न्यायालय ने बंगाल एसआईआर पर कहा: 60 लाख लोगों के दावों, आपत्तियों पर सोमवार को ही फैसला
माधव
- 06 Apr 2026, 08:38 PM
- Updated: 08:38 PM
नयी दिल्ली, छह अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से बाहर किये गए करीब 60 लाख लोगों के दावों और आपत्तियों का आज ही निस्तारण किया जाएगा।
न्यायालय ने यह भी कहा कि राज्य में केंद्रीय बल तैनात रहेंगे।
शीर्ष अदालत ने एक महिला न्यायिक अधिकारी का अपने परिजनों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त करने वाला वीडियो देखने के बाद कहा कि ''हाल के दिनों में जिस तरह की घटनाएं हुई हैं, उन्हें देखते हुए पश्चिम बंगाल से केंद्रीय बलों को वापस नहीं बुलाया जाएगा।''
न्यायालय ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान न्यायिक अधिकारियों को मिली कथित धमकियों और उनके कामकाज में बाधा डाले जाने पर चिंता व्यक्त की तथा कहा कि यदि सरकारी तंत्र सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहता है, तो वह उपयुक्त उपायों पर विचार करेगा।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा, ''यदि सरकारी तंत्र विफल होता है, तो हम सोचेंगे कि क्या किया जा सकता है।''
पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान द्वारा प्रतिनिधित्व की जा रही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस दलील पर गौर किया कि गलत तरीके से हटाए गए या जोड़े गए नामों के खिलाफ याचिकाओं की सुनवाई के लिए स्थापित 19 अपीलीय अधिकरण अभी क्रियान्वित नहीं हो सके हैं।
प्रधान न्यायाधीश ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से इन अधिकरणों के लिए समान प्रक्रियाएं तैयार करने के वास्ते पूर्व वरिष्ठ न्यायाधीशों की तीन सदस्यीय समिति गठित करने को कहा।
पीठ ने कहा कि इस बीच, कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश से एक पत्र प्राप्त हुआ है, जिन्होंने एक अपीलीय अधिकरण की अध्यक्षता करने के लिए सहमति दी है।
पीठ ने कहा, ''...हम उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध करते हैं कि वह तीन पूर्व वरिष्ठतम मुख्य न्यायाधीशों या न्यायाधीशों की एक टीम गठित करें जो ऐसी प्रक्रिया निर्धारित करे, जिसका पालन सभी 19 अधिकरणों द्वारा अनिवार्य रूप से किया जाएगा। समिति कल तक प्रक्रिया निर्धारित करे ताकि अपीलों का निस्तारण शीघ्र किया जा सके।''
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अधिकरणों के पास मतदाता सूची में शामिल करने या बाहर करने के कारणों की जांच करने और दस्तावेजी साक्ष्यों की समीक्षा करने का अधिकार होगा, जिसमें वे रिकॉर्ड भी शामिल हैं जो ऑनलाइन अपलोड नहीं किए गए हैं।
शाम चार बजे शुरू हुई सुनवाई के दौरान, पीठ ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के एक पत्र का हवाला देते हुए कहा कि न्यायिक अधिकारियों ने 6 अप्रैल की दोपहर तक लगभग 60 लाख मामलों में से 59.15 लाख से अधिक दावों और आपत्तियों का निस्तारण कर दिया था।
पीठ ने गौर किया कि मालदा जिले में भी, जहां न्यायिक अधिकारियों को कथित घेराव समेत कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ा, लगभग आठ लाख मामलों का निस्तारण हो चुका है।
वरिष्ठ अधिवक्ता डी एस नायडू ने निर्वाचन आयोग का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने पीठ को सूचित किया कि शेष दावों पर आज ही फैसला किया जाएगा और सोमवार रात को पूरक निर्वाचक सूची प्रकाशित की जाएगी।
न्यायालय ने लंबित डिजिटल हस्ताक्षर अपलोड करने के लिए 7 अप्रैल तक का समय भी तय किया।
सुनवाई के दौरान, पीठ ने अधिकरणों के प्रभावी और निष्पक्ष रूप से कार्य करने के लिए अनुकूल वातावरण बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ''ऐसा वातावरण बनाएं, जहां अधिकरण अधिकतम काम कर सके।''
न्यायमूर्ति बागची ने इस बात पर जोर दिया कि निर्वाचन आयोग की भूमिका मतदाताओं की भागीदारी को सीमित करने के बजाय उसे बढ़ाने की है।
उन्होंने कहा, ''कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड नहीं किए जा सके। पावती न मिलने पर... यह मुद्दा फिर से उठेगा... अगली बार संवैधानिक अदालत में जाएगा।''
दीवान ने कहा, ''सात लाख अपील दायर की जा रही हैं। इनमें से केवल कुछ ही अपीलों पर 19 अपीलीय अधिकरणों ने सुनवाई की है...अपील दायर करने के लिए लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं।''
पीठ ने कहा, ''अधिकारी सुनवाई जारी रखेंगे और हम इसमें जल्दबाजी नहीं करना चाहते, लेकिन हमें कहीं न कहीं सूची को अंतिम रूप देना होगा। अपीलीय प्रक्रिया में एक महीना या 60 दिन भी लग सकते हैं।''
निर्वाचन आयोग के वकील ने तृणमूल नेता के एक भड़काऊ भाषण का हवाला दिया।
नायडू ने कहा, ''कल एक भाषण दिया गया था जिसमें कहा गया कि सीआरपीएफ अधिकारी उत्तर प्रदेश से आपको पीटने आ रहे हैं... तैयार रहें।''
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एक न्यायिक अधिकारी का एक पत्रकार ने साक्षात्कार लिया था, जिसमें अधिकारी ने कहा कि उनकी जान को खतरा है और अगर उन्हें कुछ हो जाता है, तो उनके बच्चों का ख्याल रखा जाए।
पीठ ने वीडियो देखे और स्पष्ट किया कि केंद्रीय बल राज्य में बने रहेंगे।
पीठ ने कहा कि चूंकि न्यायिक अधिकारियों द्वारा निर्णय की पूरी प्रक्रिया आज ही समाप्त होनी है, इसलिए निर्वाचन आयोग ''आज रात पूरक सूची प्रकाशित करेगा।''
भाषा सुभाष माधव
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