उप्र: अश्लील वीडियो बनाकर ठगने और आत्महत्या के लिये उकसाने वाले गिरोह के पांच सदस्य गिरफ्तार
जितेंद्र
- 13 May 2026, 02:30 PM
- Updated: 02:30 PM
सोनभद्र, 13 मई (भाषा) उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में पुलिस ने कृत्रिम मेधा (एआई) की मदद से अश्लील वीडियो बनाकर लोगों को ब्लैकमेल करने वाले एक अंतर-राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
पुलिस ने बताया कि गिरोह सोनभद्र में राजेंद्र पाठक नाम के व्यक्ति ने सात-आठ अप्रैल की दरमियानी रात अपने घर में खुदकुशी कर ली थी, जिसके पीछे भी इस गिरोह का ही हाथ बताया जा रहा है।
पुलिस के मुताबिक, शुरुआत में आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल पाया था लेकिन जब राजेंद्र का मोबाइल फोन खंगाला गया तो उसमें से मिली चैट, कॉल रिकॉर्ड और सबूत से पता चला कि कुछ अज्ञात लोग उसे लगातार धमकियां दे रहे थे और उससे रुपये ऐंठ रहे थे।
अपर पुलिस अधीक्षक (नक्सल क्षेत्र) ऋषभ रुनवाल ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि बैंक विवरण और मोबाइल पर हुई बातचीत से पता चला कि राजेंद्र ने आरोपियों को कई बार धन भेजा था और वह कथित तौर पर साइबर उत्पीड़न और ब्लैकमेल के कारण गहरे मानसिक तनाव में थे।
रुनवाल ने बताया कि पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रॉबर्ट्सगंज थाने में भारतीय न्याय संहिता के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने और जबरन वसूली से जुड़े अपराधों की धाराओं में मामला दर्ज किया था।
उन्होंने बताया कि इसके साथ ही साइबर अपराध थाने, विशेष अभियान समूह (एसओजी) और निगरानी प्रकोष्ठ को मिलाकर एक संयुक्त जांच टीम का गठन किया गया।
अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान पता लगा कि वीडियो कॉल राजस्थान के अलवर जिले से किये गये थे और जिस बैंक खाते में धन भेजा गया वह महाराष्ट्र का था, जबकि रकम राजस्थान के भिवाड़ी से निकाली जा रही थी।
अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि प्राप्त सूचनाओं के आधार पर साइबर थाने के प्रभारी धीरेंद्र कुमार चौधरी के नेतृत्व में एक टीम राजस्थान गई और स्थानीय पुलिस की मदद से टीम ने आरोपियों की पहचान करने के लिए एटीएम और अन्य जगहों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले।
उन्होंने बताया कि 10 मई को पुलिस ने गिरोह के पांच सदस्यों अफसिल खान, नूर मुहम्मद, राशिद, वसीम और वारिस को गिरफ्तार किया तथा वे सभी राजस्थान के अलवर व भर्तृहरि नगर जिलों के अलग-अलग इलाकों के रहने वाले हैं।
पुलिस ने बताया कि यह गिरोह एक संगठित तरीके से काम करता था और पीड़ितों को डराने-धमकाने के लिए सेना और पुलिस अधिकारियों की तस्वीरों वाली फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल का इस्तेमाल करता था।
पुलिस के मुताबिक, जांच में यह भी पता लगा कि गिरफ्तार अभियुक्त वसीम बैंक खाते खुलवाने और एटीएम कार्ड हासिल करने के लिए जाली दस्तावेजों का इंतजाम करता था जबकि वारिस वित्तीय लेन-देन के लिए इस्तेमाल होने वाले दूसरे लोगों के बैंक खातों का इंतजाम करता था, जिनमें होने वाले लेन-देन पर उन्हें लगभग 20 प्रतिशत कमीशन मिलता था।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों के पास से पांच मोबाइल फोन, बैंक खातों से जुड़े दो एटीएम कार्ड, ठगी में इस्तेमाल हुए सिम कार्ड और छह हजार रुपये नकद बरामद किये गये।
भाषा किशोर सलीम मनीषा जितेंद्र
जितेंद्र
1305 1430 सोनभद्र