अश्नीर ग्रोवर भारत-पे के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट हटाएं: दिल्ली उच्च न्यायालय
संतोष धीरज
- 15 Mar 2024, 08:01 PM
- Updated: 08:01 PM
नयी दिल्ली, 15 मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को भारत-पे के सह-संस्थापक अश्नीर ग्रोवर द्वारा वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनी के खिलाफ पोस्ट की गई कुछ ‘अपमानजनक’ सामग्री पर नाराजगी व्यक्त की और उन्हें अपने उन सोशल मीडिया पोस्ट को हटाने का निर्देश दिया जिनमें इसे निशाना बनाया गया है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि ग्रोवर के पोस्ट में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के अध्यक्षों को ‘छोटे लोग’ कहा गया था और यह भारत-पे बोर्ड के वर्तमान अध्यक्ष रजनीश कुमार को लक्ष्य करके किया गया एक परोक्ष कटाक्ष था, जो पहले इस पद पर रह चुके हैं।
यह देखते हुए कि यह ‘पूरी तरह से टालने योग्य’ था, उन्होंने कहा कि ग्रोवर ने प्रथम दृष्टया अदालत के पहले के आदेशों का पूरी तरह से उल्लंघन किया है, जिसमें उनसे कंपनी के खिलाफ अपमानजनक आरोप नहीं लगाने के लिए कहा गया था।
न्यायाधीश ने ग्रोवर द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को लिखे गए एक पत्र के बारे में समाचार रिपोर्ट को हटाने का भी आदेश दिया, जिसमें भारत-पे के खिलाफ आरोप लगाए गए थे।
अदालत का आदेश भारत-पे का स्वामित्व रखने वाली ‘रेजिलिएंट इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड’ द्वारा अपने पूर्व प्रबंध निदेशक अश्नीर ग्रोवर और उनके परिवार के सदस्यों से 88 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली और मानहानि के खिलाफ राहत पाने से जुड़े मुकदमे पर आया था।
न्यायमूर्ति सिंह ने कहा, ‘‘प्रतिवादी संख्या दो (अश्नीर ग्रोवर) को, एक व्यवसायी होने और वादी कंपनी के संस्थापक होने के नाते, ऐसी पोस्ट और अपमानजनक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।’’
न्यायाधीश ने ग्रोवर के वकील सुब्रमण्यम से कहा, कृपया उन्हें चेताएं।
अदालत ने कहा, ‘‘चाहे कुछ भी हो रहा हो, आप खुद कुछ नहीं करेंगे। आप इस तरह चीजों को सार्वजनिक नहीं करेंगे।’’
वादी कंपनी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कहा कि मामले में पहले दिए गए अदालती आदेशों के बावजूद अश्नीर ग्रोवर ने हाल ही में आरबीआई को लिखे अपने पत्र के संबंध में सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा की और आरोप लगाया कि भारत-पे ने विनियामक से ‘धोखाधड़ी’ की है। कंपनी के वकील ने जोर देकर कहा कि कंपनी के बोर्ड के वर्तमान अध्यक्ष के खिलाफ भी आरोप लगाए गए थे।
अदालत ने कहा कि ‘अनावश्यक’ रूप से सार्वजनिक बयान देने से न केवल कंपनी के व्यवसाय और कर्मचारियों पर असर पड़ेगा, बल्कि इसकी प्रतिष्ठा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। अदालत ने कहा, ‘‘यह एक सुस्थापित कंपनी है। जो भी विवाद है, उसे सुलझा लिया जाएगा। आप कंपनी के व्यवसाय को नष्ट नहीं करेंगे। अगर ऐसा हुआ, तो आगे कौन निवेश करेगा?’’
भाषा संतोष