपने आदेश में एचएचआरसी ने कहा कि कारागार प्रशासन कैदियों को आत्म-हानि, मानसिक आघात, हिंसा, अवसाद और सामाजिक अलगाव से बचाने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य हैं।
आयोग ने रेखांकित किया कि समय पर मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप, नियमित परामर्श, मनोरोग जांच, भावनात्मक पुनर्वास, शिकायत निवारण प्रणाली, पारिवारिक सहायता प्रणाली और नशामुक्ति उपचार के माध्यम से हिरासत में आत्महत्या की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
आयोग ने विशेष रूप से हरियाणा जेल नियमावली, 2022 के नियम 299 और 300 का हवाला दिया, जिसमें आत्महत्या की रोकथाम और आत्महत्या की प्रवृत्ति वाले कैदियों की निगरानी से संबंधित सुरक्षा उपाय शामिल हैं।
एचएचआरसी ने कहा कि नवीनतम एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि जेल में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल और भावनात्मक पुनर्वास के क्षेत्र में अब भी अधिक मजबूत, संरचित और निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है।
उसने अधिकारियों से कारागारों में चिकित्सकों व परामर्शदाताओं की उपलब्धता, कैदियों की मानसिक स्थिति की निगरानी के तंत्र, पिछले तीन वर्षों के दौरान हुई हिंसक घटनाओं व आत्महत्या के प्रयासों के विवरण और स्वीकृत क्षमता की तुलना में कैदियों की वर्तमान संख्या पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
इस मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त, 2026 को होगी।
भाषा सुमित धीरज
धीरज
1505 1636 चंडीगढ़