दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रबंधन स्कूल के प्रथम वर्ष के छात्रों ने वरिष्ठ छात्रों पर लगाए उत्पीड़न के आरोप
शोभना प्रशांत
- 30 Jun 2024, 09:10 PM
- Updated: 09:10 PM
नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रबंधन अध्ययन संकाय (एफएमएस) के प्रथम वर्ष के कई छात्रों ने अपने वरिष्ठ छात्रों पर उत्पीड़न के आरोप में शिकायत दर्ज कराई है। इसके बाद संस्थान के प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
एफएमएस के डीन वेंकट रमन ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
संस्थान के शिकायत निवारण प्रकोष्ठ को भेजी गई शिकायत में छात्रों ने आरोप लगाया है कि उन्हें कुछ काम करने के लिए दिए गए और उन्हें पूरा करने के लिए रात 2.30 बजे जैसी ‘‘असामान्य समयसीमा’’ दी गई, साथ ही बातचीत के लिए परिसर में सुबह पांच बजे जैसे ‘‘असामान्य वक्त’’ बुलाया गया और ऐसा नहीं करने पर उन्हें ग्रीष्मकालीन प्लेसमेंट सहयोग को छोड़ने के लिए मजबूर किया गया।
एफएमएस का ‘प्लेसमेंट सेल’ वरिष्ठ छात्रों द्वारा ही संचालित होता है।
इस संबंध में दो ईमेल किए गए, जिनमें से एक 22 जून और दूसरा 23 जून का है। इनसे पता चलता है कि छात्रों को देर रात 10 बजे असाइनमेंट दिए गए थे और उन्हें देर रात ‘‘2.29.59’’ बजे तक जमा करने के लिए कहा गया था।
शिकायत निवारण प्रकोष्ठ को दी गई शिकायत में एक छात्र ने नाम उजागर नहीं करते हुए आरोप लगाया, ‘‘ 15 जून से हम पर अत्यधिक काम का बोझ डाला जा रहा है, हमें सोने नहीं दिया जा रहा । मानो अत्यधिक दबाव ही काफी नहीं था, वरिष्ठ हमारे शब्दों पर भद्दी टिप्पणियां लिख रहे हैं जो हमें हतोत्साहित करने और अपमानित करने वाले हैं।’’
घटना की जानकारी देने वाले एक अन्य ईमेल में आरोप लगाया गया कि इस व्यवहार के कारण एक छात्र को परिसर में ‘‘घबराहट से दौरा पड़ा और वह बेहोश हो गया।’’
आरोपों के बारे में पूछे जाने पर एफएमएस के डीन रमन ने कहा कि इन एमबीए छात्रों को कॉरपोरेट मामलों की जानकारी के लिए ‘केस स्टडी’ दी जाती है।
रमन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ इस तरह के कार्य वरिष्ठ छात्र देते हैं जिसका मकसद छात्रों को आगे नौकरियां पाने के लिए तैयार करना होता। अगर कोई कार्य रात ढाई बजे दिया गया तो आपको देखा चाहिए कि वरिष्ठ भी इन असाइनमेंट के मूल्यांकन के लिए तब तक जागे रहे।’’
उन्होंने कहा कि मूल रूप से वे एक दूसरे की मदद कर रहे थे।
डीन ने कहा कि हालांकि इस प्रक्रिया में अगर कुछ गलत कहा गया तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पास एक रैगिंग रोधी समिति है, अगर किसी को लगता है कि उसके साथ कोई आपत्तिजनक व्यवहार हुआ है तो वह समिति के पास जा सकता है।’’
रमन ने बताया कि प्रथम वर्ष के छात्रों से उनके प्रवेश के समय रैगिंग रोधी शपथ-पत्र देने को कहा गया था।
उन्होंने कहा कि इसी तरह की एक हालिया घटना में बिजनेस स्कूल ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को एक रिपोर्ट सौंपी है जिसमें कहा गया है कि जांच में आरोप ‘‘तथ्यात्मक रूप से गलत’’ पाए गए हैं।
डीन ने कहा, ‘‘कुछ दिन पहले भी ऐसी ही घटना हुई थी, जिसमें छात्रों ने आरोप लगाया था कि उन्हें ब्रेक नहीं दिया गया। हमारी रैगिंग रोधी समिति ने पाया कि दावे तथ्यात्मक रूप से गलत थे। हमने यूजीसी को इस बारे में जानकारी देते हुए एक रिपोर्ट सौंपी है।"
भाषा शोभना