ओडिशा : धान नहीं बेच पाने से परेशान किसान ने इच्छा मृत्यु की मांग की
नरेश
- 12 May 2026, 07:48 PM
- Updated: 07:48 PM
भुवनेश्वर, 12 मई (भाषा) ओडिशा में बरगढ़ जिले के एक किसान ने सरकारी मंडी में अपना धान नहीं बेच पाने के कारण सरकार से इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है।
भेदेन प्रखंड के सहारा टिकरा गांव के रोहित भोई नामक किसान ने सोमवार को बरगढ़ के जिलाधिकारी आदित्य गोयन को एक याचिका सौंपी। गोयन जन शिकायत सत्र के लिए आए थे।
किसान भोई ने याचिका में लिखा, "छह महीने तक खरीद का इंतजार करने के बाद भी धान नहीं बिक पाने के कारण मैं इच्छा मृत्यु चाहता हूं। मैं बहुत परेशान हूं और अपने बुजुर्ग माता-पिता के लिए दवा और बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाने में असमर्थ हूं। इसलिए मर जाना ही बेहतर है।"
किसान ने बताया कि हालांकि नए खरीफ सीजन की खरीद शुरू हो चुकी है लेकिन उसके पिछले सीजन का ही धान अभी तक नहीं बिका है। उसके पास लगभग 220 बोरी धान है लेकिन सरकारी मंडी ने अभी तक इसकी खरीद नहीं की है।
भोई ने जिलाधिकारी से कहा कि खेती ही उनके परिवार की आय का एकमात्र स्रोत है। उन्होंने कहा, "मैंने जिले के अधिकारियों को कई पत्र लिखे लेकिन किसी ने भी मेरी दुर्दशा पर ध्यान नहीं दिया। कोई विकल्प नहीं होने के कारण मैंने इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है।''
ओडिशा के सहकारिता मंत्री प्रदीप बाल सामंत ने कहा, "यह मामला अभी-अभी मेरे संज्ञान में आया है। मैं तुरंत विभाग और जिलाधिकारी को इस मामले को देखने और यह सुनिश्चित करने के लिए कहूंगा कि किसान के साथ कोई अन्याय न हो।"
मंत्री ने संवाददाताओं से कहा, "यदि कोई समस्या है तो उसका समाधान भी है। हमें इच्छा मृत्यु या कोई भी चरम कदम उठाने के बजाय इस पर चर्चा करनी चाहिए। यदि किसान कोई प्रतिकूल कदम उठाता है तो इससे उसे, उसके परिवार, सरकार और पूरे राज्य को नुकसान होगा। इसलिए, मैं अधिकारियों से किसान के मुद्दे को तुरंत हल करने के लिए कहूंगा।"
इस बीच, स्थानीय विधायक निहार महानंदा ने कहा कि वह निश्चित रूप से किसान के मुद्दे को उठाएंगे।
विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) ने राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला और धान की खरीद में "कुप्रबंधन" के लिए उसे "दोषी" ठहराया, जिसके चलते एक किसान ने इच्छा मृत्यु की गुहार लगाई है।
पूर्व मंत्री और बीजद विधायक अरुण कुमार साहू ने कहा, "यह बेहद चिंताजनक बात है। ओडिशा में भाजपा कैसी सरकार चला रही है? एक किसान इच्छा मृत्यु चाहता है, एक आदिवासी पैसे निकालने के लिए अपनी मृत बहन का कंकाल लेकर बैंक जाता है और हत्याएं रोजमर्रा की बात हो गई हैं।"
भाषा अविनाश नरेश
नरेश
1205 1948 भुवनेश्वर