आपातकाल लगाने वाले दल को संविधान की दुहाई का कोई हक नहीं : जद यू
सुरेश वैभव सुरेश रंजन
- 01 Jul 2024, 10:46 PM
- Updated: 10:46 PM
नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) जनता दल (यूनाइटेड) ने आपातकाल को लेकर कांग्रेस पर सोमवार को निशाना साधते हुए कहा कि जिस दल ने आपातकाल लगाकर संविधान को कलंकित किया हो, उनके नेताओं को ‘जय संविधान’ का नारा देने और इसकी प्रति लेकर शपथ लेने का कोई हक नहीं।
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए जदयू सदस्य एवं केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी ने 1971 के चुनाव में ‘गरीबी हटाओ’ का नारा दिया था और जनता ने पूर्ण बहुमत की सरकार दी, लेकिन वह वादे से मुकर गयी।
उन्होंने कहा कि 1975 में इंदिरा गांधी ने रातोंरात आपातकाल लागू कर दिया और सारे संवैधानिक एवं मौलिक अधिकार समाप्त कर दिये गये।
उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी जेल में बंद कर दिये गये। मीडिया पर पूर्ण पाबंदी लगा दी गयी थी।’’
उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का सदन में संबोधन ठीक वैसा ही नजर आया जैसे वह चुनाव प्रचार में भाषण दे रहे हों और इसी क्रम में उन्होंने विभिन्न संवैधानिक संस्थानों पर हमले भी किये।
उन्होंने विपक्ष को सत्य सुनने की आदत डालने की सलाह देते हुए कहा कि देश का इतिहास लिखा जाएगा तो आपातकाल का काला अध्याय भी उसमें जरूर होगा। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी भी उस वक्त इस पाप में भागीदार थीं।
उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को संविधान के बारे में कुछ भी कहने का हक नहीं है क्योंकि उनके परिवार के लोगों ने संविधान को कलंकित किया है।
उन्होंने मांग की कि कांग्रेस को संविधान-विरोधी घोषित किया जाना चाहिए।
भाजपा के हेमंत विष्णु सावरा ने कहा कि मोदी ने दुनिया में भारत का सम्मान बढ़ाया है। उन्होंने मोदी सरकार को विकास के साथ-साथ विरासत को भी बढ़ावा देने वाली सरकार करार दिया है।
नेशनल कांग्रेस के मियां अल्ताफ अहमद ने जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभक्त करने को ऐतिहासिक भूल करार देते हुए कहा कि इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ कि किसी राज्य को विभक्त करके दो केंद्र शासित प्रदेश बनाये गये हों, क्योंकि अभी तक केंद्र शासित प्रदेश को राज्य में तब्दील किया जाता रहा है।
कांग्रेस के दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि मोदी सरकार को भले ही संख्या बल मिला हो, लेकिन देश की जनता ने विपक्ष को लोकतंत्र बचाने के लिए नैतिक बल दिया है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के एस वेंकटेशन ने भी चर्चा में हिस्सा लिया।
भाजपा के गणेश सिंह ने चुनाव के दौरान विपक्षी गठबंधन द्वारा किये गये दुष्प्रचार के बारे में कहा कि ऐसा दुष्प्रचार तो किसी भी दल की ओर से कभी तक नहीं किया गया था।
उन्होने हिंदुओं के हिंसात्मक होने के गांधी के बयान पर कहा कि ‘सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय’, विश्व कल्याण और प्राणियों में सद्भावना की अवधारणा वाले हिंदुओं को हिंसात्मक बताना निंदनीय है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं इसकी निंदा करता हूं और राहुल गांधी को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए।’’
तृणमूल कांग्रेस की प्रतिभा मंडल ने कहा कि पिछले चुनाव में बड़े-बड़े नेताओं के प्रचार अभियान के बावजूद भाजपा के पक्ष में बेहतर परिणाम नहीं आया है।
तेदेपा के कृष्ण प्रसाद टेन्नेटी और लवू श्रीकृष्ण देवरायलु ने भी चर्चा में हिस्सा लिया और मोदी सरकार के कामकाज की सराहना की।
कांग्रेस की सदस्य वर्षा गायकवाड ने कहा कि अभिभाषण में मणिपुर की जनता, महिलाओं के लिए एक भी शब्द नहीं था।
उन्होंने कहा कि संसद के उद्घाटन में और राम मंदिर के भूमि पूजन में राष्ट्रपति को नहीं बुलाया जाना दुखद था। उन्होंने रेलवे की सुविधाएं बढ़ाने और किसानों का कर्ज माफ करने की मांग सरकार से की।
भाजपा के के. विश्वेश्वर रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना है। उन्होंने कहा कि इस सरकार ने साहसिक फैसले लिये और बैंकिंग क्षेत्र को मजबूती प्रदान की।
रेड्डी ने कहा कि पहले की सरकारों में पूर्वोत्तर देश से कटा हुआ था लेकिन आज पूरी तरह जुड़ा है। उन्होंने कहा कि मणिपुर की जातीय हिंसा दुखद है लेकिन इसकी जड़ में वहां की जनसांख्यिकी बदलना है।
द्रमुक के डी एम काथिर आनंद ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में नोटबंदी, किसानों की खुदकुशी जैसे मुद्दे नहीं थे।
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