भाजपा-कांग्रेस ने एक-दूसरे पर विधानसभा में महिलाओं के आरक्षण को बाधित करने का आरोप लगाया
रंजन
- 18 Apr 2026, 07:29 PM
- Updated: 07:29 PM
तिरुवनंतपुरम, 18 अप्रैल (भाषा) लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पारित न होने पर भाजपा ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष पर प्रगति के बजाय राजनीति को चुनने और महिलाओं के साथ "धोखा" करने का आरोप लगाया, जिसके जवाब में कांग्रेस ने पलटवार करते हुए दावा किया कि विधानसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण को "नष्ट" करने वाली भाजपा ही है।
इस विधेयक का उद्देश्य 2029 से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना था।
इस विधेयक में लोकसभा में सीटों की संख्या को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 करने का भी प्रस्ताव था, ताकि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को समायोजित किया जा सके।
केंद्रीय पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस एवं पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लोकसभा में कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष पर विधेयक के विरोध में मतदान करके प्रगति के बजाय राजनीति को चुनने का आरोप लगाया।
एक भावुक फेसबुक पोस्ट में गोपी ने कहा कि यह सिर्फ एक विधेयक नहीं, बल्कि लाखों भारतीय महिलाओं की आकांक्षाओं का ह्रास हुआ है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर पलटवार करते हुए कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने दिल्ली में पत्रकारों से कहा कि विधानसभाओं में महिलाओं के आरक्षण को "नष्ट" करने वाली भाजपा ही है।
वेणुगोपाल ने कहा कि केंद्र सरकार को 2023 में पारित महिला आरक्षण विधेयक के अनुसार 543 सदस्यीय लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को "एक मिनट की देरी के बिना" लागू करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम शुरू करेगी।
उन्होंने कहा, "2029 के लोकसभा चुनाव महिलाओं के लिए आरक्षण पर आधारित होने चाहिए।"
अलप्पुझा लोकसभा सीट से सांसद वेणुगोपाल ने कहा कि भाजपा का उद्देश्य महिला आरक्षण लागू करना नहीं था।
उन्होंने कहा, "उनका इरादा लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करना और महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन करके देश पर अपना शासन बरकरार रखना था। उनका यह प्रयास विफल हो गया और उनकी प्रतिक्रिया उनकी निराशा को दर्शाती है।"
शुक्रवार को विधेयक के पारित न होने के बाद, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने इसे कांग्रेस, माकपा और उनके गठबंधन द्वारा महिलाओं के साथ "ऐतिहासिक विश्वासघात" करार दिया।
चंद्रशेखर ने दावा किया कि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में प्रस्तावित संशोधनों के खिलाफ मतदान करने से इन दोनों पार्टियों और उनके 'इंडिया' का "असली चेहरा" सामने आ गया है।
विधेयक के समर्थन में 298 सदस्यों ने मतदान किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। मतदान करने वाले 528 सदस्यों में से विधेयक को दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी।
भाषा तान्या रंजन
रंजन
1804 1929 तिरुवनंतपुरम