विवेक विहार अग्निकांड: पीड़ितों ने अग्निशमन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया
दिलीप
- 04 May 2026, 10:26 PM
- Updated: 10:26 PM
नयी दिल्ली, चार मई (भाषा) दिल्ली के विवेक विहार की गलियों में सोमवार को शोक और गुस्से का माहौल रहा। भीषण आग में बचे लोगों और मृतकों के परिजनों ने आपातकालीन प्रतिक्रिया में खामियों का आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि दमकल की गाड़ियों के आने में देरी, पानी का कम दबाव और उपकरणों के अप्रभावी उपयोग ने बचाव कार्यों में बाधा डाली, जबकि अंदर फंसे लोग जीवित थे और मदद के लिए पुकार रहे थे।
रविवार तड़के चार मंजिला आवासीय इमारत में लगी भीषण आग में अपने परिवार के पांच सदस्यों को खोने वाली सोनाली जैन ने कहा, "आंचल का अपने पिता को आखिरी फोन सुबह करीब 4.30 बजे आया था... इसका मतलब है कि वे 4.30 बजे तक जीवित थे।" इस त्रासदी में कुल नौ लोगों की मौत हुई है।
मृतकों में सोनाली के रिश्तेदार अरविंद जैन (60), अनीता जैन (58), निशांत जैन (35), उनकी पत्नी आंचल जैन (33) और उनका छोटा बच्चा अकाय शामिल हैं।
फंसे हुए लोगों के साथ अपने अंतिम संपर्क को याद करते हुए स्थानीय लोगों ने कहा कि आग की लपटें तीव्र होने के काफी समय बाद तक वे जीवित थे।
पीछे की ओर 'अपर ग्राउंड फ्लोर' पर रहने वाले कमल गोयल ने बताया कि आग उनके घर के ठीक ऊपर वाली मंजिल से शुरू हुई थी।
उन्होंने आरोप लगाया, "दमकल की गाड़ी फोन करने के कम से कम 20 मिनट बाद आई, और आने के बाद भी उन्हें अपने उपकरण सेट करने में लगभग 30 मिनट लग गए। पानी का दबाव बहुत कम था और पाइप लीक हो रहे थे।"
उन्होंने कहा कि एक घंटे से भी कम समय में आग पूरी तरह से ऊपर की मंजिलों तक फैल गई और वे आग की लपटों में घिर गए।
उन्होंने आग के दौरान निशांत जैन से हुई बातचीत को भी याद किया।
गोयल ने कहा, "वह बार-बार पूछ रहा था कि क्या दमकल की गाड़ी आ गई है। मैंने उसे बताया कि वे आ गए हैं, लेकिन उसने कहा कि आग बहुत ज्यादा फैल गई है। मैंने उसे वेंटिलेशन के लिए पीछे की ग्रिल की ओर जाने को कहा, लेकिन वे वहां तक नहीं पहुंच सके। उसके बाद, उसका फोन लगना बंद हो गया।"
अन्य निवासियों ने भी आरोप लगाया कि जरूरत पड़ने पर मेटल कटर जैसे उपकरण उपलब्ध नहीं थे, और बिजली की आपूर्ति कट जाने के कारण शुरू में उन्होंने काम नहीं किया।
हालांकि, दिल्ली अग्निशमन सेवा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अभियान के दौरान कोई देरी या उपकरणों ने काम करना बंद नहीं किया था।
अग्निशमन अधिकारी मुकेश वर्मा ने कहा, "ऐसी कोई समस्या हमारे संज्ञान में नहीं आई। हमने कई स्टेशनों - शाहदरा, ताहिरपुर, गोकुलपुरी और लक्ष्मी नगर - से गाड़ियां भेजी थीं और वे दूरी के आधार पर एक-एक करके पहुंचीं। पहली गाड़ी पांच से छह मिनट के भीतर पहुंच गई थी।"
उन्होंने कहा कि पानी की कोई कमी नहीं थी और न ही पानी के दबाव की कमी हुई।
वर्मा ने कहा, "हमारे कटर बैटरी से चलते हैं और वे काम कर रहे थे।"
उन्होंने बताया कि लगभग 14 वाहन तैनात किए गए थे और लगभग 15 लोगों को बचाया गया।
वर्मा ने कहा कि आग की तीव्रता के कारण तत्काल प्रवेश करना कठिन था और कई पीड़ितों की मौत धुएं के कारण दम घुटने से हुई।
इस बीच, निवासियों ने कहा कि बार-बार कोशिशों के बावजूद पीड़ित बाहर निकलने में असमर्थ रहे।
सोनाली ने कहा, "मेरे घर में कोई डिजिटल लॉक नहीं थे। दरवाजे लकड़ी के थे, लेकिन गर्मी के कारण वे जाम हो गए थे। कटर समय पर नहीं आए, दरवाजा तोड़ा नहीं जा सका।"
निवासियों ने बचाव के लिए लंबे और खौफनाक इंतजार का भी जिक्र किया।
इमारत में सामने की तरफ सबसे ऊपर की मंजिल पर रहने वाले 60 वर्षीय सुधीर कुमार मित्तल ने बताया कि उनका परिवार बालकनी पर लगभग एक घंटे तक फंसा रहा।
उन्होंने कहा, "हम पांच लोग - मैं, मेरी पत्नी, मेरा पोता, बेटी और पुत्रवधू - बालकनी में लगभग एक घंटे से इंतजार कर रहे थे। बाद में, एक क्रेन आई लेकिन मैं अपनी स्थिति के कारण उस पर नहीं चढ़ सका। बाद में ट्रॉली फिर से आई और मेरे परिवार को बचाया गया।"
उन्होंने बताया कि गर्मी इतनी भीषण थी कि उनके घर के सात एसी पिघल गए और पूरा ड्राइंग रूम क्षतिग्रस्त हो गया।
इमारत में 330 वर्ग गज के आठ फ्लैट थे - चार सामने और चार पीछे की तरफ। इमारत में प्रवेश और निकास का केवल एक ही रास्ता था।
भाषा नोमान नोमान दिलीप
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