गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख और दो अन्य लोगों की 'फर्जी' मुठभेड़ से जुड़े मामले का घटनाक्रम
वैभव
- 07 May 2026, 01:32 PM
- Updated: 01:32 PM
मुंबई, सात मई (भाषा) गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख, उसकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसी प्रजापति के कथित फर्जी मुठभेड़ मामले का घटनाक्रम इस प्रकार है:
*22 नवंबर, 2005: सोहराबुद्दीन शेख, उसकी पत्नी और एक सहयोगी को हैदराबाद से सांगली लौटते समय एक बस में सवार पुलिसकर्मियों ने रोका। पुलिस ने तीनों को हिरासत में ले लिया। शेख और उसकी पत्नी को एक वाहन में ले जाया गया जबकि प्रजापति को दूसरे वाहन में ले जाया गया।
*22 से 25 नवंबर, 2005: शेख और कौसर बी को अहमदाबाद के पास एक फार्महाउस में रखा गया। प्रजापति को उदयपुर ले जाया गया, जहां उसके खिलाफ दर्ज मामलों में मुकदमे की सुनवाई के लिए उसे जेल में रखा गया।
*26 नवंबर, 2005: गुजरात और राजस्थान पुलिस की संयुक्त टीम की कथित फर्जी मुठभेड़ में सोहराबुद्दीन शेख मारा गया।
*29 नवंबर, 2005: कौसर बी की पुलिस ने कथित तौर पर हत्या कर दी और शव को जलाकर ठिकाने लगा दिया।
*27 दिसंबर, 2006: राजस्थान और गुजरात पुलिस की एक टीम प्रजापति को उदयपुर केंद्रीय जेल से ले गई। गुजरात और राजस्थान की सीमा पर स्थित सरहद छापरी के पास एक मुठभेड़ में प्रजापति मारा गया।
*2005-2006: शेख के परिवार ने मुठभेड़ की जांच और कौसर बी के ठिकाने का पता लगाने के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख किया। न्यायालय ने गुजरात की सीआईडी को मामले की जांच करने का निर्देश दिया।
*30 अप्रैल, 2007: गुजरात सरकार ने न्यायालय में एक रिपोर्ट दाखिल कर बताया कि कौसर बी की भी मौत हो चुकी है और उसके शव को जलाकर ठिकाने लगा दिया गया है।
*जनवरी 2010: उच्चतम न्यायालय ने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी।
*23 जुलाई, 2010: सीबीआई ने मामले में आरोप पत्र दाखिल किया।
*27 सितंबर, 2012 : उच्चतम न्यायालय ने सोहराबुद्दीन शेख और कौसर बी के कथित फर्जी मुठभेड़ मामले की सुनवाई गुजरात से महाराष्ट्र के मुंबई में स्थानांतरित कर दी। सीबीआई ने निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए स्थानांतरण का अनुरोध किया था।
*आठ अप्रैल, 2012: न्यायालय ने शेख, कौसर बी और प्रजापति मुठभेड़ मामलों की सुनवाई एक साथ करना शुरू किया।
*अक्टूबर 2017: मुंबई स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने 22 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए, जिनमें से अधिकांश गुजरात और राजस्थान के पुलिसकर्मी थे।
* नवंबर 2017: विशेष सीबीआई न्यायाधीश एसजे शर्मा ने मामले की सुनवाई शुरू की। अभियोजन पक्ष ने सुनवाई के दौरान 210 गवाहों से पूछताछ की, जिनमें से 92 मुकर गए।
*23 नवंबर, 2018: अदालत ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 313 के तहत गवाहों की पूछताछ और आरोपियों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी की।
*पांच दिसंबर 2018: अभियोजन और बचाव पक्ष के वकीलों की अंतिम दलीलें पूरी हुईं। अदालत ने 21 दिसंबर 2018 को फैसले के लिए मामला बंद कर दिया।
*21 दिसंबर 2018: विशेष सीबीआई अदालत ने सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए मामले के सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया।
*जनवरी 2019: शेख के परिवार ने सीबीआई को पत्र लिखकर बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ अपील दायर करने का अनुरोध किया।
*अप्रैल 2019: सोहराबुद्दीन शेख के भाइयों रुबाबुद्दीन और नयाबुद्दीन शेख ने बम्बई उच्च न्यायालय में बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ अपील दायर की।
*जून 2019: उच्च न्यायालय ने भाइयों द्वारा दायर अपील विचारार्थ स्वीकार कर ली।
*अक्टूबर 2025: सीबीआई ने उच्च न्यायालय को बताया कि जांच एजेंसी ने विशेष न्यायालय के फैसले को स्वीकार कर लिया है और कोई अपील दायर नहीं करेगी।
*16 जनवरी 2026: उच्च न्यायालय ने भाइयों द्वारा दायर अपीलों पर फैसला सुरक्षित रख लिया।
*सात मई 2026: बम्बई उच्च न्यायालय ने दायर अपीलें खारिज कर दीं और 22 आरोपियों की बरी होने के फैसले को बरकरार रखा।
भाषा जितेंद्र वैभव
वैभव
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