ओडिशा: बहन का कंकाल बैंक ले जाने वाले जीतू मुंडा को मिली सरकारी सहायता और निजी चंदा
नेत्रपाल
- 01 May 2026, 09:45 PM
- Updated: 09:45 PM
भुवनेश्वर/क्योंझर, एक मई (भाषा) अपनी मृत बहन का पैसा निकालने के लिए मृत्यु प्रमाण के तौर पर उसका कंकाल बैंक ले जाकर सुर्खियों में आए ओडिशा के जीतू मुंडा को अब कई सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने लगा है। साथ ही, उन्हें विभिन्न स्तरों पर निजी चंदा भी प्राप्त हुआ है।
अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के हस्तक्षेप के बाद क्योंझर जिला प्रशासन ने 50 वर्षीय जीतू मुंडा को तत्काल सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान किए हैं। राजस्व मंडलायुक्त (आरडीसी), उत्तरी प्रभाग, एस. के. महापात्र ने बृहस्पतिवार को पताना ब्लॉक के दियानाली गांव का दौरा किया था, जिसके कुछ ही घंटों के भीतर जीतू और उसके भाई के घर में बिजली का कनेक्शन लगा दिया गया।
अधिकारियों के अनुसार, मुंडा को राज्य सरकार की मासिक वित्तीय सहायता योजना से जोड़ दिया गया है। साथ ही, उनका राशन कार्ड भी जारी कर दिया गया है, जिसके माध्यम से उन्हें अब हर महीने 35 किलो मुफ्त चावल मिलेगा।
गत 27 अप्रैल को कंकाल का मामला सामने आने के तुरंत बाद सरकार ने मृतक बहन का मृत्यु प्रमाणपत्र और कानूनी उत्तराधिकारी दस्तावेज तैयार करवाए तथा 24 घंटे के भीतर बैंक में जमा राशि मुंडा को सौंप दी गई।
आदिवासी व्यक्ति जीतू मुंडा ने अपनी बहन कलरा मुंडा (56) के शव को कब्र से निकाला था, जिसकी मृत्यु जनवरी में हुई थी। वह कंकाल को लेकर लगभग तीन किलोमीटर पैदल चलकर ओडिशा ग्रामीण बैंक की मालीपोसी शाखा पहुंचा और उसे मृत्यु के प्रमाण के रूप में बैंक अधिकारियों के सामने पेश किया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब प्रसारित हुआ था।
ग्रामीण बैंक के प्रायोजक 'इंडियन ओवरसीज बैंक' ने कहा कि यह घटना दावा निपटान प्रक्रिया की जानकारी न होने के कारण हुई। बैंक का दावा है कि मुंडा ने शाखा प्रबंधक द्वारा बताई गई प्रक्रियाओं को मानने से इनकार कर दिया था।
वहीं, मुंडा का कहना है कि बैंक ने उनसे बहन को साथ लाने की जिद की थी।
उन्होंने आरडीसी से कहा, ''मुझसे कहा गया कि पैसा निकालने के लिए बहन को बैंक लाना होगा। जब मैंने कहा कि वह मर चुकी है, तो उन्होंने हस्ताक्षर के लिए उसे लाने पर जोर दिया। इसलिए मैंने कब्र खोदी और कंकाल ले आया। मुझे इस पर कोई शर्म नहीं है; अगर मैं ऐसा नहीं करता तो हमें अपना पैसा नहीं मिलता।''
मुंडा ने कहा, "अगर मैं कंकाल बैंक नहीं ले जाता, तो वे मेरी मृत बहन के नाम पर जमा हमारे परिवार के पैसे हमें कभी नहीं देते। मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है। अगर बैंक अधिकारी आपकी फरियाद न सुनें, तो कोई और क्या कर सकता है?"
क्योंझर के जिलाधिकारी विशाल सिंह ने बताया कि मुंडा को रेडक्रॉस निधि से 30,000 रुपये की तत्काल सहायता दी गई है।
उन्होंने कहा, ''प्रशासन ने प्रक्रिया से ऊपर मानवता को रखा। उनकी बहन के खाते में जमा 19,402 रुपये (ब्याज सहित) उन्हें सौंप दिए गए हैं।''
इसके अलावा, दिल्ली के एक कोचिंग सेंटर ने मुंडा के नाम पर 10 लाख रुपये जमा किए हैं, जबकि आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद संजय सिंह ने अपने वेतन से 50,000 रुपये की सहायता भेजी है।
शुरुआती जांच रिपोर्ट के अनुसार, बैंक कर्मचारियों द्वारा जीतू मुंडा के साथ असहयोग किए जाने की बात सामने आई है।
भाषा सुमित नेत्रपाल
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