आदित्यनाथ ने नवचयनित लेखा परीक्षकों को सौंपे नियुक्ति पत्र, बोले-उप्र अब आत्मनिर्भर राज्य
संतोष
- 04 May 2026, 05:54 PM
- Updated: 05:54 PM
लखनऊ, चार मई (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि राज्य आज बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को अपने वित्तीय संसाधनों के दम पर पूरा करने की क्षमता रखता है और अब यह 'राजस्व अधिशेष राज्य" बन चुका है।
मुख्यमंत्री ने लखनऊ स्थित लोकभवन में सहकारी समितियां एवं पंचायत लेखा परीक्षा विभाग के लिए नवचयनित 371 लेखा परीक्षकों तथा स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग के 129 नवचयनित कर्मियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश को "बीमारू राज्य" माना जाता था और वित्तीय स्थिति कमजोर थी। उन्होंने दावा किया कि उस समय राज्य को कर्ज देने के लिए बैंक भी तैयार नहीं होते थे, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे जैसी करीब 600 किलोमीटर लंबी परियोजना बिना बैंक कर्ज के राज्य के संसाधनों से पूरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि अब बैंकों और वित्तीय संस्थानों में उत्तर प्रदेश में निवेश करने की होड़ है।
उन्होंने कहा, "देश के सबसे लंबे गंगा एक्सप्रेसवे पर 36,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। एक्सप्रेसवे के किनारे नौ औद्योगिक और 'लॉजिस्टिक्स' हब विकसित किए जा रहे हैं, जिसके लिए लगभग 7,000 एकड़ अतिरिक्त भूमि का अधिग्रहण किया गया है।"
उन्होंने कहा, "औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक्स हब सहित, पूरी परियोजना पर 42,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं।"
उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा कि पहले योजनाओं की लागत कई गुना बढ़ जाती थी और परियोजनाएं अधूरी रह जाती थीं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने इसके विपरीत वित्तीय अनुशासन को मजबूत कर राज्य की अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय और बजट को तीन गुना कर दिया।
पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधने के क्रम में योगी ने जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनसी) प्रोजेक्ट का जिक्र करते हुए कहा कि इसकी लागत 200 करोड़ रुपये से बढ़कर 860 करोड़ रुपये हो गई, जबकि यह अब भी अधूरा है। यह वित्तीय अनुशासनहीनता और कुप्रबंधन का एक बड़ा उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि यह जनता के पैसे का गलत इस्तेमाल है और एक महान हस्ती के नाम का अपमान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के कारण अब तक नौ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और गोपनीय होती है, जिसमें किसी प्रकार की सिफारिश की कोई भूमिका नहीं होती।
उन्होंने यह भी कहा कि पहले की भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक जैसी समस्याएं थीं, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में भ्रष्टाचार "कत्तई बर्दाश्त नहीं" करने की नीति के तहत पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है।
मुख्यमंत्री ने नवचयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपने कार्य से राज्य के वित्तीय ढांचे को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
भाषा जफर आनन्द
मनीषा रंजन
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