नीट-यूजी 2026 रद्द: आगे क्या होगा? छात्रों को ये जानना जरूरी है
माधव
- 12 May 2026, 09:19 PM
- Updated: 09:19 PM
(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) 2026 के रद्द होने से 22 लाख से अधिक मेडिकल उम्मीदवारों और उनके परिवारों में नयी परीक्षा तिथि, प्रवेश पत्र, परीक्षा केंद्र और काउंसलिंग की समय-सीमा सहित अगले कदमों को लेकर चिंता पैदा हो गई है।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने अब तक विस्तृत दिशानिर्देश जारी नहीं किए हैं लेकिन जो जानकारी उपलब्ध है, उसका संक्षिप्त विवरण यहां दिया गया है।
प्रश्न) नीट-यूजी 2026 क्यों रद्द हुआ?
परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं के आरोपों के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने तीन मई को हुई परीक्षा रद्द करने की घोषणा की। इस मामले की जांच राजस्थान विशेष अभियान समूह (एसओजी) और अन्य एजेंसियां कर रही हैं।
एजेंसी ने यह दावा किया है कि परीक्षा ''पूर्ण सुरक्षा प्रोटोकॉल'' के तहत आयोजित की गई थी जिसमें प्रश्न पत्रों की जीपीएस-ट्रैकिंग गतिविधि, बायोमेट्रिक सत्यापन, एआई-सहायता प्राप्त सीसीटीवी निगरानी और 5जी जैमर की तैनाती शामिल थी।
प्रश्न) परीक्षा फिर कब आयोजित की जाएगी?
नयी तिथियों की घोषणा अभी नहीं की गई है। हालांकि, एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने कहा है कि रद्द की गई एनईटी-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा का कार्यक्रम अगले सात से 10दिनों के भीतर घोषित कर दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि एजेंसी का लक्ष्य शैक्षणिक कार्यक्रम और मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा से बचने के लिए परीक्षा को जल्द से जल्द आयोजित करना है।
प्रश्न) क्या छात्रों को दोबारा पंजीकरण कराना होगा?
नहीं। एनटीए ने स्पष्ट किया है कि मई 2026 के सत्र के पंजीकरण डेटा और उम्मीदवारी को पुनः आयोजित परीक्षा में आगे शामिल किया जाएगा।
प्रश्न) क्या उम्मीदवारों को परीक्षा शुल्क दोबारा देना होगा?
नहीं, कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क नहीं लिया जाएगा। एनटीए ने यह भी कहा है कि छात्रों द्वारा पहले से भुगतान की गई फीस वापस कर दी जाएगी।
प्रश्न) क्या नया प्रवेश पत्र जारी किया जाएगा?
हां, एनटीए ने कहा है कि ''प्रवेश पत्र पुनः जारी करने की तिथि'' के बारे में आधिकारिक माध्यमों से सूचित किया जाएगा।
प्रश्न) क्या छात्रों को वही परीक्षा केंद्र मिलेंगे?
एनटीए ने कहा है कि मई 2026 के सत्र में चयनित परीक्षा केंद्र पुनः आयोजित होने वाली परीक्षा में भी मान्य रहेंगे। हालांकि, एजेंसी ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि केंद्र आवंटन में कोई बदलाव हो सकता है या नहीं।
प्रश्न) क्या यह परीक्षा बाहरी एजेंसियों की मदद से दोबारा आयोजित की जाएगी?
एनटीए ने कहा है कि परीक्षा का पुन: आयोजन उसके ''आंतरिक संसाधनों'' का उपयोग करके किया जाएगा।
प्रश्न) सरकार ने क्या फैसला किया है?
सरकार ने व्यापक जांच के लिए मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को भेजने का फैसला किया है। एनटीए ने कहा, ''वह ब्यूरो को पूरा सहयोग देगा और जांच के लिए आवश्यक सभी सामग्री, रिकॉर्ड और सहायता प्रदान करेगा।''
प्रश्न) एनटीए ने पुन: परीक्षा आयोजित करने का निर्णय क्यों लिया?
एजेंसी के अनुसार, यह निर्णय ''छात्रों के हित में और राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली पर भरोसा बनाए रखने को ध्यान में रखते हुए'' लिया गया था।
एजेंसी ने कहा कि ''एजेंसी इस बात से अवगत है कि पुन: परीक्षा से उम्मीदवारों और उनके परिवारों को वास्तव में अत्यंत असुविधा होगी''। एजेंसी ने यह भी कहा कि परीक्षा प्रक्रिया को यथावत रखने से लोगों के भरोसे को ''अधिक और स्थायी क्षति'' पहुंचती।
प्रश्न) छात्रों को अब क्या करना चाहिए?
परीक्षा की नयी तारीखों, नए प्रवेश पत्र और परीक्षा संबंधी निर्देशों के बारे में जानकारी के लिए उम्मीदवारों और अभिभावकों को केवल आधिकारिक एनटीए माध्यमों पर ही भरोसा करने की सलाह दी गई है। एजेंसी ने छात्रों से सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही अपुष्ट खबरों को नजरअंदाज करने को भी कहा है।
प्रश्न) क्या नीट पहले भी विवादों में घिरी है?
जी हां। नीट को हाल के वर्षों में प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर जांच का सामना करना पड़ा है।
पिछले कुछ वर्षों में नीट परीक्षा से जुड़े कुछ प्रमुख विवाद इस प्रकार हैं:
* 2013: नीट को कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ा
पूरे भारत में मेडिकल प्रवेश के लिए एकल प्रवेश परीक्षा के रूप में 2013 में नीट की शुरुआत की गई थी। हालांकि, तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने 18 जुलाई, 2013 को नीट को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था।
* 2016: नीट परीक्षा बहाल हुई, दो चरणों में आयोजित की गई
उच्चतम न्यायालय ने अपने पहले के फैसले को वापस लेते हुए 2016 में नीट को पुन: लागू किया। उसी वर्ष यह परीक्षा दो चरणों में आयोजित की गई थी।
* 2017: तमिलनाडु में प्रदर्शन, अनिता मामला
अनीता मामले के बाद तमिलनाडु में नीट एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया, जिससे राज्य में इस परीक्षा को लेकर बहस तेज हो गई।
मेडिकल की पढ़ाई करने की इच्छुक एस अनीता ने नीट को अदालत में चुनौती दी थी और प्रवेश नहीं मिलने के बाद उसने आत्महत्या कर ली। इस घटना के कारण राज्य में इस परीक्षा के प्रति राजनीतिक विरोध और भी तीव्र हो गया।
* 2019: तमिलनाडु पहचान धोखाधड़ी घोटाला
तमिलनाडु में मेडिकल दाखिलों से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश होने के बाद 2019 में नीट परीक्षा जांच के दायरे में आई।
जांच में पता चला कि कई उम्मीदवारों ने कथित तौर पर नीट परीक्षा देने और मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने के लिए फर्जी उम्मीदवारों का इस्तेमाल किया था। सत्यापन प्रक्रिया के दौरान छात्रों की उपस्थिति, हस्ताक्षर और शैक्षणिक रिकॉर्ड में विसंगतियां पाए जाने पर यह मामला सामने आया।
जांच के बाद छात्रों, अभिभावकों, बिचौलियों और कोचिंग सेंटर से जुड़े व्यक्तियों सहित कई गिरफ्तारियां हुईं। चेन्नई, थेनी और धर्मपुरी सहित कई शहरों में मामले दर्ज किए गए।
इस विवाद ने नीट में पहचान सत्यापन तंत्र पर गंभीर सवाल उठाए और प्रवेश और परीक्षाओं के दौरान बायोमेट्रिक जांच और गहन निगरानी को बढ़ावा दिया।
* 2020: कोविड-19 चिंताएं
कोविड-19 महामारी के दौरान नीट परीक्षा आयोजित करने पर देशभर में बहस छिड़ गई।
छात्रों और विपक्षी दलों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों, परिवहन प्रतिबंधों और कुछ क्षेत्रों में बाढ़ का हवाला देते हुए परीक्षा स्थगित करने की मांग की। हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दे दी।
* 2022: केरल ड्रेस कोड विवाद
केरल में उस समय विवाद खड़ा हो गया जब महिला उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि परीक्षा केंद्रों में प्रवेश करने से पहले उन्हें धातु के हुक वाले अंतर्वस्त्र उतारने के लिए कहा गया था।
* 2024: पेपर लीक, कृपांक विवाद
नीट-यूजी 2024 परीक्षा में पेपर लीक और कृपांक दिए जाने के आरोपों को लेकर भारी विवाद खड़ा हुआ।
असामान्य रूप से अधिक संख्या में उम्मीदवारों द्वारा शीर्ष रैंक हासिल करने पर सवाल उठे, जिनमें 718 और 719 जैसे अंक शामिल थे। कुल 67 उम्मीदवारों ने 720 में से 720 अंक प्राप्त किए। ग्रेस मार्क्स प्राप्त करने वाले 1,563 उम्मीदवारों के लिए 23 जून, 2024 को पुनर्परीक्षा आयोजित की गई।
एनटीए ने बाद में कहा कि कुछ उम्मीदवारों को 'परीक्षा समय की हानि' के कारण पूरक अंक दिए गए थे। मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंचा, जबकि बिहार और अन्य राज्यों में कथित पेपर लीक की जांच सीबीआई को सौंप दी गई।
जुलाई 2024 में उच्चतम न्यायालय ने यह कहते हुए राष्ट्रव्यापी पुनर्परीक्षा का आदेश देने से इनकार कर दिया कि पूरी परीक्षा को प्रभावित करने वाले किसी प्रणालीगत उल्लंघन को साबित करने के लिए सबूत अपर्याप्त थे।
* नीट पर पर राधाकृष्णन समिति की सिफारिशें
नीट-यूजी 2024 विवाद के बाद केंद्र ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया, जो एनटीए की कार्यप्रणाली और प्रवेश परीक्षाओं के आयोजन में सुधार की सिफारिश करेगी।
विचाराधीन प्रमुख सिफारिशों में कर्मचारियों और परीक्षा केंद्रों की आउटसोर्सिंग को कम करना, अधिकतम प्रवेश परीक्षाओं का ऑनलाइन आयोजन करना और जहां पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली में परिवर्तन संभव न हो, वहां हाइब्रिड परीक्षा मॉडल अपनाना शामिल था।
समिति ने नीट सहित प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं में प्रयासों की संख्या सीमित करने का भी प्रस्ताव दिया, ताकि प्रक्रिया को सुचारू बनाया जा सके और प्रणाली पर दबाव कम हो सके।
भाषा सुरभि माधव
माधव
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