‘लचीली नैतिकता’ अपनाती है कांग्रेस : राकेश सिन्हा ने राज्यसभा में कहा
अविनाश मनीषा
- 28 Jun 2024, 05:34 PM
- Updated: 05:34 PM
(तस्वीर सहित)
नयी दिल्ली, 28 जून (भाषा) भारतीय जनता पार्टी के नेता राकेश सिन्हा ने शुक्रवार को कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए उस पर ‘लचीली नैतिकता’ अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि विभिन्न मुद्दों पर मुख्य विपक्षी पार्टी का दोहरा मानदंड रहता है।
सिन्हा राज्यसभा में राष्ट्रपति अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा में भाग ले रहे थे। उन्होंने कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब प्रदेशों में उनकी सरकारें बन जाती हैं या उनकी सीटों की संख्या में वृद्धि हो जाती है तो वे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की पूजा करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि लेकिन जब वे चुनाव हार जाते हैं तो ईवीएम पर हमला बोलते लगते हैं और जनता को बरगलाने लगते हैं।
चर्चा के दौरान विपक्ष के अधिकतर सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे। इससे पहले, सभापति जगदीप धनखड़ ने उच्च सदन में वरिष्ठ विपक्षी नेताओं के आचरण पर क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा था कि ऐसा आचरण उन लोगों ने किया जिनसे नेतृत्व की अपेक्षा की जाती है। विपक्षी सदस्यों ने इस पर विरोध जताते हुए सदन से बहिर्गमन किया।
सिन्हा ने अभिभाषण की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जो कहा, वह निरंतरता में है। उन्होंने कहा कि 2014 में जो सूर्योदय हुआ था, उसकी किरणें सर्वत्र दिख रही हैं।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने संविधान निर्माता बाबा साहब आंबेडकर का भी विरोध किया। उन्होंने दावा किया कि भारत को आजादी मिलने के कुछ दिन बाद ही ऐसे स्वतंत्रता सेनानी को गिरफ्तार कर लिया गया जो सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज से जुड़े थे और कई आंदोलनों में जेल जा चुके थे।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार का विरोध करने पर मजरुह सुल्तानपुरी और बलराज साहनी जैसी मशहूर सिने हस्तियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। सिन्हा ने कहा कि ये दोनों लोग वामपंथी विचारधारा के थे और आरएसएस से संबद्ध नहीं थे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘निष्पक्ष पक्षपाती’’ करार देते हुए सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने गरीबों, हाशिए पर रह रहे लोगों के लिए पक्षपात किया लेकिन विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में उन्होंने जाति, धर्म या संप्रदाय को नहीं देखा और हर तबके को योजनाओं का लाभ मिला। उन्होंने इस क्रम में 80 करोड़ लोगों के बीच अनाज का वितरण या शौचालयों के निर्माण का विशेष तौर पर जिक्र किया।
भाजपा सदस्य ने कहा कि पानी और ऊर्जा पूरी दुनिया में बहस का मुद्दा हैं और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने दृष्टिकोण से इन दोनों चीजों से जुड़े आयामों को परिवर्तित किया है। इस क्रम में उन्होंने नवीनीकरणीय ऊर्जा की दिशा में उठाए गए कदमों और उनके परिणामों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि भारत में अंग्रेजों के जमाने में ही जलाशयों का सर्वेक्षण कराया गया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पानी की आवश्यकता और आने वाली पीढ़ियों को ध्यान में रखा तथा 2018-19 में देश में जलाशयों का सर्वेक्षण कराया।
चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के ही कृष्णपाल पंवार ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हाल में संपन्न आम चुनाव में अनुसूचित जाति के लोगों को गुमराह करने का प्रयास किया कि उनका आरक्षण खत्म हो जाएगा।
पंवार ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने आंबेडकर की तस्वीरें लगाकर वाहवाही लूटने का प्रयास किया लेकिन बाबासाहब का सबसे ज्यादा अपमान उसी पार्टी ने किया। उन्होंने कहा कि आंबेडकर ने संविधान के अनुच्छेद 370 का विरोध किया था लेकिन उसके बाद भी कांग्रेस सरकार ने उसे लागू किया।
उन्होंने दावा किया कि आंबेडकर के निधन के बाद कांग्रेस ने उनका यहां अंतिम संस्कार नहीं होने दिया और बाबासाहब का अंतिम संस्कार मुंबई में किया गया था। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने आंबेडकर से जुड़े विभिन्न स्थानों को विकसित किया।
भाजपा के ही भीम सिंह ने चर्चा को आगे बढ़ाते हुए आरोप लगाया कि अभी संपन्न हुए आम चुनाव में कांग्रेस दुष्प्रचार कर रही थी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में भी दुष्प्रचार पर चिंता जतायी गयी है। उन्होंने अभिभाषण को ‘‘शानदार, जानदार और वजनदार’’ बताते हुए कहा कि इसमें सरकार की पीठ भी थपथापयी गयी है वहीं कई मुद्दों पर चिंता भी जतायी गयी है।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उस पार्टी के सदस्य सुबह सदन में न्याय की मांग करते हुए नारेबाजी कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने ही सबसे ज्यादा न्यायपालिका और संविधान पर हमला किया है। उन्होंने कहा कि दो बार वरिष्ठतम न्यायाधीशों की वरीयता की अनदेखी करते हुए कनिष्ठ न्यायाधीश को देश का प्रधान न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने 42वें संशोधन के जरिए संविधान की मूल धारणा को ही बदल दिया। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में पहले धर्मनिरपेक्ष शब्द नहीं था लेकिन कांग्रेस ने उसमें यह शब्द जोड़ा। उन्होंने सवाल किया कि क्या उससे पहले भारत धर्मनिरपेक्ष देश नहीं था? उन्होंने आरोप लगाया कि तुष्टीकरण के लिए यह शब्द संविधान की प्रस्तावना में जोड़ा गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस हमेशा पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण की विरोधी रही है और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने काका कालेलकर समिति की सिफारिशों का विरोध किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में कांग्रेस की सरकारों ने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं किया।
सिंह ने दावा किया उनकी पार्टी भाजपा सामाजिक न्याय का सबसे अधिक पालने करने वाली पार्टी है।
भाषा अविनाश