तृणमूल ने नए आपराधिक कानूनों को ‘‘क्रूर’’ बताया, कर्नाटक सरकार ने भी किया कानूनों का विरोध
शोभना रंजन
- 01 Jul 2024, 11:04 PM
- Updated: 11:04 PM
कोलकाता, एक जुलाई (भाषा) देशभर में तीन नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी होने के बीच तृणमूल कांग्रेस ने सरकार पर 146 सांसदों को निलंबित करने के बाद संसद में इन्हें जबरन पारित कराने का सोमवार को आरोप लगाया और कहा कि नए ‘‘क्रूर’’ कानूनों के ‘‘घातक परिणाम’’ होंगे।
देश में सोमवार से तीन नए आपराधिक कानून लागू हो गए, जिससे भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में दूरगामी बदलाव आएंगे।
भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) 2023 आज से पूरे देश में प्रभावी हो गए हैं। इन तीनों कानून ने ब्रिटिश कालीन कानूनों क्रमश: भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ली है।
तृणमूल कांग्रेस ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा,‘‘ नए आपराधिक कानून के लिए केवल एक शब्द है ‘क्रूर’।’’
पार्टी ने यह भी कहा कि ‘‘नए आपराधिक कानूनों की असंवैधानिक उत्पत्ति दिसंबर 2023 में निहित है, जब 146 विपक्षी सांसदों को निलंबित कर दिया गया था और तीन आपराधिक संहिता विधेयकों को बिना किसी उचित चर्चा या बहस के संसद से जल्दबाजी में पारित कर दिया गया था।’’
कर्नाटक सरकार ने भी इन आपराधिक कानूनों का विरोध किया है।
सरकार ने कहा कि केंद्र ने उसके सुझावों पर गौर नहीं किया।
कर्नाटक के कानून एवं संसदीय मामलों के मंत्री एच के पाटिल ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भाजपा सरकार को अपने पिछले कार्यकाल में ही इसे लागू कर देना चाहिए था, अब नहीं।
मंत्री ने कहा कि 2023 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को पत्र लिखकर इन कानूनों की समीक्षा करने और सुझाव देने को कहा था इस पर मुख्यमंत्री के निर्देश पर एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया।
उन्होंने कहा कि समिति ने सिद्धरमैया को एक रिपोर्ट सौंपी थी जिसे शाह को भेज दिया गया था।
मंत्री ने कहा, ‘‘हमने कुल 23 सुझाव दिए थे लेकिन केंद्र सरकार ने इनमें से किसी को भी गंभीरता से नहीं लिया। इसमें हमारी कोई राय शामिल नहीं है।’’
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र को अब तीनों कानूनों को लागू करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
वहीं तमिलनाडु पुलिस ने नए आपराधिक कानून बीएनए के तहत कई प्राथमिकियां दर्ज की हैं। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि नये कानून के तहत राज्य के कई हिस्सों में मारपीट, चोट पहुंचाने आदि सहित कई अपराधों पर प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।
इस बीच तमिलनाडु की सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की कानूनी शाखा ने नए आपराधिक कानूनों के विरोध में छह जुलाई को चेन्नई में भूख हड़ताल की घोषणा की है। पार्टी ने कहा कि पांच जुलाई को जिला अदालतों के सामने विरोध प्रदर्शन किया जाएगा साथ ही नए कानूनों की खामियों पर पूरे राज्य में संगोष्ठियां आयोजित की जांएगी।
वहीं अन्नाद्रमुक के महासचिव के पलानीस्वामी ने नए कानूनों को ‘संस्कृत मिश्रित हिंदी’ में बनाने की निंदा की और कहा कि यह ‘हिंदी को थोपने’ जैसा है, जो संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।
तमिलनाडू के पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र से नए कानूनों का नाम अंग्रेजी में रखने का आग्रह किया।
भाषा शोभना