विपक्ष शासित राज्य कड़ी ‘‘नाकेबंदी’’ का सामना कर रहे : तृणमूल कांग्रेस का आरोप
मनीषा अविनाश
- 01 Jul 2024, 04:24 PM
- Updated: 04:24 PM
नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) राज्यसभा में सोमवार को तृणमूल कांग्रेस ने सरकार पर वास्तविकता छिपाने का आरोप लगाया और दावा किया कि विपक्ष शासित राज्यों को कड़ी ‘‘नाकेबंदी’’ का सामना करना पड़ रहा है।
तृणमूल कांग्रेस के जवाहर सरकार ने उच्च सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि विश्व बैंक के सरकारी दक्षता सूचकांक में भारत का स्थान 66 है और यह चिंताजनक है जबकि सरकार अपनी छवि चमकाने के लिए विज्ञापनों के जरिये लुभावनी तस्वीर दिखा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की बात करती है तो उसे याद रखना चाहिए कि वह पांच खरब तो क्या 2024 में चार खरब की अर्थव्यवस्था तक भी नहीं पहुंच पाई है।
तृणमूल सदस्य ने कहा कि प्रति व्यक्ति जीडीपी में भारत का रैंक दुनिया में 120वां है और हमें समझना चाहिए कि वास्तव में जीडीपी क्या है। ‘‘क्या हम अरबपतियों की जीडीपी की बात करते हैं?’’ उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानक वास्तविकता में बड़ा अंतर बताते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष शासित राज्यों को भारी ‘नाकेबंदी’ का सामना करना पड़ रहा है और पश्चिम बंगाल इनमें से एक है जिसे केंद्र की ओर से उसकी बकाया धन राशि नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि मनरेगा, स्वास्थ्य से लेकर विभिन्न क्षेत्रों में बंगाल की राशि रोकी गई है।
उन्होंने कहा ‘‘चाहे कितना भी दबाव डाला जाए, हम जातिवादी एवं सांप्रदायिक एजेंडा कतई स्वीकार नहीं करेंगे। बंगाल एकमात्र राज्य है जिसने राज्यसभा में 38 फीसदी सांसद महिला सांसदों को भेजा है...।’’
जवाहर सरकार ने कहा ‘‘आज काला दिन है। आज एक जुलाई है और आज से जो तीन नए आपराधिक कानून लागू हुए हैं उन्हें सदन में चर्चा किए बिना पारित किया गया था। इन कानूनों का कार्यान्वयन रोक कर सदन में इन पर व्यापक चर्चा कराई जानी चाहिए।’’
उन्होंने इन कानूनों की तुलना औपनिवेशिक काल के कानूनों से करते हुए कहा कि ये कानून नागरिक स्वतंत्रता का हनन करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इन पर पुन:विचार करना चाहिए, सदन में भी इन पर विचार विमर्श होना चाहिए, इसके बाद ही कोई फैसला किया जाना चाहिए।।’’
तृणमूल सदस्य ने कहा कि बैंकों में पिछले दस साल में 15.5 लाख करोड़ रुपये का कर्जा माफ किया गया है लेकिन इसके लाभार्थी कौन हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने कहा था कि बैंकों को जालसाजी के कारण 2.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। ‘‘यह नुकसान नीरव मोदी, चोकसी आदि की वजह से हुआ।’’
दूरसंचार कानून को काला कानून बताते हुए जवाहर सरकार ने कहा कि यह कानून सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को दबाने के लिए है।
उन्होंने कहा कि बेरोजगारी पिछले तीस साल में सबसे ज्यादा है और सरकार रोजगार उपलब्ध कराने का दावा कर अपनी पीठ थपथपाती है। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार कहती है कि 81 करोड़ लोगों को वह मुफ्त अनाज मुहैया करा रही है। ‘‘क्या ये लोग गरीबी की रेखा से नीचे हैं ?’’
उन्होंने आंकड़े पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर ये लोग गरीबी की रेखा से नीचे हैं तो गरीबी रेखा से लोगों के बाहर आने का दावा क्या गलत है।
तृणमूल सदस्य ने प्रदूषण का जिक्र करते हुए कहा कि जिन प्रौद्योगिकियों को दूसरे देश छोड़ रहे हैं, वह हमारे यहां अभी भी इस्तेमाल में हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर बुलेट ट्रेन की बात करती है लेकिन ‘‘हम साधारण किंतु ऐसी ट्रेन चाहते हैं जिसमें यात्रा सुरक्षित हो।’’
चर्चा में हिस्सा लेते हुए वाईएसआर कांग्रेस पार्टी सदस्य मेदा रघुनाधा रेड्डी ने कहा कि आंध्र प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं लेकिन वह इनका दोहन नहीं कर पा रहा है क्योंकि विभाजन के बाद उसे विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिल पाया और वह अपेक्षित विकास नहीं कर पाया।
रेड्डी ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पारित तो हो गया है लेकिन इसका लाभ देश की आधी आबादी को लंबे समय के बाद मिलेगा।
भाषा
मनीषा