धनखड़ ने प्रधानमंत्री के चुनावी भाषणों, आरएसएस पर खरगे की टिप्पणियों को कार्यवाही से बाहर किया
माधव ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र माधव
- 01 Jul 2024, 05:23 PM
- Updated: 05:23 PM
नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए भाषणों की आलोचना की और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वैचारिक मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ भी आरोप लगाए। हालांकि सभापति जगदीप धनखड़ ने उनकी ज्यादातर टिप्पणियों को सदन की कार्यवाही से निकाल दिया।
धनखड़ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का भी बचाव करते हुए इसे राष्ट्र के लिए काम करने वाला संगठन बताया।
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर संसद के उच्च सदन में अपने भाषण के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने मोदी द्वारा अपनी चुनावी रैलियों में की गई विभिन्न टिप्पणियों का उल्लेख किया। उन्होंने सदन के समक्ष वह संख्या भी सामने रखी कि मोदी ने कितनी बार अपने भाषण में अल्पसंख्यकों और पाकिस्तान का उल्लेख किया।
राज्यसभा के सभापति ने उनसे अपने दावों को प्रमाणित करने के लिए कहा। खरगे ने कहा कि उनके पास अखबार की ढेर सारी कतरने हैं जो उनक बातों की पुष्टि करती हैं। हालांकि सभापति ने अखबारों की कतरनों को पुष्टि के रूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
खरगे का उनकी पार्टी के सहयोगी और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने समर्थन किया। उन्होंने पूछा कि एक विपक्षी सांसद खबरों का हवाला देने के अलावा कैसे प्रमाणित कर सकता है कि प्रधानमंत्री ने क्या कहा है।
हालांकि, सभापति ने दलीलों को स्वीकार नहीं किया और खरगे द्वारा की गई टिप्पणियों को कार्यवाही से हटा दिया।
खरगे ने जोर देकर कहा कि वह केवल प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए भाषणों की विभाजनकारी प्रकृति को सामने रखना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी से पहले किसी अन्य प्रधानमंत्री ने इस तरह की टिप्पणी नहीं की।
करीब 90 मिनट के अपने भाषण में खरगे ने बार-बार आरएसएस और उससे जुड़ी हस्तियों का जिक्र किया।
देश में शिक्षा प्रणाली के बारे में बात करते हुए, खरगे ने आरएसएस के बारे में कुछ आरोप लगाए।
खरगे ने कहा कि यदि मौजूदा स्थिति नहीं सुधरी तो देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता खतरे में पड़ जाएगी और विश्व में देश की शिक्षा डिग्री को संदेह की दृष्टि से देखा जाने लगा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में शीर्ष एवं अन्य पदों पर एक खास विचारधारा के लोगों का कब्जा हो गया है। उन्होंने कहा कि पिछले दस साल का रिकार्ड देखा जाना चाहिए कि ऐसे पदों पर किन लोगों को आसीन किया गया।
इस पर सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि क्या किसी विचारधारा का होना देश में क्या कोई अपराध है?
सदन के नेता नड्डा ने जगदीप धनखड़ से मांग की कि खरगे ने एक संस्था के बारे में जो कहा, उसे सदन की कार्यवाही से निकाला जाना चाहिए।
धनखड़ ने कहा कि टिप्पणियों को हटा दिया गया है क्योंकि राष्ट्रवादी गतिविधियों में लिप्त संगठन आरएसएस के खिलाफ आरोप लगाना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘क्या किसी संगठन का सदस्य होना अपराध है? आप कह रहे हैं कि एक व्यक्ति विशेष आरएसएस का सदस्य है। क्या यह अपने आप में अपराध है? आरएसएस राष्ट्र के लिए काम करने वाला संगठन है। उनके पास बहुत सारे बुद्धिमान लोग हैं।’’
खरगे ने मणिपुर पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की एक टिप्पणी का हवाला दिया लेकिन उसे भी कार्यवाही से हटा दिया गया। धनखड़ ने कहा कि कांग्रेस नेता खुद ही अपनी बातों का खंडन कर रहे हैं।
सदन के नेता और भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने भी खरगे की टिप्पणी पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता को आरएसएस के बारे में कोई जानकारी नहीं है और खरगे संगठन के बारे में जो कुछ भी कह रहे हैं, वह खेदजनक है।
धनखड़ ने कहा, ‘‘आप एक ऐसे संगठन को कोस रहे हैं जो देश के लिए अथक रूप से काम कर रहा है।’’
कांग्रेस नेता खरगे ने महात्मा गांधी और छत्रपति शिवाजी जैसी प्रमुख हस्तियों की प्रतिमाओं को संसद परिसर से हटाने का मुद्दा भी उठाया।
भाषा माधव ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र