आई-पैक के निदेशक चंदेल को ईडी की 10 दिन की हिरासत में भेजा गया
वैभव
- 14 Apr 2026, 02:04 PM
- Updated: 02:04 PM
नयी दिल्ली, 14 अप्रैल (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने आई-पैक (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के सह-संस्थापक एवं निदेशक विनेश चंदेल को मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की 10 दिन की हिरासत में भेज दिया।
चंदेल को निदेशालय ने राजनीतिक दलों और अन्य संस्थाओं से प्राप्त धन के कथित हवाला लेनदेन से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया था।
यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से कुछ दिन पहले की गई है, जहां यह संस्थान क्रमशः तृणमूल कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) जैसे दलों को राजनीतिक परामर्श दे रहा है।
ईडी अधिकारियों ने बताया कि चंदेल को पूछताछ के बाद सोमवार शाम पौने आठ बजे गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि वह भोपाल स्थित राष्ट्रीय विधि संस्थान विश्वविद्यालय (एनएलआईयू) से विधि स्नातक हैं और कंपनी में 33 प्रतिशत हिस्सेदारी होने के कारण आई-पैक के ''प्रमुख निर्णय कर्ताओं'' में शामिल हैं।
उन्हें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शेफाली बरनाला टंडन के आवास पर सोमवार रात करीब 11 बजकर 55 मिनट पर पेश किया गया और अदालत ने उन्हें मंगलवार तड़के साढ़े तीन बजे 10 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया।
ईडी अधिकारियों ने बताया कि चंदेल को 28 मार्च को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज एक नये मामले में गिरफ्तार किया गया। यह मामला आई-पैक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ दिल्ली पुलिस की प्राथमिकी का संज्ञान लेने के बाद दर्ज किया गया था। प्राथमिकी में चंदेल, प्रतीक जैन और ऋषि राज सिंह समेत इसके निदेशकों के जरिए खातों में हेराफेरी और आय के ज्ञात स्रोत से अधिक धन के लेनदेन के आरोप लगाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि यह मामला पश्चिम बंगाल के कोयला घोटाले की जांच से ''जुड़ा'' हुआ है।
निदेशालय ने 28 मार्च को दर्ज मामले की जांच के तहत दिल्ली में चंदेल के परिसर के अलावा, बेंगलुरु में आई-पैक के एक अन्य सह-संस्थापक एवं निदेशक ऋषि राज सिंह के परिसर और मुंबई में आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व संचार प्रभारी विजय नायर के परिसर पर दो अप्रैल को छापा मारा था।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि चंदेल के निर्देश पर ''आई-पैक ने प्राप्त राशियों को हिसाब में दर्ज धनराशि (बैंकिंग माध्यमों) और बिना हिसाब की धनराशि (नकद) में बांटने का तरीका अपनाया और इस तरह वित्तीय गतिविधियों की वास्तविक प्रकृति और सीमा को जानबूझकर छिपाया।''
ईडी ने कहा, ''इन लेनदेन को इस तरह से किया गया था कि अवैध धन को वैध दिखाया जा सके और अपराध से अर्जित इस आय को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में शामिल करने और उसे सुव्यवस्थित करने के लिए उपयोग किया जा सके।''
न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि आई-पैक द्वारा अपनाए गए तौर-तरीके को देखते हुए यह मानने के कारण हैं कि चंदेल अपराध से अर्जित कई करोड़ रुपये की आय के सृजन, हेराफेरी और उसे रखने से जुड़ी प्रक्रियाओं एवं गतिविधियों में ''सक्रिय'' रूप से शामिल थे।
ईडी ने अदालत से कहा कि आई-पैक ने राजनीतिक दलों से प्राप्त धन समेत अपने धन को गैर-नकद एवं नकद में बांटा और इसका इस्तेमाल चुनाव संबंधी खर्च और जनमत को प्रभावित करने समेत अन्य उद्देश्यों के लिए किया गया।
चंदेल की गिरफ्तारी या ईडी द्वारा लगाए गए आरोपों पर आई-पैक की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा के नेतृत्व वाली चंदेल की कानूनी टीम ने अदालत से कहा कि उनके मुवक्किल को 28 मार्च की ईसीआईआर (ईडी की प्राथमिकी) के बारे में "बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी" जिससे उनके अधिकारों को "गंभीर नुकसान" पहुंचा है।
वकील ने दलील दी कि यह कार्यवाही ''राजनीतिक रूप से प्रेरित'' है और इसे ''तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में किया गया'' है।
अदालत ने चंदेल को ईडी हिरासत में भेजते हुए कहा कि यह मानने के कारण हैं कि वह ''हवाला माध्यमों'' के इस्तेमाल में शामिल हैं और उन्होंने बैंकिंग प्रणाली के बाहर नकद या अनौपचारिक हस्तांतरण के लिए ''अघोषित'' धन के उपयोग की अनुमति दी।
अदालत के आदेश में ईडी के उस आरोप का भी उल्लेख किया गया कि कोलकाता में आठ जनवरी को आई-पैक के खिलाफ की गई छापेमारी के बाद चंदेल ने प्रमुख कर्मचारियों के खातों से ई-मेल और संवेदनशील आंकड़ों को 'डिलीट' करने का निर्देश दिया तथा उन्होंने सबूत नष्ट करने एवं जांच में बाधा पहुंचाने का ''जानबूझकर'' प्रयास किया।
ईडी ने दावा किया कि आई-पैक अपराध से अर्जित करीब 50 करोड़ रुपये की आय के धनशोधन में शामिल थी।
तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोमवार रात इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि चंदेल की गिरफ्तारी से चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।
ईडी ने इस मामले में आठ जनवरी को आई-पैक के कार्यालय और इसके संस्थापक एवं निदेशकों में शामिल प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित आवास पर छापेमारी की थी। इसके बाद तब विवाद शुरू हो गया था जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच गईं और दस्तावेज अपने साथ ले गई थीं। पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होगा।
भाषा सिम्मी वैभव
वैभव
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