कंपनी के विवाहित महिलाओं को नौकरी से हटाने के मामले में केंद्र एवं तमिलनाडु सरकार को एनएचआरसी का नोटिस
संतोष रंजन
- 01 Jul 2024, 08:30 PM
- Updated: 08:30 PM
नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सोमवार को उन खबरों पर केंद्रीय श्रम मंत्रालय एवं तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी किया जिनमें कहा गया है कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के एक बड़े निर्माता ने श्रीपेरुंबुदुर स्थित अपने संयंत्र में कार्यरत विवाहित महिलाओं को कथित तौर पर ‘व्यस्थित रूप से नौकरी से हटा’ दिया।
आयोग ने नोटिस जारी करते हुए इस तथ्य पर भी गौर किया कि लैंगिक समानता की आवश्यकता का उल्लेख न केवल भारतीय संविधान में किया गया है बल्कि अंतरराष्ट्रीय संधियों और अनुबंधों में भी इसका जिक्र है।
इसी तरह नागरिक और राजनीतिक अधिकार का अंतरराष्ट्रीय अनुबंध और आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय अनुबंध भी किसी भी तरह के रोजगार में लिंग के आधार पर भेदभाव का निषेध करता है।
एनएचआरसी ने मीडिया की उन खबरों पर स्वत: संज्ञान लिया जिसमें कहा गया है कि एप्पल उपकरण के एक प्रमुख विनिर्माता ‘फॉक्सकॉन’ ने तमिलनाडु के श्रीपेरुंबुदुर स्थित अपने आईफोन ‘असेंबली’ संयंत्र में कार्यरत विवाहित महिलाओं को कथित तौर पर ‘व्यस्थित रूप से नौकरी से हटा’ दिया।
असेंबली संयंत्र में पुर्जों को जोड़कर अंतिम उत्पाद को तैयार किया जाता है।
फॉक्सकॉन के एक पूर्व एचआर अधिकारी का आरोप है कि इस संबंध में कंपनी द्वारा भारतीय नियुक्ति एजेंसियों को ‘मौखिक निर्देश’ दिए गए हैं। रिपोर्ट का हवाला देते हुए बयान में कहा गया है कि यह भी कहा गया है कि कंपनी सांस्कृतिक मुद्दों और सामाजिक दबाव के कारण विवाहित महिलाओं को काम पर नहीं रखती है"।
सूत्रों ने हाल ही में कहा कि एप्पल आईफोन निर्माता फॉक्सकॉन ने सरकार को सूचित किया है कि उसके नए कर्मचारियों में 25 प्रतिशत विवाहित महिलाएं हैं और कंपनी का सुरक्षा प्रोटोकॉल (जिसके तहत सभी कर्मचारियों को लिंग या धर्म से परे धातु पहनने से बचना होता है) भेदभावपूर्ण नहीं है।
इसके पहले सूत्रों ने कहा था कि इन खबरों के बाद सरकार के साथ साझा किए गए एक अनौपचारिक नोट में फॉक्सकॉन ने कहा कि ऐसी शर्तें उसकी नीति का हिस्सा नहीं हैं और ये दावे उन व्यक्तियों द्वारा किए गए हो सकते हैं जिन्हें काम पर नहीं रखा गया था।
आयोग ने अपने बयान में कहा है कि मीडिया की खबरों की सामग्री यदि सच है, तो विवाहित महिलाओं के खिलाफ भेदभाव का गंभीर मुद्दा उठता है, जिससे समानता और समान अवसर के अधिकार का उल्लंघन होता है।
एनएचआरसी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि आयोग ने केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय के सचिव और तमिलनाडु सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
भाषा संतोष