‘पेटा इंडिया’ ने केरल के इडुक्की में महावत की जान लेने वाले वाली हथिनी के पुनर्वास की मांग की
राजकुमार सुरेश
- 28 Jun 2024, 04:23 PM
- Updated: 04:23 PM
इडुक्की , 28 जून (भाषा) केरल के पहाड़ी इडुक्की जिले में कथित तौर पर अवैध रूप से संचालित एक हाथी उद्यान में पिछले सप्ताह लक्ष्मी नामक एक हथिनी द्वारा महावत को मार दिये जाने के बाद पशु अधिकारवादी संगठन ‘पेटा’ ने राज्य के वन्यजीव विभाग से इस हथिनी का एक अभयारण्य में पुनर्वास कराने की अपील की है।
‘द पीपुल फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स’ (पेटा) इंडिया ने एक बयान में केरल के इस अवैध सफारी पार्क को स्थायी रूप से बंद करने तथा वहां बंधक बनाकर रखे गये सभी हाथियों का पुनर्वास कराने का भी आह्वान किया है।
‘पेटा इंडिया’ की निदेशक खुशबू गुप्ता ने एक बयान में कहा, ‘‘हाथियों को सालों तक जंजीरों में बांधकर एवं डरा-धमकाकर रखा जाता है, जिसके कारण डर और हताशा में वे हमला कर देते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पेटा इंडिया मुख्य वन्यजीव वार्डन से अपील करती है कि वह तत्काल लक्ष्मी को देखभाल के लिए अभयारण्य में भेजकर उसे और उसके संपर्क में आने वाले लोगों की रक्षा करे और उन सभी अवैध पार्क को बंद करें, जो खतरनाक तरीके से हाथियों को पर्यटकों को ले जाने के लिए मजबूर करते हैं।’’
‘पेटा इंडिया’ ने एक बयान में अन्य घटनाओं का भी हवाला दिया, जहां दक्षिण राज्यों में जंजीरों में बांधकर रखे गये हाथियों ने लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया और उनकी जान ले ली।
उसने कहा कि केरल समेत भारत में अवैध रूप से हाथियों को जंजीरों में बंधक बनाकर रखा जाता है और बिना अनुमति के उन्हें एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाया जाता है।
उसने कहा, ‘‘हाथी जंगली जीव होते हैं, जबकि किसी समारोह, सवारी, तमाशे या अन्य उद्देश्यों के वास्ते उनका इस्तेमाल किया जाता है, जिसके लिए उन्हें हिंसक तरीके से काबू में लेकर प्रशिक्षित किया जाता है। (हाथियों पर) काबू पाने के लिए उनके साथ मारपीट की जाती है और उनपर हथियार का इस्तेमाल भी किया जाता है।’’
उसने कहा, ‘‘मंदिरों में बंधक बनाकर रखे गये या सवारी के लिए इस्तेमाल में लाये जाने वाले हाथियों के पैरों में बहुत पीड़ा होती है, घंटों तक जंजीर में बांधकर कंक्रीट पर रखने से उनके पैरों में जख्म हो जाते हैं, जो बहुत ही दर्दनाक होते हैं। उनमें से ज्यादातर को पर्याप्त भोजन-पानी, चिकित्सकीय देखभाल नहीं मिलती है, उन्हें उनके प्राकृतिक जीवन से वंचित कर दिया जाता है।’’
पेटा ने कहा कि ऐसे में हाथी हताश और कुंठित होकर आक्रामक हो जाते हैं और कभी-कभी महावत, श्रद्धालु, पर्यटक या अन्य इंसान की जान ले लेते हैं।
भाषा राजकुमार