भाजपा पंजाब में सत्ता हथियाने के लिए एसआईआर के जरिये वोट काट रही : आप
प्रशांत
- 14 May 2026, 11:06 PM
- Updated: 11:06 PM
चंडीगढ़, 14 मई (भाषा) पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) ने बृहस्पतिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निर्वाचन आयोग और एसआईआर प्रक्रिया का दुरुपयोग कर "मतदाताओं के नाम हटाने और राज्य की सत्ता हथियाने की कोशिश करने" का आरोप लगाया।
वहीं कांग्रेस पार्टी ने चुनावों से पहले पंजाब में एसआईआर की कवायद पर सवाल उठाए हैं। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने राज्य में विधानसभा चुनावों के लिये 10 महीने से भी कम समय होने के बावजूद मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर सवाल उठाया है।
निर्वाचन आयोग के 16 राज्यों और तीन केंद्र-शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभ्यास के तीसरे चरण की शुरुआत की घोषणा करने के बाद आप व कांग्रेस की यह प्रतिक्रिया सामने आई है।
'आप' नेताओं ने पश्चिम बंगाल में हाल में संपन्न विधानसभा चुनाव का हवाला देते हुए और निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता एवं निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर निर्वाचन आयोग "पक्षपातपूर्ण तरीके से" काम करता रहा, तो लोकतंत्र का अस्तित्व नहीं बचेगा।
पंजाब सरकार में मंत्री अमन अरोड़ा और हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भाजपा शासन के तहत देश की संवैधानिक संस्थाएं "तेजी से अपनी निष्पक्षता खो रही हैं" और चुनाव नतीजों को केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी के पक्ष में करने के लिए उनका दुरुपयोग किया जा रहा है।
अरोड़ा ने कहा कि निर्वाचन आयोग के कामकाज पर देशभर में गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया, "हमने दिल्ली विधानसभा चुनाव में देखा, जहां भाजपा के पक्ष में हजारों फर्जी वोट डाले गए और आम आदमी पार्टी के वैध मतों में हेराफेरी की गई।"
बंगाल चुनाव का जिक्र करते हुए अरोड़ा ने कहा, "पूरी दुनिया ने देखा कि कैसे पहले 91 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए और बाद में 60 लाख को गलत तरीके से मृत घोषित कर दिया गया। तृणमूल कांग्रेस के अनुसार, चुनाव के बाद भी 31 ऐसे निर्वाचन क्षेत्र थे, जहां भाजपा की जीत का अंतर हटाए गए वोटों की संख्या से कम था।"
उन्होंने कहा कि पूर्वाग्रह से ग्रस्त मानसिकता और गलत इरादे से संचालित कोई भी चुनाव प्रक्रिया अपना लोकतांत्रिक अर्थ खो देती है।
चीमा ने आरोप लगाया कि भाजपा उन राज्यों में निर्वाचन आयोग को "सियासी हथियार" के रूप में इस्तेमाल कर रही है, जहां वह अपने बल पर लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव नहीं जीत सकती।
उन्होंने कहा कि भाजपा पहले मतदाता सूची के शुद्धिकरण के बहाने एसआईआर जैसी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाती है और बाद में चुनावी लाभ के लिए बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने के लिए इनका इस्तेमाल करती है।
वहीं वडिंग ने कहा कि पंजाब चुनाव तक इंतजार कर सकता था ताकि लोगों को आश्वस्त किया जा सके कि राज्य में एसआईआर के पीछे कोई गुप्त एजेंडा नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया, "बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनावों ने यह बात निर्विवाद रूप से साबित कर दी है कि केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार, एक आज्ञाकारी चुनाव आयोग की मदद से, मतदाता सूचियों के फर्जी एसआईआर के माध्यम से चुनावी परिणामों को अपने पक्ष में मोड़ सकती है।"
उन्होंने कहा कि पंजाब में 10 महीने से भी कम समय में, शायद उससे भी पहले चुनाव होने वाले हैं। उन्होंने पूछा, "यहां यह प्रक्रिया आयोजित करने की इतनी जल्दी क्या है?"
भाषा पारुल प्रशांत
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