भाजपा के 'पांच ब्रह्मास्त्र' ने बंगाल में तृणमूल के किले में सेंध लगाने में मदद की: पार्टी सूत्र
माधव
- 05 May 2026, 10:03 PM
- Updated: 10:03 PM
नयी दिल्ली, पांच मई (भाषा) पश्चिम बंगाल में शासन प्रणाली, कथित सिंडिकेट राज, भ्रष्टाचार और घुसपैठ जैसे मुद्दे उठाने तथा प्रतिद्वंद्वियों पर किसी भी तरह के निजी हमलों से बचने की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की रणनीति ने राज्य की जनता को आकर्षित किया। पार्टी सूत्रों ने मंगलवार को यह बात कही।
सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के "सूक्ष्म प्रबंधन" के बलबूते भाजपा बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के किले में सेंध लगाने और उन क्षेत्रों में भी लगभग 50 फीसदी सीट जीतने में कामयाब रही, जहां मुस्लिमों की बड़ी आबादी है।
बंगाल में हाल में संपन्न विधानसभा चुनावों में भाजपा को राज्य की 294 सीट में से 207 पर जीत मिली। इसी के साथ बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले 15 साल लंबे तृणमूल शासन का अंत हो गया।
भाजपा सूत्रों ने कहा कि बंगाल चुनाव में भाजपा ने "पांच ब्रह्मास्त्र" का इस्तेमाल किया, जिनमें सांस्कृतिक पहचान और मांसाहार के मुद्दे पर भाजपा के खिलाफ तृणमूल के "झूठे विमर्श" को कुचलना शामिल है।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान तथा घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई जैसे मुद्दों पर भी काफी जोर दिया।
एक सूत्र ने कहा, "शीर्ष नेतृत्व का हर गतिविधि का बारीकी से प्रबंधन करना और कार्यकर्ताओं का पूरे राज्य में मतदाताओं से जुड़ने के लिए अथक प्रयास करना पार्टी के अन्य ब्रह्मास्त्र थे।"
भाजपा सूत्रों ने कहा कि इस बार पार्टी ने जिन सीट पर जीत हासिल की है, उनमें से कई सीट तृणमूल कांग्रेस का "अभेद्य किला" मानी जाती थीं।
पार्टी सूत्रों ने भाजपा के शानदार प्रदर्शन का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की "दूरदर्शी सोच", शाह की "अचूक चुनाव रणनीति एवं प्रबंधन" और लोगों की "बदलाव की आकांक्षा" को दिया।
उन्होंने कहा, "चुनाव के दौरान जब तृणमूल कांग्रेस 'खेला होबे' का नारा गढ़ने में व्यस्त थी, तब दिग्गज रणनीतिकार शाह ने बड़े आत्मविश्वास के साथ एक साहसिक भविष्यवाणी की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पहले चरण की कुल 152 सीट में से भाजपा 110 से अधिक सीट पर शानदार जीत दर्ज करने के लिए तैयार है।"
पार्टी सूत्रों ने कहा, "विपक्ष ने इसे महज चुनावी दावा बताकर खारिज कर दिया था। हालांकि, जब नतीजे आए तो शाह का जमीनी स्तर पर बूथ प्रबंधन और राजनीतिक दूरदर्शिता सौ फीसदी सही साबित हुई।"
सूत्रों ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा ने पहले चरण की 152 सीट में से 117 पर जीत हासिल की, जिससे स्पष्ट है कि चुनावी समीकरण पहले चरण के मतदान से ही भाजपा के पक्ष में थे।
उन्होंने कहा कि दूसरे चरण में भी भाजपा ने ऐतिहासिक बढ़त हासिल करते हुए सीधे 90 सीट जीतीं, जो 2021 में उसकी मात्र 18 सीटों की तुलना में एक महत्वपूर्ण छलांग है।
भाजपा के एक सूत्र ने कहा, "यह एकतरफा जनादेश है। भाजपा ने अपने वोट प्रतिशत में सात फीसदी से अधिक की वृद्धि करके 130 सीट का शानदार लाभ हासिल किया है।"
सूत्र ने कहा, "तृणमूल कांग्रेस ने पिछले 15 वर्षों से जिन 119 निर्वाचन क्षेत्रों पर लगातार कब्जा जमाए रखा था, उनमें से 62 फीसदी (74 सीट) छीनकर भाजपा ने अपनी अजेय लहर का अकाट्य प्रमाण पेश किया है।"
उसने बताया कि पिछले 10 वर्षों से जिन 162 सीट पर तृणमूल कांग्रेस का दबदबा कायम था, भाजपा ने उनमें से 102 सीट पर शानदार जीत दर्ज की।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा की चुनाव रणनीति की सफलता का सबसे "ठोस सबूत" ऐसे जिले हैं, जहां मुसलमानों की अच्छी खासी आबादी है।
उन्होंने कहा कि उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जिलों में, जहां मुस्लिम आबादी 26-66 प्रतिशत तक है, भाजपा ने कुल 118 सीट में से 56 सीट जीतीं, जो 2021 में पार्टी को हासिल 14 सीट से कहीं अधिक है।
भाजपा सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने पश्चिम बंगाल के दस जिलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए तृणमूल का सूपड़ा साफ कर दिया।
उन्होंने कहा कि भाजपा का गढ़ कहलाने वाले उत्तर बंगाल की बात करें, तो पार्टी ने कूच बिहार में नौ, जलपाईगुड़ी में सात, दार्जिलिंग में पांच, अलीपुर में पांच और कलिंपोंग में एक सीट जीती।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने दक्षिण बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर में 16, पुरुलिया में नौ और झाड़ग्राम में चार सीट पर जीत हासिल की।
एक सूत्र ने कहा, "चुनाव प्रचार के दौरान जनता के मिजाज को भांपते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भविष्यवाणी की थी कि तृणमूल कांग्रेस कई जिलों में अपना खाता भी नहीं खोल पाएगी। बंगाल की जनता ने इस भविष्यवाणी को सच साबित कर दिया।"
सूत्रों ने कहा कि शाह के 15 दिनों तक पश्चिम बंगाल में डेरा डालने से भाजपा के चुनाव अभियान और रणनीति को मजबूती मिली।
उन्होंने कहा कि शाह की मौजूदगी और मार्गदर्शन ने पार्टी कार्यकर्ताओं को "प्रेरित और उत्साहित" किया, जिन्होंने 80,000 बूथ पर हर मतदाता तक पहुंच बनाने का प्रयास किया।
भाषा पारुल माधव
माधव
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